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Chapter 138

इश्क़ खुद के लिए ज़हर बन जायगी,पर आकर्ष के लिए दवा नहीं

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शाम को जब इश्क़ की आंख खुलती है तो वो कमरे में अकेली थी। उस ने देखा कि आकर्ष उस के साथ बेड पर नहीं था। वो धीरे से बेड पर उठ कर बैठ जाती है। उसे अपने शरीर में असहनीय दर्द हो रहा था।

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