Chapter 43
सपना हो या हकीकत, अब तुम मेरी हो..."
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कोहिनूर अपने कमरे में बैठी थी और जोया उसके ज़ख़्मों पर मरहम लगा रही थी। लेकिन कोहिनूर के दिल में जो ज़ख़्म थे, उन पर मरहम कैसे लगाया जाए? ऊपर से, कोठे पर आने वाले साथी की नज़र वैशा