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Chapter 14

My love , My professor - Chapter 14

शादी के बाद वाली सुबह उत्साह और उम्मीदों से भरी हुई थी। सूरज की हल्की किरणें कमरे के पर्दों से छनकर आ रही थीं। राज और दिया अपने बिस्तर पर बैठे थे; दोनों के बीच एक नए जीवन की जिम्मेदारी का एहसास था। बाहर की दुनिया शांत थी, मानो उन्हें अपनी हनीमून यात्रा के पहले कुछ पल शांति से बिताने का मौका मिल रहा हो।

"क्या तुम यकीन कर सकते हो?" दिया ने हल्की खुशी से पूछा, जैसे शादी के दिन की उमंग अभी भी उसके दिल में थी। वह राज के कंधे पर सिर रखे बैठी थी; दोनों शांति से आनंद ले रहे थे। "हम शादीशुदा हैं, राज। अब यही हमारी हकीकत है।"

राज मुस्कुराया, अपनी उंगलियों से दिया के चेहरे को नाजुकता से सहलाया। "यह अहसास अजीब सा है, लेकिन मुझे इससे बेहतर कुछ नहीं चाहिए, दिया। यही वह शुरुआत है जिसका मैंने हमेशा सपना देखा था।" उसकी अंगुली दिया के गाल पर मसलती गई; यह कोमल स्पर्श दिया के दिल को छू गया।

"मुझे ऐसा लगता है... कि मैं पूरी हूँ," उसने धीरे से कहा, राज का चेहरा पकड़ते हुए। उसकी उंगलियाँ राज के जबड़े की रेखा पर हल्का सा फेरने लगीं। "तुम मुझे ऐसा महसूस कराते हो जैसे मैं वहीं हूँ जहाँ मुझे होना चाहिए।"

राज की नज़रें मुलायम हो गईं; उसके चेहरे पर एक सुकूनभरी मुस्कान थी। "तुम हमेशा वहीं रही हो, दिया। तुम मेरे दिल की ख्वाहिश हो, पहले दिन से ही।"

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