Vampire king's forced bride - Chapter 452
युद्ध पूरी तरह खत्म हो चुका था। सारा ने समायरा को भी अच्छा सबक सिखाया था। वह बेहोश होकर कैदखाने में पड़ी हुई थी, वहीं इस बीच आरंभ और सारा सबके जाने के बाद अकेले थे। बातों ही बातों में सारा ने उसे अपने मां बनने की खबर सुनाई, जिसे सुनते ही आरंभ ने उसे अपनी बाहों में उठाकर गोल-गोल घूमना शुरू कर दिया था।
वह खुश था, लेकिन साथ ही उसकी आंखों में चिंता की भी झलक थी। सारा मां बनने वाली थी, उसके बावजूद युद्ध के मैदान में उतर आई थी; इस बात से वह नाराज भी था।
“मैं बिल्कुल ठीक हूं, तुम्हें इतनी चिंता करने की जरूरत नहीं है।” सारा ने आरंभ के गाल पर हाथ रखकर मुस्कुराकर कहा। उसने गहरी सांस ली और हंसकर बोली, “चलो, अब मुझे नीचे उतारो, मेरा सांस फूल रहा है। क्या तुम्हें इतना भी नहीं पता कि एक गर्भवती औरत को इस तरह हवा में उठाकर घूमना नहीं चाहिए?”
“क्या सच में?” आरंभ ने भौंहें चढ़ाकर कहा, "और इस बात का ख्याल तुम्हे उस वक्त नहीं आया जब तुम हवा में उड़ रही थी और समायरा से लड़ रही थी? खैर, जाने देता हूं, लेकिन अब सब कुछ मेरे हिसाब से चलने वाला है और अब तुम अपना पूरा ध्यान रखोगी।”
आरंभ ने आखिर उसे नीचे उतार दिया था। उसके होठों पर हल्की सी मुस्कुराहट थी और उसने सारा के गाल पर हाथ रखकर उसे प्यार से चूम लिया था। वह पहली बार पिता बनने वाला था और सारा इसकी खुशी उसकी आंखों में देख सकती थी।
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