वादियों में हुस्न का सैलाब
होटल के बंद कमरे की गरमाहट के बाद, आखिरकार वह वक्त आ ही गया जब रॉकर्स ग्रुप और सिमी पहाड़ों की ताज़ा हवा और टूर के असली मजे लेने के लिए बाहर निकले। हिल स्टेशन की खूबसूरत वादियाँ, ऊंचे-ऊंचे देवदार के पेड़ और चारों तरफ छाई धुंध इस सफर को और भी हसीन बना रही थी। बाकी छात्र जहाँ पूरे कपड़ों में लिपटे जैकेट और मफलर पहने घूम रहे थे, वहीं सिमी का अंदाज़ हमेशा की तरह पूरी दुनिया से अलग और बेबाक था।
वह कार से उतरकर जैसे ही टूरिस्ट स्पॉट की तरफ बढ़ी, वहाँ मौजूद लोगों की आँखें फटी की फटी रह गईं। सिमी ने सिर्फ अपनी वही चमकदार **लाल रंग की तंग ब्रा और पैंटी** पहन रखी थी। उसका संगमरमर जैसा गोरा, सुडौल जिस्म और उसकी मखमली जांघें पहाड़ों की इस बर्फीली हवा में पूरी तरह बेपर्दा थीं।
## अध्याय: वादियों के बीच खुलेआम थिरकन
रॉकी, अमित, कबीर और मोहित अपनी चश्मा चढ़ाए, सिमी के चारों तरफ एक मजबूत घेरा बनाकर चल रहे थे ताकि कोई और रईस या सैलानी उनके इस खजाने के करीब न आ सके। पहाड़ों की ठंडी हवा जैसे ही सिमी की नग्न छाती से टकराई, लाल ब्रा के भीतर कैद उसके दोनों भारी दूध के निप्पल उत्तेजना और ठंड के मारे तीखे तीरों की तरह तन गए।
सिमी ने वादियों के खूबसूरत नज़ारे को देखा, अपनी दोनों बाहें हवा में फैलाईं और पहाड़ों की आज़ाद तितली की तरह गोल-मटोल घूमकर वहीं पगडंडी पर डांस करने लगी।
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