Non-fiction Self-Help & Personal Development
ज्ञानवर्धन कहानी ( Complete )
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१) कछुआ और खरगोश
एक समय की बात है, एक जंगल में एक कछुआ और एक खरगोश रहते थे। दोनों अच्छे दोस्त थे, लेकिन खरगोश को अपनी तेजी पर बहुत गर्व था। वह हमेशा कछुए को अपनी धीमी गति के लिए चिढ़ाता था।
एक दिन, खरगोश ने क...
एक समय की बात है, एक जंगल में एक कछुआ और एक खरगोश रहते थे। दोनों अच्छे दोस्त थे, लेकिन खरगोश को अपनी तेजी पर बहुत गर्व था। वह हमेशा कछुए को अपनी धीमी गति के लिए चिढ़ाता था।
एक दिन, खरगोश ने क...
१) कछुआ और खरगोश
एक समय की बात है, एक जंगल में एक कछुआ और एक खरगोश रहते थे। दोनों अच्छे दोस्त थे, लेकिन खरगोश को अपनी तेजी पर बहुत गर्व था। वह हमेशा कछुए को अपनी धीमी गति के लिए चिढ़ाता था।
एक दिन, खरगोश ने कछुए को चुनौती दी, "चलो, देखते हैं कौन जंगल की परिक्रमा सबसे पहले पूरी करता है!" कछुआ ने सोचा कि यह एक अच्छा मौका है अपनी धीमी गति का फायदा उठाने का, और उसने हां कह दिया।
दोनों ने अपनी यात्रा शुरू की। खरगोश तेजी से भागा, जबकि कछुआ धीमी गति से चलता रहा। खरगोश ने सोचा कि वह आसानी से जीत जाएगा, इसलिए वह रास्ते में एक पेड़ के नीचे सो गया।
इस बीच, कछुआ धीमी गति से चलता रहा और खरगोश को पीछे छोड़ दिया। जब खरगोश जागा, तो उसने देखा कि कछुआ पहले ही जंगल की परिक्रमा पूरी कर चुका था।
खरगोश को अपनी हार स्वीकार करनी पड़ी और उसने कछुए को बधाई दी। कछुआ ने कहा, "धीमी गति से चलने में कोई बुराई नहीं है, अगर आप अपने लक्ष्य पर ध्यान केंद्रित रखते हैं और हार नहीं मानते।"
इस कहानी से हमें यह सीखने को मिलता है कि धैर्य और दृढ़ता सफलता की कुंजी है, न कि सिर्फ तेजी या गति।
एक समय की बात है, एक जंगल में एक कछुआ और एक खरगोश रहते थे। दोनों अच्छे दोस्त थे, लेकिन खरगोश को अपनी तेजी पर बहुत गर्व था। वह हमेशा कछुए को अपनी धीमी गति के लिए चिढ़ाता था।
एक दिन, खरगोश ने कछुए को चुनौती दी, "चलो, देखते हैं कौन जंगल की परिक्रमा सबसे पहले पूरी करता है!" कछुआ ने सोचा कि यह एक अच्छा मौका है अपनी धीमी गति का फायदा उठाने का, और उसने हां कह दिया।
दोनों ने अपनी यात्रा शुरू की। खरगोश तेजी से भागा, जबकि कछुआ धीमी गति से चलता रहा। खरगोश ने सोचा कि वह आसानी से जीत जाएगा, इसलिए वह रास्ते में एक पेड़ के नीचे सो गया।
इस बीच, कछुआ धीमी गति से चलता रहा और खरगोश को पीछे छोड़ दिया। जब खरगोश जागा, तो उसने देखा कि कछुआ पहले ही जंगल की परिक्रमा पूरी कर चुका था।
खरगोश को अपनी हार स्वीकार करनी पड़ी और उसने कछुए को बधाई दी। कछुआ ने कहा, "धीमी गति से चलने में कोई बुराई नहीं है, अगर आप अपने लक्ष्य पर ध्यान केंद्रित रखते हैं और हार नहीं मानते।"
इस कहानी से हमें यह सीखने को मिलता है कि धैर्य और दृढ़ता सफलता की कुंजी है, न कि सिर्फ तेजी या गति।
Chapter
81
Words
87.4K
Updated
15 days ago
Published
Jun 26, 2025
Published Chapters
कछुआ और खरगोश - Chapter 1
Free
नमक का कर्ज - Chapter 2
Free
मूर्ख कौन? - Chapter 3
Free
लड्डू गोपाल- Chapter 4
Free
लक्ष्मी जी और शनि देव - Chapter 5
Free
भगवान की नजर - Chapter 6
Free
परख - Chapter 7
Free
पिता का आशीर्वाद- Chapter 8
Free
जो दोगे बही पाओगे - Chapter 9
Free
सम्यक दृष्टि - Chapter 10
Free
भाग्य की दौलत - Chapter 11
Free
हरि मैं जैसो तैसो बस तेरो- Chapter 12
Free
हंस ओर काग- Chapter 13
Free
सत्संग - Chapter 14
Free
ईश्वर की सच्ची भक्ति - Chapter 15
Free
गुरु ही सचा रक्षक है - Chapter 16
Free
एक बुजुर्ग आदमी Chapter 17
Free
चार आने का हिसाब - Chapter 18
Free
गुरु की महिमा - Chapter 19
Free
सच्चा न्याय - Chapter 20
Free
कलयुग का दरोगा - Chapter 21
Free
डाकू रत्नाकर और देव ऋषि नारद Chapter 22
Free
सदा व्यवहार का जादू - Chapter 23
Free
भगवान की डायरी- Chapter 24
Free
कलयुग का लक्ष्मण- Chapter 25
Free
ठाकुर जी से रिश्ता- Chapter 26
Free
भक्ति और प्रेम - Chapter 27
Free
बुजुर्ग व्यक्ति का आशीर्वाद - Chapter 28
Free
भगवान - Chapter 29
Free
अपनी अपनी सोच - Chapter 30
Free
सेठ जी का लालच - Chapter 31
Free
जिस का मन पवित्र - Chapter 32
Free
वृंदावन की माटी - Chapter 33
Free
ईमानदारी का फल - Chapter 34
Free
सदव्यवहार का फल - Chapter 35
Free
सत्संग असर - Chapter 36
Free
राजा अज - Chapter 37
Free
माँ का दायित्व - Chapter 38
Free
संतान के लिया विरासत Chapter 39
Free
दान की महिमा - Chapter 40
Free
१) कछुआ और खरगोश
एक समय की बात है, एक जंगल में एक कछुआ और एक खरगोश रहते थे। दोनों अच्छे दोस्त थे, लेकिन खरगोश को अपनी तेजी पर बहुत गर्व था। वह हमेशा कछुए को अपनी धीमी गति के लिए चिढ़ाता था।
एक दिन, खरगोश ने कछुए को चुनौती दी, "चलो, देखते हैं कौन जंगल की परिक्रमा सबसे पहले पूरी करता है!" कछुआ ने सोचा कि यह एक अच्छा मौका है अपनी धीमी गति का फायदा उठाने का, और उसने हां कह दिया।
दोनों ने अपनी यात्रा शुरू की। खरगोश तेजी से भागा, जबकि कछुआ धीमी गति से चलता रहा। खरगोश ने सोचा कि वह आसानी से जीत जाएगा, इसलिए वह रास्ते में एक पेड़ के नीचे सो गया।
इस बीच, कछुआ धीमी गति से चलता रहा और खरगोश को पीछे छोड़ दिया। जब खरगोश जागा, तो उसने देखा कि कछुआ पहले ही जंगल की परिक्रमा पूरी कर चुका था।
खरगोश को अपनी हार स्वीकार करनी पड़ी और उसने कछुए को बधाई दी। कछुआ ने कहा, "धीमी गति से चलने में कोई बुराई नहीं है, अगर आप अपने लक्ष्य पर ध्यान केंद्रित रखते हैं और हार नहीं मानते।"
इस कहानी से हमें यह सीखने को मिलता है कि धैर्य और दृढ़ता सफलता की कुंजी है, न कि सिर्फ तेजी या गति।
एक समय की बात है, एक जंगल में एक कछुआ और एक खरगोश रहते थे। दोनों अच्छे दोस्त थे, लेकिन खरगोश को अपनी तेजी पर बहुत गर्व था। वह हमेशा कछुए को अपनी धीमी गति के लिए चिढ़ाता था।
एक दिन, खरगोश ने कछुए को चुनौती दी, "चलो, देखते हैं कौन जंगल की परिक्रमा सबसे पहले पूरी करता है!" कछुआ ने सोचा कि यह एक अच्छा मौका है अपनी धीमी गति का फायदा उठाने का, और उसने हां कह दिया।
दोनों ने अपनी यात्रा शुरू की। खरगोश तेजी से भागा, जबकि कछुआ धीमी गति से चलता रहा। खरगोश ने सोचा कि वह आसानी से जीत जाएगा, इसलिए वह रास्ते में एक पेड़ के नीचे सो गया।
इस बीच, कछुआ धीमी गति से चलता रहा और खरगोश को पीछे छोड़ दिया। जब खरगोश जागा, तो उसने देखा कि कछुआ पहले ही जंगल की परिक्रमा पूरी कर चुका था।
खरगोश को अपनी हार स्वीकार करनी पड़ी और उसने कछुए को बधाई दी। कछुआ ने कहा, "धीमी गति से चलने में कोई बुराई नहीं है, अगर आप अपने लक्ष्य पर ध्यान केंद्रित रखते हैं और हार नहीं मानते।"
इस कहानी से हमें यह सीखने को मिलता है कि धैर्य और दृढ़ता सफलता की कुंजी है, न कि सिर्फ तेजी या गति।
Amrutlal Bagani
कछुआ और खरगोश - Chapter 1 • 5 months ago
Amrutlal Bagani
नमक का कर्ज - Chapter 2 • 5 months ago
Amrutlal Bagani
लक्ष्मी जी और शनि देव - Chapter 5 • 5 months ago
Amit Bagani
9 months ago
nice
0 likes • मूर्ख कौन? - Chapter 3No fan art available for this story yet.
good
0 likes • चार दिन - Chapter 78