Chapter 241
अक्षत मिहिर नोक झोक। - Chapter 241
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आगे। शाम का वक़्त:- अक्षिता बेड के हेड से टेक लगा कर बैठी अपना फेस साइड घुमा बालकनी की तरफ देख रही थी। जहाँ सूरज लगभग डूब चुका था और उसकी लाल रौशनी आसमान मे छाई हुई थी। ऊपर से बाहर