My love , My professor - Chapter 16
हनीमून के सुखद दिनों के बाद, राज और दिया अपने घर लौट आए। उनके दिल अब भी समुद्र किनारे बिताए गए उन शांतिपूर्ण पलों के प्यार से भरे हुए थे। वापसी एक मिश्रित एहसास थी—हनीमून की खूबसूरती किसी सपने जैसी थी, लेकिन अब उन्हें बाहर की दुनिया का सामना करना था और एक साथ अपने जीवन की नई शुरुआत करनी थी।
शहर में लौटने के शुरुआती दिन नई उम्मीदों से भरे हुए थे। उनका घर, जो पहले सिर्फ एक एकांत जगह था, अब एक साझा संसार बन गया था, जहाँ हर कोना उन यादों का वादा करता था जो वे अब साथ में बनाएँगे। घर शांत था; बस उनके कदमों की हल्की आवाज़ और बीच-बीच में गूंजती उनकी हँसी इसे जीवंत बना देती थी।
राज का एक खास अंदाज़ था जिससे वह दिया को सहज महसूस कराते थे। वह अक्सर उसे छोटी-छोटी बातों से चौंका देते थे—सुबह की चाय का कप, रसोई के काउंटर पर एक हाथ से लिखा नोट, या बस एक स्नेहभरा स्पर्श जो उसे विशेष महसूस कराता था।
वहीं दिया ने भी इन बदलावों को खुले दिल से अपनाया। उसने लिविंग रूम को नए सिरे से सजाया, हर सुबह उनका बिस्तर ठीक किया, और घर के चारों ओर छोटे-छोटे व्यक्तिगत स्पर्श जोड़े जो इस जगह को घर जैसा महसूस कराते थे। जब भी वह इधर-उधर देखती, उसे हर चीज़ में राज की उपस्थिति महसूस होती थी—चाहे वह उसके पसंदीदा किताबों का ढेर हो या शेल्फ पर रखी उनकी शादी की तस्वीर।
एक शाम, जब वे सोफे पर साथ बैठे थे, राज ने गंभीर स्वर में कहा,
Unlock this chapter with 5 diamonds to continue reading.