कार में गूंजती सिसकियां
सिमी की गहरी नींद के बावजूद, उसके जिस्म का हर हिस्सा उन लड़कों के स्पर्श का जवाब दे रहा था। जब भी अमित उसके चूतड़ों की रेखा पर ज़ोर से उंगलियां फेरता, सिमी के नग्न पेट में एक अजीब सी सिहरन होती, जिससे वह नींद में ही अपने घुटनों को ऊपर की तरफ मोड़ लेती।
कार के उस बंद केबिन में अब केवल म्यूजिक की धुन और सिमी के नग्न बदन पर लड़कों के हाथों की रगड़ की आवाज़ें गूंज रही थीं। रॉकी और मोहित आगे की सीट से बार-बार पीछे देख रहे थे और सिमी की इस सुपुर्दगी पर मुस्कुरा रहे थे।
वह पहाड़ों की आज़ाद तितली, जो कभी कॉलेज के कॉरिडोर में अपनी लाल ब्रा-पैंटी में धमक पैदा करती थी, अब हाईवे पर दौड़ती एक लक्ज़री कार के भीतर अपने जिस्म को लड़कों की वासना का ठिकाना बना चुकी थी। 10 दिनों का यह कॉलेज टूर अब अपने चरम और बेहद रसीले दौर में प्रवेश कर चुका था, जहाँ सिमी का जिस्म और लड़कों का जुनून एक-दूसरे में पूरी तरह से ओत-प्रोत हो चुके थे।
## अध्याय: चलती कार में जुनून की पराकाष्ठा
हाईवे पर दौड़ती कार के भीतर वासना और दीवानगी का वह खेल अब अपने सबसे तीव्र और अनियंत्रित मुकाम पर पहुँच चुका था। सिमी के पूरी तरह से बेपर्दा, नग्न और आत्मसमर्पित बदन को देखकर अमित और कबीर के भीतर का मर्दाना जुनून सारी मर्यादाओं को लांघ गया। पहाड़ों की इस सुंदरी ने अपने जिस्म को जिस बेफ़िक्री से उनके हवाले किया था, उसने लड़कों के हाथों की कड़कड़ाहट को और बढ़ा दिया।
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