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Chapter 22

My love , My professor - Chapter 22

प्रेम की परीक्षा

अब राज और दिया की ज़िंदगी एक खूबसूरत तालमेल में ढल चुकी थी। सुबहें उनके बच्चे की मासूम हँसी से भरी होती थीं, दिनभर वे काम और जिम्मेदारियों को संभालते थे, और रातें एक-दूसरे के साथ बिताए गए सुकून भरे पलों में गुज़रती थीं। उनका प्यार वक़्त के साथ और मजबूत हुआ था—कभी जुनून से भरा, कभी शांति से भरा। लेकिन ज़िंदगी हमेशा आसान नहीं होती।

एक ठंडी शाम को, दिया के फ़ोन की घंटी बजी। वह सोफे पर बैठी थी, उनका बच्चा उसकी गोद में सिमटा हुआ था, और राज उसके बगल में बैठा मोबाइल स्क्रॉल कर रहा था। स्क्रीन पर अपनी माँ का नाम देखते ही दिया के मन में एक अनजानी घबराहट दौड़ गई।

"माँ?" उसने चिंतित आवाज़ में कहा।

दूसरी तरफ़ से उसकी माँ की घबराई हुई आवाज़ आई, "दिया, पापा की तबीयत ठीक नहीं है...आज वो बेहोश होकर गिर गए, उनका बीपी भी बहुत बढ़ गया है। प्लीज तुम आ जाओ...वो तुम्हें ही देखना चाहते हैं और डॉक्टर ने कहा है कि उन्हें तुरंत अस्पताल ले जाना पड़ेगा।" 🥺🥺

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