Chapter 12
Ek Diwane Ki Deewaniyat - Chapter 12
अब आगे
रात का समय
मेहर अपने उस छोटे से कमरे में पलंग पर लेटी हुई थी और एकटक ऊपर सीलिंग पर बिहार रही थी। ना चाहते हुए भी पता नहीं क्यों बार बार उसके मन में रूद्राक्ष का ख्याल आ रहा था।
जिस तरह से वो मेहर से बात कर रहा था, उसका एकटक उसी को देखना, जैसे ये उसका सबसे पसंदीदा काम हो।
उसकी नजरी में मेहर को कुछ तो अलग लगा था, ये सब मेहर जब भी सोचती उसके अन्दर एक अजीब सी फिलिंग उठती, जिसे वह समझ नहीं पा रही थी।
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