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Chapter 125

Qaid-e-Ishq - Chapter 125

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देर रात का वक्त था। सन्नाटा कमरे में रेंग रहा था, जैसे दीवारों के भीतर भी कोई अनकहा डर पनप रहा हो। बाहर हल्की हवा चल रही थी; खिड़की के शीशों से टकराकर रह-रहकर धीमी आवाजें आ रही थीं

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