कछुआ और खरगोश - Chapter 1
एक समय की बात है, एक जंगल में एक कछुआ और एक खरगोश रहते थे। दोनों अच्छे दोस्त थे, लेकिन खरगोश को अपनी तेजी पर बहुत गर्व था। वह हमेशा कछुए को अपनी धीमी गति के लिए चिढ़ाता था।
एक दिन, खरगोश और कछुए में बहस हो गई। जंगल के सभी जानवर को बहस में इकट्ठा हो गए शेर, हाथी,भालू,तोता,मैना, हिरण,गाय,सियार, लोमड़ी, लकड़बग्घा, चिड़िया,कौवा,बैल,भैंस अजगर! उन दोनों की बहस बहुत चली आधे जानवर खरगोश की तरफ से तो कुछ जानवर कछुए की तरफ से | खरगोश ने कछुए को चुनौती दी, "चलो, देखते हैं कौन जंगल की परिक्रमा सबसे पहले पूरी करता है!" तुमको तो मैं यूं हर दूंगा कछुआ ने सोचा कि यह एक अच्छा मौका है अपने आप को साबित करने का कि मैं भी किसी से काम नहीं हूं और उसने हां कर दिया शेर चीता जैसे बड़े-बड़े जानवर खरगोश को प्रोत्साहित कर रहे थे तो कुछ तोता मैना चिड़िया की कछुए को प्रोत्साहित कर रहे थे
दोनों ने अपनी यात्रा शुरू की। खरगोश तेजी से भागा, दौड़ते हुए चलते नदी पहाड़ नदी और पहाड़ों अलार्म लगाते हुए आगे बढ़ते जा रहा था। जबकि कछुआ धीमी गति से चलता रहा। खरगोश ने सोचा कि वह आसानी से जीत जाएगा, क्योंकि बहुत तेज दौड़ता है और खरगोश अपनी तेज गति से फिनिश लाइन के पास तक के दौड़ कर आ गया और उसके बाद में उसने सोचा कि अब कछुआ तो धीरे-धीरे आएगा इतनी देर दौड़ के आएगा तो थोड़ा आराम कर लेता हूं | इसलिए वह रास्ते में एक पेड़ के नीचे सो गया।
इस बीच, कछुआ धीमी गति से चलता रहा धीरे-धीरे उसने नदी पार कर खबर रास्ते से होते हुए रास्ते वह अपनी गति से चल रहा था वह कहीं रुक नहीं धीरे-धीरे धीरे-धीरे चलता रहा और जब फिनिश लाइन पर पहुंचा तो उसने देखा कि खरगोश सोया हुआ है और कछु में खरगोश को पीछे छोड़ दिया। ओपन की लाइन तक पहुंच गया सब जानवरों की शोर से से खरगोश की नींद खुल गई तो उसने देखा कछुआ पहले ही जंगल की परिक्रमा पूरी कर चुका था।
खरगोश को अपनी हार स्वीकार करनी पड़ी और उसने कछुए को बधाई दी। कछुआ ने कहा, "धीमी गति से चलने में कोई बुराई नहीं है, अगर आप अपने लक्ष्य पर ध्यान केंद्रित रखते हैं और हार नहीं मानते।"
इस कहानी से हमें यह सीखने को मिलता है कि धैर्य और दृढ़ता सफलता की कुंजी है, न कि सिर्फ तेजी या गति। धीरे-धीरे अपने मंजिल की तरफ बढ़ते रहना चाहिए कहीं भी रुकना नहीं चाहिए अगर आप रुक गए तो फिर आपकी हर निश्चित है जैसे रुका हुआ पानी कीचड़ बन जाता है और बहता हुआ पानी पीने के लायक होता है धीरे-धीरे आगे बढ़ो सफलता आपके कदम चूमेंग विश्वास हो खुद पर तो आप अपने मंजिल तक जरूर पहुंचेंगे| हमेशा आगे बढ़ते रहिए|
इसी के साथ हमारी कहानी कछुआ खरगोश की होती है खत्म अगली कहानी अगले चैप्टर में एक नई कहानी ओर नई सिख के साथ और नहीं सीख के साथ जब तक के इंतजार कीजिए......?स्थान: ग्राम हरिपुर का सरकारी प्राथमिक विद्यालय
एक समय की बात है, एक जंगल में एक हाथी रहता था। वह बहुत बड़ा और शक्तिशाली था। एक दिन, जब वह जंगल में घूम रहा था, तो उसने एक छोटी सी चींटी को देखा।
next.....
हाथी ने चींटी को देखकर हंसने लगा और कहा, "तुम इतनी छोटी क्यों हो? तुम क्या कर सकती हो?"
चींटी ने हाथी की बात सुनी और कहा, "मैं छोटी हो सकती हूं, लेकिन मैं बहुत मजबूत हूं। मैं अपने समूह के साथ मिलकर बड़े-बड़े काम कर सकती हूं।" कहीं भी छोटी सी भी जगह में घुस सकती हूं पर तुम तुम तो इतने मोटे और विशाल का आए हो कि तुमको तो बहुत सारी जगह लगती चलने को तुम चलाते तो भूकंप आ जाता है हा हा हा हा हा
हाथी चींटी की बात बहुत बुरी लगी उसने बोला तुम मेरे को तुम्हारी बातों पर विश्वास नहीं है तुम कुछ नहीं कर सकती हो तुम मेरा मजाक उड़ा रही हो मैं तुम्हें अभी अपने पैर के नीचे मसाला सकता हूं। और अगर तुमको अपने आप पर इतना ही विश्वास है तो दिखाओ तुम क्या कर सकती हो।
चींटी ने हाथी की चुनौती स्वीकार की और अपने समूह के साथ मिलकर एक बड़ा काम करने का फैसला किया। उन्होंने एक बड़े पत्थर को हटाने का फैसला किया जो जंगल के रास्ते में पड़ा था।
और यह बात उसने हाथी को बताई तो हाथी उसका मजाक उड़ने लगा तुम वह पत्थर के उठा सकोगी वह पत्थर तो मैं एक झटके में यहां से अलग कर सकता हूं तो चींटी ने बोला नहीं मैं तुमको साबित करके दिखाऊंगी कि हम छोटे हैं पर हमारे संगठन में इतनी शक्ति है कि हम पत्थर को हटा सकते हैं
चींटी में जाकर अपनी सभी दोस्तों चीटियों को इकट्ठा किया और उनको बताया कि उसके और हाथी के बीच में बहस हो गई और उसने एक चुनौती मोल ली है
उसमें से एक चीटी ने कहा तुमको यह नहीं करना चाहिए था हाथी कितना विशालकाय है अगर हम इस चुनौती में खड़े नहीं होते तो क्या होगा
पहले वाली चींटी ने कहा कि तुम डरो मत विश्वास रखो अपने संगठन पर हम सब मिलकर काम करेंगे तो काम जल्दी हो जाएगा और हम उसका में जरुर सफल होंगे
सभी चीटियों ने उसके हमें हां मिलाई और उन्होंने अपना काम शुरू कर दिया
चींटियों ने मिलकर पत्थर को हटाने का काम शुरू किया। उन्होंने अपनी मजबूती और संगठन का उपयोग करके पत्थर को धीरे-धीरे हटाना शुरू किया। चींटीओ को काम करने में थोड़ा समय लगा पर चीटियों ने अपना पूरा दम लगाकर अपना काम निरंतर करती रही
हाथी ने चींटियों को काम करते हुए देखा और उनकी मजबूती और संगठन को देखकर आश्चर्यचकित हो गया। उसने महसूस किया कि चींटी ने सच कहा था कि वह अपने समूह के साथ मिलकर बड़े-बड़े काम कर सकती है।
हाथी ने चींटी की प्रशंसा की और कहा, "तुमने मुझे दिखा दिया कि तुम क्या कर सकती हो। तुम वास्तव में बहुत मजबूत हो।"
इस कहानी से हमें यह सीखने को मिलता है कि आकार और शक्ति से ज्यादा महत्वपूर्ण है संगठन, मजबूती और सामूहिक प्रयास।
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priyanka Bagani....