सफर का अंतिम छोर और सामूहिक समर्पण
10 दिनों के इस लंबे और बेहद बेबाक टूर की आखिरी रात आ चुकी थी। पहाड़ों के सारे पड़ाव पार करने के बाद, यह रॉकर्स ग्रुप की इस कैंपिंग साइट पर अंतिम रात थी। अगले दिन सुबह सभी को वापस अपने शहर के लिए रवाना होना था। ऐसे में रॉकी, अमित, कबीर और मोहित—चारों के भीतर का मर्दाना जुनून अपने जीवन के सबसे उच्चतम और बेकाबू स्तर पर पहुँच चुका था। वे इस आखिरी रात को पूरी तरह से यादगार बना देना चाहते थे।
टेंट के भीतर जल रही मद्धम लाल रोशनी के बीच सिमी हमेशा की तरह बिना कपड़ों के, पूरी तरह से नग्न और बेपर्दा अवस्था में बिस्तर के बीचों-बीच लेटी हुई थी। उसकी वह चमकदार लाल ब्रा और पैंटी एक कोने में पड़ी थी। चारों लड़कों ने सिमी को चारों तरफ से घेर लिया। अब कोई रोटेशन या बारी-बारी का नियम नहीं था; इस आखिरी रात चारों चीते एक साथ अपनी इस पहाड़ी बार्बी डॉल पर टूटने के लिए तैयार थे।
## अध्याय: चारों ओर से कड़क मर्दाना वार
चारों लड़कों ने मिलकर सिमी के उस सुडौल, संगमरमर जैसे गोरे और बेदाग जिस्म को हर तरफ से अपनी मजबूत हथेलियों के शिकंजे में कस लिया और उसे पूरी बेरहमी से रगड़ना शुरू कर दिया।
* **अमित और मोहित का कब्ज़ा:** अमित और मोहित ने सिमी के पिछले हिस्से पर पूरी तरह से अपना नियंत्रण जमा लिया। उन्होंने सिमी के उन भारी, गोल-मटोल और गदराए हुए चूतड़ों को अपनी उंगलियों से इस कदर भींचा और मसला कि गोरे मांस पर उंगलियों के गहरे निशान उभर आए। वे दोनों मिलकर सिमी के नितंबों को रबर की तरह मरोड़ रहे थे।
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