Vampire king's forced bride - Chapter 104
सारा यही चाहती थी कि रक्षित खुद ही जाकर आरंभ को बता दे कि वह इतनी महँगी संपत्ति उपहार के तौर पर नहीं ले सकती है, लेकिन रक्षित ने ऐसा करने से मना कर दिया और साथ ही एक डिनर डेट का प्रस्ताव रख दिया था।
बातों ही बातों में सारा उसे ताना मार रही थी, लेकिन उसके बात का बिल्कुल पॉजिटिवली जवाब देते हुए रक्षित ने कहा, "बिल्कुल, मैं अपने किंग और महारानी के लिए खास डिनर तैयार करता हूँ। इसमें अधिकार और सत्ता कहीं से भी नहीं आते हैं। मेरा यह मानना है कि एक नई-नई शादी हुई जोड़े को समय-समय पर मिलते रहना चाहिए। लेकिन आप बजट संभालने में इतनी ही व्यस्त हैं, तो मैं दूसरी मीटिंग या कोई और वक़्त बता सकता हूँ। अगर आप सिर्फ महल में आने वाले खून के बजट और उसकी मात्रा को लेकर परेशान हैं, तो मैं बहुत से डीलर्स को जानता हूँ जो आपकी मदद कर सकते हैं। इस बार मैं खुद से कुछ नहीं सोचता हूँ; आप कहेंगी तभी आपकी मदद करूँगा।"
सारा ने रक्षित की तरफ अजीब नजरों से देखा। वह वैंपायर तो अपने किंग की तरह चालाक था, जिसे दूसरों के कमजोरी और परेशानी का फायदा उठाने का अच्छा ज्ञान था।
हालाँकि दिल ही दिल में सारा उसे गाली दे रही थी, लेकिन वह उसके काम को आसान कर रहा था। उसने जबर्दस्ती मुस्कुराते हुए कहा, "ठीक है, फिर डीलर्स के बारे में बाद में बात करेंगे। किंग से कह देना कि आज रात बगीचे में मैं उनका इंतज़ार करूँगी।"
रक्षित ने सर झुकाया और वहाँ से चली गई थी। शाम होने में थोड़ा ही टाइम बचा था। सारा तैयार होने के लिए जब दूसरी तरफ गई, तो वह हैरान रह गई।
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