Chapter 43
तंदूर ही निगल जायेगा एक दिन
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बलदेव ने कुर्सी पर थोड़ा आगे झुकते हुए कहा — “जवान? तू? अरे तू तो पैदा होते ही दूध पीने के बजाय चाय मांग बैठा था! कौन जवान बोल रहा है खुद को?” अनंत हँस पड़ा, “क्योंकि मैं ठाठ से पै