Chapter 14
सत्संग - Chapter 14
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एक बार एक चोर जब मरने लगा तो उसने अपने बेटे को बुलाकर अपने जीवन का कुछ अनुभव बताते हुए कहा-- बेटा ! तुझे चोरी करनी है तो किसी गुरुद्वारा धर्मशाला या किसी धार्मिक स्थान में मत जाना