Chapter 21
मर्यादाओं में बंधी एक डोर <br>“एक रिश्ता… जिसे नाम देना गुनाह था” - Chapter 21
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कमरे में फैली खामोशी अब डर में बदल चुकी थी। विवान के हाथ में पकड़ा फोन जैसे बम बन चुका था— जिसके फटने का इंतज़ार सबको था… पर कोई चाहता नहीं था। आर्यव की नजरें फोन पर टिकी थीं। जबकि