Chapter 30
सनक और मोहब्बत” - Chapter 30
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रात गहरी थी। हवाओं में हल्की ठंडक घुल चुकी थी। रोज़ अपने कमरे में अकेली बैठी थी। खिड़की से बाहर झाँकते हुए उसके कानों में अब भी रणवीर की आवाज़ गूंज रही थी— “देव तुम्हें कैद कर रहा