Welcome back, Story Creator!

Keep writing amazing stories. Your readers are waiting, Creator.

Chapter 437

Vampire king's forced bride - Chapter 437

समायरा ने आरंभ को अपने साथ कमरे में ले जाने की कोशिश की ताकि वह उसके साथ रात बिता सके, लेकिन ठीक उसी समय पर सारा वहां पहुंच गई थी। वह आरंभ को खींचते हुए अपने पास ले गई थी; हालांकि, उसकी इस हरकत पर समायरा और आरंभ दोनों ही गुस्सा थे।

ऐसा लग रहा था जैसे आरंभ अपने होश में ही न हो। सारा ने उसकी तरफ देखा और उसने ठंडी और कठोर आवाज में पूछा, “क्या तुमने मेरे लिए अपनी भावनाएं खो दी हैं? क्या अब तुम समायरा के साथ रहना चाहते हो?”

सारा के इतना पूछने पर भी आरंभ चुप रहा। एक अजीब सा दर्द सारा के सिर में धड़कने लगा था, जैसे कोई उसे हथौड़े मार रहा हो और उसका दिल गुस्से से उबल रहा था।

“मुझे नहीं पता तुम किस बारे में बात कर रही हो। क्या तुम मुझ पर शक कर रही हो, सारा?” इस बार आरंभ ने ऊंची आवाज में कहा, जिस पर सारा ने सिर हिला दिया।

“नहीं, अगर मुझे तुम पर शक होता तो मैं तुमसे पूछती नहीं, बल्कि मुझे यकीन है कि तुमने यह किया है। तुम मुझे धोखा दे रहे हो। अब गौर से सुनो, मैं तुम्हें एक मौका दे रही हूं, आरंभ। मुझे बताओ तुम इन दिनों क्या कर रहे हो और तुम्हें क्या हो गया है?” सारा ने दांत पीसते हुए कहा।

This chapter is locked

Unlock this chapter with 5 diamonds to continue reading.

Your balance: 0 diamonds
Buy Diamonds
437 / 544