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Chapter 37

सनक और मोहब्बत” - Chapter 37

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सुबह का सूरज हवेली की खिड़कियों से झाँक रहा था, लेकिन रोज़ के लिए वो रोशनी भी अंधेरे जैसी ही लग रही थी। रात भर रोते-रोते उसकी आँखें सूज गई थीं। कमरे के बाहर गार्ड्स का पहरा अब भी व

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