Qaid-e-ishq Ch. 1

Qaid-e-Ishq - Chapter 1

Posted by S✨ Sood • Apr 17, 2025 05:55 PM

सगाई की रस्म अपने शबाब पर थी। मंच पर रेशमी शेरवानी में मंयक ने कांपते हाथों से आर्या की उंगली में हीरे की अंगूठी पहनाई। तालियों की गूंज हवेली के आंगन में भर गई। सुनहरी लहंगे में सजी आर्या के गाल हल्की लाली से दमक रहे थे—खुशी की या शायद किसी और वजह से।

हवेली के एक कोने में खड़ा सम्राट उस मुस्कान को पढ़ने की कोशिश कर रहा था। उसकी आंखों में बेचैनी थी, सांस भारी। मानो हर ताली, हर हंसी उसके अंदर चुभ रही हो।

"सम्राट, वहां क्या खड़ा है? आ न!" मंयक ने पुकारा।

सम्राट चौंका, नज़रें आर्या से हटाईं लेकिन दिल अब भी उसी पर अटका रहा। धीरे-धीरे मंच तक आया।

"ये आर्या है…तुम्हारी होने वाली भाभी," मंयक ने मुस्कुराते हुए कहा।

सम्राट ने मंयक को बधाई दी, फिर हाथ बढ़ाया। आर्या ने झिझकते हुए हाथ मिलाया, पर उसकी आंखों में अजनबीपन था।

"यू आर सो ब्यूटीफुल…" सम्राट के शब्द उसकी सांस के साथ बह निकले। उसकी नज़रें आर्या पर टिकी रहीं—चेहरे से कंधों तक, जैसे छुअन में बदल गई हों।

आर्या ने झटके से हाथ खींचा। "आह्हा…हाथ छोड़ो।"

आवाज़ धीमी थी, सम्राट एक पल को ठिठका, फिर हाथ छोड़ दिया। मगर आंखें…वो अब भी आर्या पर जमी थीं।

हॉल में कोई ध्यान नहीं दे रहा था। चारों ओर हंसी-मज़ाक, चाय-मिठाई…पर उस कोने में हवा अचानक भारी हो चुकी थी।

आर्या ने बड़बड़ाया, "अजीब इंसान है…"

उसके शब्द धीमे थे, लेकिन सम्राट के कानों में हथौड़े की तरह गूंजे।

थोड़ी देर बाद, आर्या और मंयक स्टेज पर सोफे पर बैठे थे। आर्या ने हल्की मुस्कान के साथ कहा,

"ये कौन है?"

मंयक हंस पड़ा। "वो मेरा सबसे करीबी दोस्त है—सम्राट ओबेरॉय। बिलियनेयर, और सबसे बढ़कर…मेरे लिए भाई जैसा।"

आर्या ने हैरानी से आंखें चौड़ी कीं। "वो…अच्छा… "

"हाँ, लेकिन उससे भी ज़्यादा," मंयक ने कहा, "पूरी सगाई की प्लानिंग उसी ने की है।"

आर्या ने फिर उसकी ओर देखा। काले सूट में, लाल टाई लगाए, वह सबकी भीड़ से अलग खड़ा था। उसकी निगाहें स्थिर थीं—बस आर्या पर।

"ये…अलग है। और डरावना भी," आर्या ने बुदबुदाया।

मंयक ने सिर हिलाया, "सही कहा। लेकिन वफादार है।"

आर्या की बातों के बीच सम्राट का जुनून और गहरा हो चुका था। जब उसने मंयक को आर्या का हाथ पकड़ते देखा, उसके भीतर कुछ टूट गया। उसने पास के गुलाब को मसल डाला। फिर धीमे स्वर में फुसफुसाया,

"तुम्हारी हंसी सिर्फ मेरी है।"

आर्या ने उसकी तरफ देखा—उसकी आंखों में आग थी।

सम्राट मंच की ओर बढ़ा। मुस्कुराहट उसके होंठों पर थी, मगर वह शिकारी सी थी।

"इतनी प्यारी बातें…लगा कहीं कुछ खास मिस न कर दूं," उसने कहा।

आर्या ने हल्की मुस्कान के साथ जवाब दिया, "आपकी नज़रों से कुछ छूटे, यह तो मुश्किल है।"

सम्राट की आंखें गहरी हो गईं। "मैं किसी चीज़ को छूटने नहीं देता…जो मेरी होनी चाहिए।"

उसने एक गुलाब की पंखुड़ी आर्या की ओर बढ़ाई। "ये तुम्हारे लिए…कांटों समेत। जैसे मैं।"

आर्या ने चुपचाप उसे हथेली में रख लिया। मंयक माहौल हल्का करने की कोशिश करता रहा, मगर हवा अब सन्नाटे से भरी थी।

बारिश तेज़ हो गई। खिड़कियों से बूंदें टकराईं। आर्या खिड़की के पास जाकर हाथ फैलाकर बारिश को महसूस करने लगी। उस पल में वह किसी परी जैसी लग रही थी।

सम्राट अब और रुक नहीं पाया। उसके कदम खुद-ब-खुद आर्या की ओर बढ़े। वह उसके पास पहुंचा, उसकी आंखों में गहराई से देखा।

"सम्राट?" आर्या की आवाज़ कांपी।

जवाब में उसने बस उसका हाथ थामा—और अचानक अपनी ओर खींच लिया।

सबके सामने, सबकी आंखों के बीच। हॉल में खामोशी छा गई।

आर्या का दिल ज़ोर से धड़क रहा था। विरोध करना चाहती थी, मगर उंगलियां उसकी पकड़ में उलझ चुकी थीं।

बारिश में बाहर ले जाकर सम्राट ने उसे अपनी बाहों में भर लिया—और बिना कुछ कहे, उसके होंठों पर अपने होंठ रख दिए।

वक़्त थम गया। हंसी, तालियां, सब गुम हो गए। बस बारिश, दिल की धड़कनें और सम्राट का जुनून।

"तुम मेरे हो…सिर्फ मेरे," उसने गहरी आवाज़ में कहा।

आर्या की आंखें भीग गईं—बारिश से भी और उस अजीब एहसास से भी। वह कांप रही थी, मगर खुद को छुड़ा नहीं पा रही थी। सम्राट ने उसे अचानक ही पकड होठों पर चूंम लिया,

और तभी—सब कुछ बदल गया।

सम्राट ने पलटकर देखा…उसकी बाहें खाली थीं। आर्या सामने नहीं थी। भीगी साड़ी, गीला चेहरा, उसकी आंखों का समर्पण—सब धुंध बनकर उड़ चुका था।

वह अकेला खड़ा था। मंच पर।

"यह…क्या…" सम्राट बड़बड़ाया।

सगाई का शोर, रोशनी, संगीत—सब फिर से वैसा ही था। बस उसके भीतर का तूफान अब और तेज़ हो चुका था।

100%