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Chapter 20

Qaid-e-Ishq - Chapter 20

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हवेली की परछाइयाँ उस शाम कुछ और ही कह रही थीं। चारों ओर मेला घूमकर लौटे लोगों की थकान और संतोष की मिली-जुली आहटें थीं। हवेली की दीवारों पर रौशनी की लकीरें कुछ इस तरह गिर रही थीं, ज

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