My love , My professor - Chapter 10
राज और दिया के बीच तनाव अपने चरम पर पहुँच चुका था। हर दिन उनके लिए एक नई जंग बन गया था। अफवाहें, आरोप, और हर पल की निगरानी—ये सब उन्हें धीरे-धीरे तोड़ रहे थे। लेकिन उनके बीच का प्यार एक ऐसी आग थी जिसे दुनिया कितनी भी कोशिश करे, बुझा नहीं पा रही थी।
एक रात, जब राज ने नींद में करवटें बदलते हुए एक और बेचैन रात गुज़ारी, वह अपने डेस्क पर बैठा था। उसके चारों तरफ़ किताबें और कागज़ बिखरे हुए थे, लेकिन उसका ध्यान कहीं और था। दिया की बातों की गूंज उसके मन में थी। वह हर मुश्किल के बावजूद बहादुरी से सामना कर रही थी, लेकिन राज जानता था कि वह अंदर से टूट रही है।
क्योंकि वह खुद भी टूट रहा था।
फोन पर एक संदेश चमका—दिया का नाम स्क्रीन पर देखकर उसके चेहरे पर हल्की गर्माहट आई।
"राज, हमें बात करनी है।"
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