Chapter 47
आखरी वादा
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उनके कानों में गायत्री के चिल्लाने की आवाज आ रही थी। गायत्री जी लेबर पेन में इतनी ज्यादा तड़प रही थीं कि खुद को संभाल नहीं पा रही थीं। तभी अचानक सिकंदर जी के कानों में शीशा टूटने क