कल रात की रसीली यादें और लड़कों की वाहवाही
अगली सुबह जब कॉलेज का मुख्य गेट खुला, तो धूप की सुनहरी किरणों के बीच सिमी ने कैंपस में कदम रखा। उसकी बेबाकी और निडरता का स्तर अब उस मुकाम पर था जहाँ उसे दुनिया के किसी कायदे की परवाह नहीं थी। वह अपनी उसी नई, चमकदार लाल रंग की ब्रा और पैंटी में, अपनी लंबी सुडौल जांघों और गदराए चूतड़ों को मटकाती हुई पूरी मस्ती में आगे बढ़ रही थी।
कैंपस के बाकी छात्र उसे इस रूप में देखकर पूरी तरह स्तब्ध थे, लेकिन रॉकर्स ग्रुप—रॉकी, अमित, कबीर और मोहित—जो कॉलेज की पार्किंग में अपनी बाइक्स पर बैठे थे, सिमी को देखते ही खुशी से झूम उठे। वे सब अपनी बाइक्स से उतरे और तालियाँ बजाते हुए अपनी इस अनोखी पहाड़ी रानी को बीच में घेर लिया।
लाल रंग की उस तंग ब्रा में सिमी की भारी छाती और उसके कड़क काले निप्पल हवा की सिहरन से साफ उभर रहे थे, जिसने लड़कों के भीतर कल रात की यादों को फिर से ताज़ा कर दिया।
## अध्याय: कल रात की रसीली यादें और लड़कों की वाहवाही
ग्रुप ने सिमी को चारों तरफ से घेर लिया और कल रात बीच हाउस पर मचे उस कयामत के खेल पर चर्चा शुरू कर दी। अमित ने सिमी की पतली, नग्न कमर पर अपना हाथ जमाया और उसकी बड़ी-बड़ी आँखों में देखते हुए रसभरे अंदाज़ में कहा:
Unlock this chapter with 5 diamonds to continue reading.