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Chapter 245

बेशर्म इश्क़ - Chapter 245

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अध्याय – अनकहे शक़ कमरे में हल्की रोशनी फैली थी। परदों से छनकर आती सुबह की धूप अखिल के चेहरे पर पड़ रही थी। वह बेड के सिरहाने टिककर बैठा था, थका-हारा, चेहरे पर रात की काली परछाइयाँ

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