Chapter 164
Qaid-e-Ishq - Chapter 164
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सुबह की धूप हवेली के लंबे गलियारों में उतर रही थी। हर कोना शांत था, जैसे रात ने अब तक कुछ अनकहा समेट रखा हो। आर्या छत पर बैठी थी—बाल खुले, चेहरे पर हल्की थकान और भीतर कोई पुराना स्