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Chapter 19

My love , My professor - Chapter 19

धीरे-धीरे वक्त बीत रहा था, और अब दिया ने घर में काम करना शुरू कर दिया था। दो महीने बच्चे के आने को हो गए थे, और दिया से इतने समय तक आराम नहीं किया जा रहा था। वह न जाने क्यों आजकल गुमसुम रहती थी और दिन भर खुद को शीशे में निहारती रहती थी। राज दिया को ऐसे देखता, तो उसके दिमाग में कुछ चलने लगता। इसी तरह एक दोपहर, जब बच्चा अपनी पालने में शांति से सोया हुआ था, राज ने अपना ध्यान दिया की ओर मोड़ दिया। वह बिस्तर पर लेटी हुई थी, उसके काले बाल तकिये पर फैले हुए थे, और उसकी त्वचा एक नई माँ की चमक से चमक रही थी। राज का दिल उसके लिए प्यार और इच्छा से दुख रहा था, पर वह फिर भी दुखी थी। जिसकी वजह से वो कहता है,

"तुम इतनी खूबसूरत हो, दिया," उसने फुसफुसाया, उसकी आवाज़ नींद की कमी और भावनाओं से खरखराती हुई। उसने झुककर हल्के से उसके होंठों को चूमा, उनके पुनर्मिलन की मिठास का आनंद ले रहा था।

जिसकी वजह से वही राज के ऐसे अचानक से किस करने पे वो शॉक हो जाती है पर फिर वो भी रिस्पॉन्स करने लगती है, उसके होंठ खुले उसकी जीभ का स्वागत करने के लिए, उनका चुंबन गहरा और जुनूनी था।

अब राज के हाथ उसके शरीर पर घूम रहे थे, उन वक्रताओं का पता लगा रहे थे जिन्हें वह इतनी अच्छी तरह से जानता था। उसने उसके कंधों को सहलाया, उसकी उंगलियाँ उसके नर्सिंग ब्रा के नरम कपड़े को छू रही थीं।

जिससे फिर दिया ने हल्के से अपनी पीठ को मोड़ा, उसके स्पर्श को आमंत्रित किया। उसने उसका ब्रा खोल दिया, उसके भरे हुए, सूजे हुए स्तन उजागर किए। उसके निपल का नज़ारा, गहरे और खड़े, उसके शरीर में इच्छा की एक लहर भेजी। पर दिया के चेहरे पर अब भी उदासी थी। तो वह उसका चेहरा अपने हाथों में थाम लेता है और कहता है,

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