इश्क़-ऐ-बाजार Ch. 2

कोठे की कोहिनूर पहली बार महफिल में नीलम होने जा रही है - Chapter 2

Posted by unicorngirl ✔️ • May 12, 2025 01:45 PM

माई जान ने कोहिनूर से कहा था कि आज रात के जश्न में शामिल होना है, जहाँ नाचने का कार्यक्रम रखा गया था। लेकिन कोहिनूर वहाँ नहीं जाना चाहती थी। वह इस दुनिया का हिस्सा नहीं थी। भले ही वह इस जगह पर रहती थी, लेकिन आज तक उसने इस दुनिया को न अपनाया था और न ही कभी अपनाना चाहा था। वह पूजा से कहती है—

"लेकिन आप मुझे वहाँ क्यों भेजना चाहती हैं, जबकि आप जानती हैं कि मैं अभी सिर्फ सत्रह साल की हूँ? आपके पास कोठा चलाने का लाइसेंस है, लेकिन वह भी सिर्फ अठारह साल से ऊपर के लोगों के लिए होता है। आप मुझे किसी भी काम में शामिल नहीं कर सकतीं। अगर आपकी शिकायत हो गई तो आपका लाइसेंस कैंसिल हो सकता है।"

माई, जिसने अभी-अभी अपने मुँह में पान रखा ही था, उसकी आँखें गुस्से से एकदम चौड़ी हो जाती हैं। वह गुस्से में कोहिनूर की तरफ देखती है और कहती है—

"२ टके की लड़की, मेरे सामने जबान चलाने की तेरी हिम्मत कैसे हुई? भूल गई कि तेरी औकात क्या है? हमारे टुकड़ों पर पलने वाली है तू! और ऊपर से यह हिम्मत कि तू मुझे यह कहे कि मेरा लाइसेंस कैंसिल करवा देगी? साँस लेने का जो तेरे पास लाइसेंस है ना, मैं उसे भी कभी भी रद्द करवा सकती हूँ।"

"तू तो बचपन से यहाँ रही है। मेरे तरीके तू अच्छे से जानती है। या तो हमारे धंधे में लड़की आती है, या फिर हमेशा के लिए चल बसती है। एक बार इस कोठे में जो लड़की आ जाती है, उसके पास सिर्फ दो ही रास्ते होते हैं—या तो शराफत से धंधे पर बैठ जाए, या फिर उसकी आँखें सीधे यमलोक में खुलती हैं।"

"शुक्र माना कि तू आज तक यहाँ जिंदा है और मुफ्त की रोटियाँ तोड़ रही है—वह भी सिर्फ अपनी माँ की वजह से। अगर मरते वक्त उसने मुझसे वादा न लिया होता ना, तो आज तू भी किसी की रखैल बनी होती।"

माई की बातें सुनकर कोहिनूर का गुस्सा बढ़ गया था, लेकिन वह अपनी मजबूरी और हदें जानती थी। उसने गुस्से में माई की तरफ देखते हुए कहा—

"अगर इतनी ही नफ़रत है मुझसे, तो क्यों भेज रही हो मुझे आज रात के जश्न में? तुम्हारे पास तो लड़कियों की कमी नहीं है। यहाँ बहुत सारी लड़कियाँ हैं, जो मुझसे भी सुंदर हैं और अच्छा नाचती हैं। तो फिर मुझे उन दरिंदों के सामने क्यों परोस रही हो?"

इतने में चंदा हँसते हुए बोली—

"क्योंकि तुम उम्र में सबसे छोटी और सबसे खूबसूरत हो।"

कोहिनूर चौंककर चंदा की तरफ देखती रह जाती है। चंदा अपनी इतराती मुस्कान के साथ कोहिनूर के पास आती है और उसके गाल पर उंगली रखते हुए कहती है—

"तेरा यह जो छोटा सा चेहरा है ना, जिस पर अभी भी बचपन झलकता है, लोगों को यही तो पसंद आता है। और तुझे कौन सा वहाँ जाकर कथक करना है? बस थोड़ी सी अदाएँ दिखानी हैं, थोड़े लटके-झटके लगाने हैं।"

इस कोठे में आने वाली हर लड़की जो इस काम को स्वीकार कर लेती है, वह माई की आज्ञा का पालन करती है। लेकिन सिर्फ एक कोहिनूर ही थी, जिसने हमेशा से माई की किसी भी बात को मानने से इनकार किया था। वह हर बार उसका विरोध करती थी।

इसकी वजह उसकी उम्र नहीं थी, बल्कि यह था कि वह जानती थी—जिस जगह उसे भेजा जा रहा है, वहाँ शरीफ लोग तो कतई नहीं आए होंगे। और अगर वह लोग शरीफ हैं, तो नाचने के लिए कोठे की लड़कियों को क्यों बुला रहे हैं?

वह लड़कियों के खरीदार हैं, और अगर किसी ने उसे चुन लिया और दुगनी कीमत दे दी, तो माई पैसों के लिए कुछ भी कर सकती है—यह कोहिनूर ने बचपन से ही देखा और समझा है।

गुस्से में उसने पूजा की तरफ देखा और कहा—

"नहीं जाऊँगी मैं! कहीं नहीं जाऊँगी!"

उसकी यह बात सुनकर माई का चेहरा गुस्से से तमतमा गया। उसके दाँत पान के साथ किटकिटाने लगे। उसकी आँखों में कोहिनूर के लिए नफ़रत साफ़ झलक रही थी। यह वही लड़की थी जिसे उसने बचपन से पाला था, अपने टुकड़ों पर बड़ा किया था, और आज वही लड़की उसके खिलाफ़ बोल रही थी। यह बात माई को बिल्कुल बर्दाश्त नहीं हुई।

अगले ही पल माई उसके पास आती है और उसके गाल पर एक जोरदार तमाचा जड़ देती है। कोहिनूर सम्भाल नहीं पाती और लड़खड़ाकर जमीन पर गिर जाती है। उसके गाल पर इतना तेज थप्पड़ पड़ा था कि पूरा चेहरा जलने लगा था और उसकी आँखों से आँसू बहने लगे थे। लेकिन तभी चंदा ने माई को रोका और पीछे करते हुए कहा, "यह क्या कर रही हो माई? क्यों मार रही हो उसे? जानती हो ना आज रात इसका महफ़िल में होना कितना ज़रूरी है। ऐसे में अगर इसके चेहरे पर दाग लग गया तो कौन देखेगा इसे?"

माई ने गुस्से में कोहिनूर को देखते हुए चंदा से कहा, "मेकअप ठूँस इसके चेहरे पर, जितना हो सके उतना। और शाम होते ही इसे ऐसे तैयार करना जैसे आज इसकी सुहागरात हो। वहाँ भले ही नाच-गाने का प्रोग्राम है, लेकिन अगर किसी ने इसकी बोली लगाई, तो कीमत वह होगी जो आज तक कमठीपुरा की किसी लड़की की नहीं लगी होगी। कितने सालों से इसे खिलाया-पिलाया, पाला-पोसा है, उसकी भी तो कीमत वसूल करनी है ना।"

माई की ये बातें सुनकर कोहिनूर का चेहरा दर्द से भर गया था। मतलब उसका अंदाज़ा सही था—आज रात सिर्फ़ नाच-गाना नहीं, बल्कि लड़कियों की बोली भी लगाई जानी थी।

कोहिनूर जमीन पर बैठी काँप रही थी। उसकी आँखें पत्थर जैसी हो गई थीं और दिल जोर-जोर से धड़क रहा था। माई उसके पास आई, नीचे बैठी, और उसका जबड़ा पकड़कर चेहरा अपनी तरफ़ घुमा लिया। कोहिनूर की आँखें आँसुओं से भीगी हुई थीं और वह डरी हुई माई को देख रही थी।

माई ने पान चबाते हुए कहा, "एक बात कान खोलकर सुन ले लड़की, तुझे वही करना है जो हम कहेंगे। अगर मेरे खिलाफ़ जाने की कोशिश की ना, तो याद रख, इस कोठे पर जो सबसे बुरी मौत है, तुझ पर उससे भी बुरी ज़िंदगी थोप दूँगी।"

कोहिनूर की आँखें डर से फैल गई थीं। माई ने एक घिनौनी हँसी के साथ कहा, "हाँ, सही सुना तूने। तुझे सबसे बुरी ज़िंदगी मिलेगी। मैं तुझे भूखे भेड़ियों के सामने बिना कपड़ों के फेंक दूँगी, और वह तुझे हर पल नोच-नोचकर खा जाएँगे।"

लेकिन तभी वहाँ वैशाली आ जाती है। जब वह इस तरह माई को कोहिनूर के साथ बर्ताव करते देखती है, तो जल्दी से उनके पास पहुँचती है और माई से कोहिनूर को अलग करती है। कोहिनूर इस वक्त किसी ज़िंदा लाश की तरह बस साँसें ले रही थी। उसकी आत्मा अंदर ही अंदर जल रही थी।

वैशाली ने उसे कंधे का सहारा देते हुए माई से कहा, "माई, क्या कर रही हो? क्यों उसे परेशान कर रही हो? आप जानती हो यह उस तरह का काम नहीं करती। बताओ ना क्या काम है, मैं कर लूँगी। मैं जाने के लिए तैयार हूँ। जो भी फंक्शन है, उसमें मैं बहुत अच्छा परफॉर्म करूँगी। देखना, मेरी सबसे ऊँची बोली लगेगी। मैं आपको निराश नहीं करूँगी, बस इसे छोड़ दो।"

माई हल्की मुस्कान के साथ अपनी जगह पर खड़ी हो जाती है और चंदा की तरफ़ देखते हुए कहती है, "देख रही है चंदा, चुहिया को बचाने के लिए छछूँदरी आ गई।"

उनकी बात सुनकर चंदा भी हँसने लगती है, और माई भी ठहाका मार देती है। लेकिन फिर माई वैशाली की तरफ़ देखती है और कहती है, "तुझे इसकी जगह जाने की ज़रूरत नहीं है। तेरे स्पेशल कस्टमर का फ़ोन आया था। उसकी बीवी को आठवाँ महीना चल रहा है, और वह इस वक्त तड़प रहा है। अपनी तड़प मिटाने के लिए वह तेरे पास आ रहा है। इसीलिए कमरे में जा और अपने कस्टमर का इंतज़ार कर।"

फिर माई चंदा से कहती है, "चंदा, राबिया से बोल, तैयार करे इसे। सबसे भड़कीले कपड़े देना, जिस पर इसका हुस्न निखर कर बाहर आए। इस कोठे की कोहिनूर पहली बार महफ़िल में नीलम होने जा रही है। कोई कमी नहीं होनी चाहिए।"

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