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रुतबा "सियासत की बिसात पर, दिल भी दांव पर थे।"
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रुतबा
सत्ता के गलियारों में रिश्ते नहीं, समीकरण बनते हैं... लेकिन जब दिल उन समीकरणों के बीच आ जाए, तो खेल बदल जाता है।
बठिंडा (मालवा )के शेखपुरा गांव से निकलकर दिल्ली की राजनीति तक अपनी पहचान बनाने वाला गुरशेर सिंह बराड़ आज लोकजन राष्ट्रीय पार्टी ...
सत्ता के गलियारों में रिश्ते नहीं, समीकरण बनते हैं... लेकिन जब दिल उन समीकरणों के बीच आ जाए, तो खेल बदल जाता है।
बठिंडा (मालवा )के शेखपुरा गांव से निकलकर दिल्ली की राजनीति तक अपनी पहचान बनाने वाला गुरशेर सिंह बराड़ आज लोकजन राष्ट्रीय पार्टी ...
रुतबा
सत्ता के गलियारों में रिश्ते नहीं, समीकरण बनते हैं... लेकिन जब दिल उन समीकरणों के बीच आ जाए, तो खेल बदल जाता है।
बठिंडा (मालवा )के शेखपुरा गांव से निकलकर दिल्ली की राजनीति तक अपनी पहचान बनाने वाला गुरशेर सिंह बराड़ आज लोकजन राष्ट्रीय पार्टी का सबसे लोकप्रिय युवा चेहरा है। एक पूर्व मुख्यमंत्री का पोता, लाखों युवाओं की आवाज़ और पंजाब का अगला प्रदेश अध्यक्ष बनने का सबसे मजबूत दावेदार।
लेकिन राजनीति में मंज़िल सिर्फ मेहनत से नहीं मिलती, समर्थन भी चाहिए।
दिल्ली में नई सरकार बनने के बाद वरिष्ठ नेता नरेंद्र त्रिवेदी गृह मंत्री बनने की तैयारी में हैं। बदले में उन्हें गुरशेर की ज़रूरत है, क्योंकि पार्टी के राष्ट्रीय नेता आर्यमान शास्त्री गुरशेर पर आंख मूंदकर भरोसा करते हैं।
एक राजनीतिक सौदा होता है।
नरेंद्र त्रिवेदी गुरशेर को अपनी बेटी का रिश्ता देने का वादा करते हैं, ताकि दोनों परिवारों के बीच भरोसे की डोर बंध जाए। मगर शादी से ठीक पहले उनकी बेटी इस रिश्ते को ठुकरा देती है।
अपनी महत्वाकांक्षाओं को बचाने के लिए नरेंद्र एक ऐसा फैसला लेते हैं जो कई ज़िंदगियां बदल देता है।
अपनी अनाथ भतीजी सिमरन को, जिसे उन्होंने अपनी बेटी की तरह पाला है, गुरशेर की दुल्हन बनाकर उसके जीवन में भेज देते हैं।
एक तरफ पंजाब की सियासत, दिल्ली के सत्ता गलियारे, गुटबाज़ी, विश्वासघात और मुख्यमंत्री की कुर्सी की दौड़...
दूसरी तरफ दो ऐसे लोग, जिनकी शादी प्यार नहीं, एक राजनीतिक समझौते की वजह से हुई है।
क्या गुरशेर अपने सपनों की मंज़िल तक पहुंच पाएगा?
क्या सिमरन कभी उस आदमी के दिल में अपनी जगह बना पाएगी, जिसने उसे सिर्फ एक सौदे का हिस्सा समझा?
और जब सच सामने आएगा, तो क्या बचेगा—रिश्ता, प्यार या सिर्फ़ रुतबा?
एक ऐसी कहानी, जहां सियासत की हर चाल के साथ इश्क़ भी अपनी बाज़ी खेलता है।
सत्ता के गलियारों में रिश्ते नहीं, समीकरण बनते हैं... लेकिन जब दिल उन समीकरणों के बीच आ जाए, तो खेल बदल जाता है।
बठिंडा (मालवा )के शेखपुरा गांव से निकलकर दिल्ली की राजनीति तक अपनी पहचान बनाने वाला गुरशेर सिंह बराड़ आज लोकजन राष्ट्रीय पार्टी का सबसे लोकप्रिय युवा चेहरा है। एक पूर्व मुख्यमंत्री का पोता, लाखों युवाओं की आवाज़ और पंजाब का अगला प्रदेश अध्यक्ष बनने का सबसे मजबूत दावेदार।
लेकिन राजनीति में मंज़िल सिर्फ मेहनत से नहीं मिलती, समर्थन भी चाहिए।
दिल्ली में नई सरकार बनने के बाद वरिष्ठ नेता नरेंद्र त्रिवेदी गृह मंत्री बनने की तैयारी में हैं। बदले में उन्हें गुरशेर की ज़रूरत है, क्योंकि पार्टी के राष्ट्रीय नेता आर्यमान शास्त्री गुरशेर पर आंख मूंदकर भरोसा करते हैं।
एक राजनीतिक सौदा होता है।
नरेंद्र त्रिवेदी गुरशेर को अपनी बेटी का रिश्ता देने का वादा करते हैं, ताकि दोनों परिवारों के बीच भरोसे की डोर बंध जाए। मगर शादी से ठीक पहले उनकी बेटी इस रिश्ते को ठुकरा देती है।
अपनी महत्वाकांक्षाओं को बचाने के लिए नरेंद्र एक ऐसा फैसला लेते हैं जो कई ज़िंदगियां बदल देता है।
अपनी अनाथ भतीजी सिमरन को, जिसे उन्होंने अपनी बेटी की तरह पाला है, गुरशेर की दुल्हन बनाकर उसके जीवन में भेज देते हैं।
एक तरफ पंजाब की सियासत, दिल्ली के सत्ता गलियारे, गुटबाज़ी, विश्वासघात और मुख्यमंत्री की कुर्सी की दौड़...
दूसरी तरफ दो ऐसे लोग, जिनकी शादी प्यार नहीं, एक राजनीतिक समझौते की वजह से हुई है।
क्या गुरशेर अपने सपनों की मंज़िल तक पहुंच पाएगा?
क्या सिमरन कभी उस आदमी के दिल में अपनी जगह बना पाएगी, जिसने उसे सिर्फ एक सौदे का हिस्सा समझा?
और जब सच सामने आएगा, तो क्या बचेगा—रिश्ता, प्यार या सिर्फ़ रुतबा?
एक ऐसी कहानी, जहां सियासत की हर चाल के साथ इश्क़ भी अपनी बाज़ी खेलता है।
Chapter
13
Words
15.7K
Updated
8 hrs ago
Published
May 31, 2026
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रुतबा "सियासत की बिसात पर, दिल भी दांव पर थे।" - Chapter 1
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रुतबा
सत्ता के गलियारों में रिश्ते नहीं, समीकरण बनते हैं... लेकिन जब दिल उन समीकरणों के बीच आ जाए, तो खेल बदल जाता है।
बठिंडा (मालवा )के शेखपुरा गांव से निकलकर दिल्ली की राजनीति तक अपनी पहचान बनाने वाला गुरशेर सिंह बराड़ आज लोकजन राष्ट्रीय पार्टी का सबसे लोकप्रिय युवा चेहरा है। एक पूर्व मुख्यमंत्री का पोता, लाखों युवाओं की आवाज़ और पंजाब का अगला प्रदेश अध्यक्ष बनने का सबसे मजबूत दावेदार।
लेकिन राजनीति में मंज़िल सिर्फ मेहनत से नहीं मिलती, समर्थन भी चाहिए।
दिल्ली में नई सरकार बनने के बाद वरिष्ठ नेता नरेंद्र त्रिवेदी गृह मंत्री बनने की तैयारी में हैं। बदले में उन्हें गुरशेर की ज़रूरत है, क्योंकि पार्टी के राष्ट्रीय नेता आर्यमान शास्त्री गुरशेर पर आंख मूंदकर भरोसा करते हैं।
एक राजनीतिक सौदा होता है।
नरेंद्र त्रिवेदी गुरशेर को अपनी बेटी का रिश्ता देने का वादा करते हैं, ताकि दोनों परिवारों के बीच भरोसे की डोर बंध जाए। मगर शादी से ठीक पहले उनकी बेटी इस रिश्ते को ठुकरा देती है।
अपनी महत्वाकांक्षाओं को बचाने के लिए नरेंद्र एक ऐसा फैसला लेते हैं जो कई ज़िंदगियां बदल देता है।
अपनी अनाथ भतीजी सिमरन को, जिसे उन्होंने अपनी बेटी की तरह पाला है, गुरशेर की दुल्हन बनाकर उसके जीवन में भेज देते हैं।
एक तरफ पंजाब की सियासत, दिल्ली के सत्ता गलियारे, गुटबाज़ी, विश्वासघात और मुख्यमंत्री की कुर्सी की दौड़...
दूसरी तरफ दो ऐसे लोग, जिनकी शादी प्यार नहीं, एक राजनीतिक समझौते की वजह से हुई है।
क्या गुरशेर अपने सपनों की मंज़िल तक पहुंच पाएगा?
क्या सिमरन कभी उस आदमी के दिल में अपनी जगह बना पाएगी, जिसने उसे सिर्फ एक सौदे का हिस्सा समझा?
और जब सच सामने आएगा, तो क्या बचेगा—रिश्ता, प्यार या सिर्फ़ रुतबा?
एक ऐसी कहानी, जहां सियासत की हर चाल के साथ इश्क़ भी अपनी बाज़ी खेलता है।
सत्ता के गलियारों में रिश्ते नहीं, समीकरण बनते हैं... लेकिन जब दिल उन समीकरणों के बीच आ जाए, तो खेल बदल जाता है।
बठिंडा (मालवा )के शेखपुरा गांव से निकलकर दिल्ली की राजनीति तक अपनी पहचान बनाने वाला गुरशेर सिंह बराड़ आज लोकजन राष्ट्रीय पार्टी का सबसे लोकप्रिय युवा चेहरा है। एक पूर्व मुख्यमंत्री का पोता, लाखों युवाओं की आवाज़ और पंजाब का अगला प्रदेश अध्यक्ष बनने का सबसे मजबूत दावेदार।
लेकिन राजनीति में मंज़िल सिर्फ मेहनत से नहीं मिलती, समर्थन भी चाहिए।
दिल्ली में नई सरकार बनने के बाद वरिष्ठ नेता नरेंद्र त्रिवेदी गृह मंत्री बनने की तैयारी में हैं। बदले में उन्हें गुरशेर की ज़रूरत है, क्योंकि पार्टी के राष्ट्रीय नेता आर्यमान शास्त्री गुरशेर पर आंख मूंदकर भरोसा करते हैं।
एक राजनीतिक सौदा होता है।
नरेंद्र त्रिवेदी गुरशेर को अपनी बेटी का रिश्ता देने का वादा करते हैं, ताकि दोनों परिवारों के बीच भरोसे की डोर बंध जाए। मगर शादी से ठीक पहले उनकी बेटी इस रिश्ते को ठुकरा देती है।
अपनी महत्वाकांक्षाओं को बचाने के लिए नरेंद्र एक ऐसा फैसला लेते हैं जो कई ज़िंदगियां बदल देता है।
अपनी अनाथ भतीजी सिमरन को, जिसे उन्होंने अपनी बेटी की तरह पाला है, गुरशेर की दुल्हन बनाकर उसके जीवन में भेज देते हैं।
एक तरफ पंजाब की सियासत, दिल्ली के सत्ता गलियारे, गुटबाज़ी, विश्वासघात और मुख्यमंत्री की कुर्सी की दौड़...
दूसरी तरफ दो ऐसे लोग, जिनकी शादी प्यार नहीं, एक राजनीतिक समझौते की वजह से हुई है।
क्या गुरशेर अपने सपनों की मंज़िल तक पहुंच पाएगा?
क्या सिमरन कभी उस आदमी के दिल में अपनी जगह बना पाएगी, जिसने उसे सिर्फ एक सौदे का हिस्सा समझा?
और जब सच सामने आएगा, तो क्या बचेगा—रिश्ता, प्यार या सिर्फ़ रुतबा?
एक ऐसी कहानी, जहां सियासत की हर चाल के साथ इश्क़ भी अपनी बाज़ी खेलता है।
Tanisha Tayde
रुतबा "सियासत की बिसात पर, दिल भी दांव पर थे।" - Chapter 13 • 2 hours ago
Deepa Maheshwari
रुतबा "सियासत की बिसात पर, दिल भी दांव पर थे।" - Chapter 13 • 5 hours ago
Tamanna Khatun
रुतबा "सियासत की बिसात पर, दिल भी दांव पर थे।" - Chapter 13 • 7 hours ago
Deepa Maheshwari
5 hours ago
Nice story 👌
1 likes • रुतबा "सियासत की बिसात पर, दिल भी दांव पर थे।" - Chapter 13
Tamanna Khatun
7 hours ago
nice story
1 likes • रुतबा "सियासत की बिसात पर, दिल भी दांव पर थे।" - Chapter 13No fan art available for this story yet.
🤩😍😍
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