Chapter 44
इश्क़ मुबारक (A Contract Marriage) - Chapter 44
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चाचा जी की दुकान से निकलकर दोनों काशी मिष्ठान भंडार पहुँचे। रामू और रघु ने कशिश को देखकर सर झुकाकर आदरपूर्वक प्रणाम किया। कशिश समझ नहीं पाई कि क्या कहे। इतने में रामू कुर्सी लाया औ