तुम अपनी जिंदगी जियो और उसे अपनी जीने दो!.
नक्ष इस वक्त अपने ऑफिस में बैठा हुआ था, उसकी एक मीटिंग चल रही थी. लेकिन उसकी निगाहें मीटिंग पर नहीं बल्कि अपने फोन पर थी, जिस पर एक वेट्रेस की तस्वीर थी और उसे ये तस्वीर उसकी कजन रूही ने भेजी थी। अब ये कौन है?" मीटिंग रूम में बैठा हुआ नक्ष अपने फोन में उस फोटो को देखते हुए कहता है।
उसने अपना फोन बंद किया और अपने जेब में डालते हुए सामने बैठे सभी लोगों को देखकर कहता है "आने वाले फेस्टिवल सीजन के लिए होटल में एडवांस बुकिंग हो रही है, ऐसे में मर्चेंट होटल का नाम और इसकी रेपुटेशन बरकरार रहनी चाहिए थे! मीटिंग इस ओवर।"
सामने बैठे सभी बिजनेस पार्टनर हां में अपना सिर हिलाते हैं और सबके चेहरे पर एक संतुष्टि भरी मुस्कान थी। सबका सपना था मर्चेंट इंडस्ट्री के साथ एक बार काम करना और उनका ये सपना आज पूरा हो रहा है। फेस्टिवल सीजन में नक्ष ने छोटी से छोटी और बड़ी से बड़ी कंपनी को मौका दिया था अपने होटल के साथ जुड़ने का।
मीटिंग ओवर करने के बाद नक्ष केबिन से बाहर निकलता है और उसके पीछे-पीछे उसकी सेक्रेटरी और बाकी का स्टाफ भी बाहर आ जाते हैं।
नक्ष अपने केबिन में अपनी कुर्सी पर बैठते हुए अपनी सेक्रेटरी मीरा से कहता है "आगे का क्या शेड्यूल है?"
मीरा ने जल्दी से नक्ष के आगे का शेड्यूल बताते हुए कहा "सर रात को आपकी एक बिजनेस डिनर पार्टी है, वहां पर जर्मन से आए कुछ लोग आपके साथ मिलना चाहते हैं.. लेकिन सर इससे पहले आपको मर्चेंट मेंशन जाना होगा, दरअसल आपकी दादी मां आपके घर बुला रही है। वो आपसे मिलना चाहती हैं।"
"मुझे पता है वो मुझे क्यों बुला रही है? नक्ष ने फाइल को एक जगह से उठाकर दूसरी जगह रखते हुए कहा और मीरा को घूर कर देखने लगा।
मीरा के चेहरे पर एक मजाकिया मुस्कान आ गई थी और उसने धीरे से उसे छुपाते हुए नक्ष से कहा "लेकिन फिर भी सर आपको जाना तो होगा ही ना, क्योंकि अगर इस बार मैंने फोन पर उन्हें ना कहा, तो वो आपको लेने डायरेक्ट ऑफिस आ जाएगी।"
नक्ष मीरा के किसी सवाल का जवाब देता उस से पहले ही उसका फोन वाइब्रेट होता है। वो देखता है तो उस पर रूही की तस्वीर थी.. रूही की तस्वीर को देखकर नक्ष कस कर अपनी आंखें बंद करता है और मीरा को बाहर जाने का इशारा करता है। उसका इशारा पाकर मेरा तुरंत केबिन से बाहर चली जाती है
नक्ष ने फोन उठाया और स्पीकर पर रखते हुए रूही से कहता है "बोलो रूही!"
"भाई आपको ये देखना ही होगा, आपको मेरी हेल्प करनी ही होगी. अपने मां से वादा किया था कि आप हमेशा मेरी हेल्प करेंगे तो अब आपको इस सिचुएशन को देखना ही होगा.."
रूही एकदम से चिल्लाते हुए और झुंझलाते हुए गुस्से में नक्ष से बात कर रही थी। उसकी आवाज सुनकर नक्ष का दिमाग खराब हो जाता है और वो कस कर अपनी आंखें बंद करते हुए और अपना गुस्सा कंट्रोल करते हुए रूही से कहता है "सबसे पहले तो तुम ये चिल्लाना बंद करो और तुम किस बारे में बात कर रही हो? पहले मुझे वो तो बताओ?"
"भाई आपने मुझसे वादा किया था कि मेरे मुंबई पहुंचने से पहले ही वो लड़की धैर्य की जिंदगी से बाहर होगी, लेकिन आपने अभी तक ऐसा कुछ भी नहीं किया है और आज तो मैंने उसे सड़क पर एक लड़की के साथ भी देखा है। मैंने आपको उसकी फोटो भेजी है। कौन है वो लड़की .?"
रूही गुस्से में नक्ष से सवाल कर रही थी। नक्ष कस कर अपनी आंखें बंद करता है और एक गहरी सांस छोड़ते हुए बोला "मुझे कैसे पता होगा कि वो लड़की कौन है? मैं यहां मुंबई में बैठा हुआ हूं और तुम वहां शिमला में हो और मैं एक होटल कंपनी का मालिक हूं, ना कि तुम्हारे बॉयफ्रेंड के आगे पीछे घूमने वाला कोई जासूस! बेहतर यही होगा कि तुम अपनी जिंदगी जियो और उसे अपनी जीने दो.. और तुम धैर्य पर शक क्यों कर रही हो.. क्या तुम अब तक धैर्य को समझ नहीं पाई हो..!.
रूही जितना धैर्य, धैर्य ने रख है ना उतना धैर्य तो मेरे पास भी नहीं है और मैंने कहा कि अगर तुम्हें धैर्य पर शक है तो मैं उसके खिलाफ सबूत इकट्ठा करूंगा.. पर इसका मतलब ये नहीं है कि मैं यूं ही किसी तस्वीर के बिना पर उसे पर इल्जाम लगा दूंगा. और क्या होगा अगर धैर्य को पता चल गया होगा कि तुम उस पर इस तरीके से शक कर रही हो और उसका पीछा करती हो तो?" धैर्य ने तो कभी तुम्हारे ऊपर शक नहीं किया है..। और मुझे लगता भी नहीं है कि उसका किसी लड़की के साथ कोई अफेयर है उसका इतना बड़ा बिजनेस है.. जो वह अपने भाई के साथ मिलकर संभालता है लेकिन फिर भी उसने अपने बिजनेस से अलग अपना खुद की एक पहचान बनाई है वह एक पुलिस ऑफिसर है और उसका काम है लोगों की मदद करना ऐसे में अगर वह किसी लड़की से मिलने भी है तो इसमें कौन सी बड़ी बात है..।
"भाई आप मुझ पर चिल्ला रहे हैं.." रूही एकदम से रोते हुए उससे कहती है। उसके रोने वाली आवाज सुनकर नक्ष अब अपना सिर पकड़ कर बैठ जाता है।
वो एक गहरी सांस छोड़ते हुए रूही से कहता है "ठीक है रूही मैं तुम पर चिल्ला नहीं रहा हूं, आई एम सॉरी मैंने तुमसे ऊंची आवाज में बात की, लेकिन तुम जो कह रही हो उस बात का कोई प्रूफ नहीं है तुम्हारे पास, मैं तुम्हारी मदद जरूर करूंगा लेकिन इसके लिए तुम्हें मुझे थोड़ा टाइम देना होगा।"
उसके बाद नक्ष ने अपने फोन पर तस्वीर को दोबारा से देखते हुए रूही से कहा "वैसे ये लड़की कौन है जो धैर्य के साथ खड़ी है.?"
रूही गुस्से में फिर चिल्लाती आवाज में नक्ष से बोली "मुझे नहीं पता, मैं जब उसका पीछा कर रही थी तब वो इस लड़की को सड़क पर एक्सीडेंट से बचाता है और बदले में अपना कार्ड देता है!
जैसे ही नक्ष ने ये सुन उसकी आंखें हैरानी से छोटी हो गई और उसने कुछ नहीं कहा। वो बस अपनी बहन की बेवकूफों भरी बातों को सुन रहा था. रूही जब उसे कुछ नहीं कहता हुआ देखती तो कहती है "भाई आप हो क्या? आप सुन रहे हो ना मैं आपसे कुछ कह रही हूं?"
नक्ष कस के अपना सिर पीट लेता है और रूही के बचपन पर उसे डांटते हुए कहता है "तुम पागल हो गई हो क्या? धैर्य ने अपना कार्ड किसी को दिया और तुम इस बात के लिए उस पर शक कर रही हो। दिमाग खराब हो गया है क्या तुम्हारा? खुद भी मरोगी और मुझे भी मरवाओगी".
"सबको तो मैं ही गलत लगती हूं भाई, आपको भी मैं ही गलत लग रही हूं! धैर्य ने उस लड़की को अपना कार्ड क्यों दिया है.?" रूही लगभग रोते हुए नक्ष से कहती है,, तो नक्ष कस कर अपनी आंखें बंद कर लेता है और अपना सिर टेबल पर मार लेता है।
उसने अपने गुस्से को लास्ट लेवल पर कंट्रोल करते हुए अपने हाथों की मुट्ठियां कसी और फोन पर रूही से कहा "ऐसा है रूही, मैं फोन रख रहा हूं क्योंकि दादी ने मुझे घर पर बुलाया है।”
रूही का फोन रखने के बाद नक्ष अपनी स्क्रीन पर कुछ तस्वीर को देख रहा था, जोकि रूही ने उसे भेजी थी। अपनी बेवकूफ बहन की बेवकूफों वाली हरकत देखकर नक्ष का मन अपना सिर दीवार पर मारने को कर रहा था, लेकिन वो कुछ नहीं कर सकता था। रूही बचपन से ही उसकी लाडली रही है और सारे घर की सबसे प्यारी रही है, ऐसे में उसके नखरे उठाने ही पड़ते है..
मुंबई की मेन रोड पर खड़ी होकर कशिश दूर तक पहले समंदर को देख रही थी। ये समुद्र कितनी खूबसूरत है.. ऊपर से डूबते हुए सूरज के साथ तो यह और ज्यादा खूबसूरत लगता है..।लेकिन इसके बावजूद भी कशिश को ये दृश्य मनमोहक नहीं लग रहा था और फिर कैसे ही लगता, उसकी आंखों में आंसू भरे हुए थे और सुबह वो एक रेस्टोरेंट में वेटर्स का काम कर रही थी, पर अब वो वहां से निकाली जा चुकी थी।
ये नौकरी उसके जीवन का एकमात्र सहारा थी लेकिन अब वो उसके पास नहीं है। ये सब याद करते हुए कशिश की आंखों से आंसू बह रहे थे और वो रोते हुए सामने उस दूर फैले हुए समुद्र की पानी को देख रही थी.. तभी पास से गुजर रही एक बुजुर्ग महिला ने कशिश से कहा.. "बिटिया तुम ठीक तो हो ना, रो क्यों रही हो?"
कशिश जल्दी से अपने आंसू पोछती है और सिर हिलाते हुए फीकी मुस्कान के साथ उस बुजुर्ग महिला को देखकर कहती है "जी मैं ठीक हूं थैंक यू पूछने के लिए.!"
बुजुर्ग महिला अपनी बैग में से एक एप्पल निकालती है और उसे कशिश की तरह बढ़ते हुए कहती है "ये लो इसे खा लो, सब ठीक हो जाएगा।"
कशिश के चेहरे पर फीकी सी मुस्कान थी। उसने हां में अपना सिर हिलाया और उस एप्पल को ले लिया। वो वहीं पर बैठी हुई थी और दूर समुद्र को देखते हुए अपने मन में अपने पापा को याद करते हुए कहती है "आप मुझे अपने साथ क्यों नहीं ले गए पापा. यहां मेरे लिए जीना बहुत मुश्किल हो रहा है, सिंघानिया परिवार मेरा पीछा नहीं छोड़ रहा है, वो मुझे हर जगह ढूंढ निकालते हैं। मैं क्या करूं बाबा? अपनी जान बचाने के लिए मैं कब तक यूहीं भागती रहूं। मुझ में अब हिम्मत नहीं बची है, मैं और भागना नहीं चाहती हूं, लेकिन अफसोस ये है कि मैं अपनी जान भी नहीं ले सकती हूं। अगर मैने फिर से भागने की कोशिश की तो वो लोग फिर से मुझे पकड़ लेंगे। जब तक मैं मर नहीं जाती हूं, तब तक उन लोगों को चैन नहीं मिलेगा।"
कशिश ये सोचते हुए समुद्र और आसमान के मिल रहे क्षितिज को देखती है और उसकी आंखों से सिर्फ आंसू निकल रहे थे, उसके जीवन पहले ही बहुत संघर्षों से भरा हुआ था, ओर उसे जिंदा रहने के लिए ही संघर्ष करना पड़ रहा था।