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Chapter 85

यह आग जिस्म की नहीं इश्क की है

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रात के 12:01 हो गए थे जब दास्तान घर के अंदर कदम रखता है। आज वो अपनी मीटिंग में काफी ज्यादा थक गया था, लेकिन घर आते ही उसके दिमाग में कोहिनूर का ख्याल आता है। उसे लगा शायद कोहिनूर अ

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