अमित का कड़क प्रहार और रात भर का रोमांच
सिमी के इस मुकम्मल नग्न बदन को देखकर अमित के सब्र का बांध टूट गया। उसने सिमी को पेट के बल घुमाया और सिमी ने मुस्कुराते हुए अपनी कोहनियों और घुटनों को बिस्तर पर टिका दिया, जिससे उसका वह भारी, मखमली और गदराया हुआ चूतड़ों वाला पिछला हिस्सा पूरी तरह से ऊपर की तरफ उठ गया।
अमित ने अपने मजबूत हाथों से सिमी के उन गोरे नितंबों को रबर की तरह भींचा और बिना कोई वक्त गंवाए उसके पिछले गुप्त हिस्से (गांड़) पर अपनी कड़क मर्दानगी से पहला तीखा प्रहार कर दिया।
* **बेरहम मstate का तांडव:** अमित पूरी रात, बिना रुके, पूरी शिद्दत और जंगली जुनून के साथ सिमी के उस पिछले हिस्से को अपनी मर्दानगी से रौंदता रहा। जब-जब उसका भारी शरीर पीछे से टकराता, टेंट में एक तीखी आवाज़ गूंज उठती।
* **सिसकियों की धुन:** इस गहरे वार से सिमी के गुलाबी होठों से रात भर मदहोश कर देने वाली चीखें निकलती रहीं—"उफ़्फ़... आआह... अमित बाबू... तुम तो रॉकी से भी ज़्यादा कड़क निकले!"
## अध्याय: सुबह की गरम बौछार और अलमस्त अंत
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