You are my obsession love Ch. 3

ब्लू आईज हिप्नोटाइज

Posted by unicorngirl ✔️ • Nov 09, 2025 10:55 AM

इश्क की आंखें एकदम बड़ी हो गई थी। क्या यह आदमी सच में कोई अपराधी है? और इसने सच में कोई जुर्म किया है? उसे देखकर तो ऐसा लगता नहीं है । क्योंकि दिखने में वह किसी परफेक्ट मॉडल की तरह दिख रहा है । उसका बॉडी स्ट्रक्चर, बायसेप्स, फेस कट सब कुछ किसी मॉडल की तरह है । एक शब्द में कहा जाए तो यह आदमी किसी ग्रीक गॉड की छवि हो सकती है।

  इश्क उसकी आंखों की गहराइयों में खो गई थी। उसकी आंखों का रंग हल्का नीला है। जैसे कोई शांत समंदर। पर अंदर का ज्वालामुखी शायद उसे अभी नजर नहीं आ रहा है।

 आकर्ष खिड़कियों के पास से चलता हुआ कुर्सी के पास आ जाता है। और वह इंतजार कर रहा था, कि कब इश्क उससे कुछ और कहे । लेकिन इश्क का तो क्या ही कहना है ? ब्लू आईज हिप्नोटाइज वाला गाना आज उस पर बिल्कुल सूट कर रहा था। आकर्ष की ब्लू आईज ने उसे सच में हिप्नोटाइज कर दिया था।

  इश्क पूरी तरह से आकर्ष के चेहरे पर खोई हुई थी। उसका चेहरा किसी तरासे हुए हीरे की तरह लग रहा था। जॉ लाइन एकदम परफेक्ट कट की थी। और उसकी वह आंखें जिसके ऊपर से इश्क अपनी नज़रें हटा ही नहीं पा रही थी।

   ऐसा लग रहा था, कि वह इश्क की आंखों से उसकी गहराइयों को देखने की कोशिश कर रहे हैं। वैसे तो लड़कियों की खूबसूरती पर उन्हें ब्यूटीफुल कहा जाता है और लड़कों को हैंडसम। पर इस इंसान के लिए हैंडसम शब्द शायद छोटा पड़ सकता है। अगर हैंडसम और ब्यूटीफुल से भी कोई अच्छा शब्द है, जो किसी की सुंदरता को डिफाइन कर सकता है तो शायद वह शब्द इस समय आकर्ष के लिए बना होगा।

  “ हेलो डॉक्टर..” आकर्ष की उस नरम, मधुर और धीमी आवाज ने इश्क को अपने हिप्नोटाइज दुनिया से बाहर लाया। 

   इश्क को थोड़ी एंब्रेसमेंट फील होती है। क्योंकि पेशेंट से मिलने का काम उसका था। लेकिन यहां पर तो पेशेंट ही उसे यह याद दिला रहा है, कि इस कमरे में वह पेशेंट है।

   इश्क अपने ख्यालों से बाहर आती है और हैरान नजरों से आकर्ष को देखते हुए अपने मन में कहती है, “ यह एक मर्डरर है। मतलब था.. लेकिन फिर भी मुझे इसके चेहरे पर अट्रैक्ट नहीं होना है। और ना ही मुझे इसकी घुमावदार बातों में फसना है। मैं यह नहीं भूलूंगी, कि मैं एक डॉक्टर हूं । इसलिए मुझे इस हत्यारे से डरना नहीं है।

   हालांकि मुझे थोड़ा सा डर जरूर लग रहा है, लेकिन मैं उसे यह दिखा नहीं सकती हूं। क्योंकि मैं एक डॉक्टर हूं और वह मेरा पेशंट है। इसीलिए पेशेंट को कंफर्टेबल करने से पहले मुझे खुद कंफर्टेबल होना होगा।”

  इश्क ने एक गहरी सांस छोड़ी और आकर्ष को देखकर मुस्कुराते हुए हा में सर हिलाया। लेकिन अभी भी इश्क ने अपने मुंह से कुछ नहीं कहा। वह पहली मुलाकात में उसके सामने जेंटल बनने की कोशिश कर रही थी। और दूसरी बात यह है, कि वह आकर्ष के ऊपर चिल्लाकर अपना पहला इंप्रेशन ही खराब नहीं करना चाहती थी। क्योंकि उसे आकर्ष के साथ 3 महीने बीताने थे। इसीलिए वह पहले उसका विश्वास जीतना चाहती थी।

 “ क्या आप मुझे बैठने के लिए नहीं कहेंगे..?” आकर्ष ने अपना अगला सवाल इश्क के सामने रखा। तो इश्क एकदम से हैरान हो जाती है। सच में वह कब से खड़ी थी और साथ में उसने आकर्ष को भी खड़ा रखा था।

   पर इश्क उसके सामने अपना पहला इंप्रेशन अच्छा रखना चाहती थी। इसीलिए उसने भी थोड़ा सा रुबाब में कहा, “ वैसे बैठने के लिए तो आपने भी मुझसे नहीं कहा है ना ?”

  आकर्ष की एक आईब्रो ऊपर उठ जाती है और वह इश्क को घूर कर देखते हुए कहता है, “ मुझे लगता है, कि यह आपका केबिन है । और आप यहां पर डॉक्टर हैं। और जहां तक मुझे याद है, कि मैं एक पेशेंट हूं। क्या आपको एक पेशेंट की जरूरत लेनी पड़ेगी बैठने के लिए ?”

  इश्क हैरान हो जाती है। और हैरानी से आकर्ष को देखने लगती है । वह कितनी स्टुपिड है और यह सवाल उससे भी ज्यादा स्टुपिड था। वह जल्दी से अपनी कुर्सी पर बैठते हुए कहती है, “अच्छा तो तुम्हें पता है, कि तुम एक पेशेंट हो। चलो अच्छी बात है, कि तुम्हें इस बात का एहसास है कि तुम एक पेशेंट हो। और मैं एक डॉक्टर हूं। पर जहां से मैं देख पा रही हूं, मुझे तो तुम बिल्कुल ठीक नजर आ रहे हो।”

  इश्क आकर्ष के साथ कंफर्टेबल होना चाहती थी , ताकि आकर्ष के साथ सेशन के दौरान वह उसे अपनी सारी बात बताएं ।आकर्ष के चेहरे पर एक हंसी आ जाती है ।

   “हे भगवान यह इंसान हंसते हुए भी कितना हैंडसम लगता है।” इश्क ने उसे हंसता हुआ देख कर अपने मन में कहा। 

  पर फिर भी अब वह उसके हिप्नोटाइज वाले जाल में नहीं फंसने वाली थी. उसने खुद के ऊपर नियंत्रण रखा. आकर्ष उसके सामने वाली कुर्सी पर बैठ जाता है और हंसते हुए इश्क को देख कर कहता है, “ तो अगर आपको लगता है, कि मैं ठीक हूं। तो फिर प्रॉब्लम किस बात की है? एनओसी लेटर पर साइन कर दीजिए।”

  इश्क का चेहरा अचानक से हैरान हो जाता है। और वह बड़ी-बड़ी आंखों से आकर्ष को देखने लगती है । सच में यह आदमी माइंड गेम खेलने में एकदम परफेक्ट है। इश्क ने एक छोटी सी बात क्या कही, उसने तो उस बात को पकड़ कर सारी बात ही खत्म कर दी। 

  पर इश्क आकर्ष को यह नहीं बता सकती थी, कि उसकी बातों का इश्क के ऊपर असर हो रहा है। वह एक डॉक्टर थी और अपने भावनाओं पर काबू रखना उसे अच्छी तरह से आता था। उसने जल्दी से मुस्कुराते हुए आकर्ष को देखा और उससे कहने लगी, “ बिल्कुल मैं आपके एनोसी लेटर पर साइन जरूर करूंगी। पर उसके लिए मुझे आपके दिमाग के साथ खेलना होगा।”

 “ अगर ऐसी बात है डॉक्टर तो फिर शायद आपको मेरे दिमाग के साथ 3 महीने तक खेलना होगा । और मेरा केस बहुत सोच समझ कर लीजिएगा डॉक्टर क्योंकि मैं लोगों का दिमाग भटकाने में एक्सपर्ट हूं। मेरा केस थोड़ा सा अजीब है।” आकर्ष ने इश्क की आंखों में देखते हुए कहा।

  इश्क भी हंसते हुए कहती है, “ मुझे इससे कोई प्रॉब्लम नहीं है। मैंने तो इससे भी बहुत अजीब अजीब केस हैंडल किए हैं और आपका केस तो उसके सामने कुछ भी नहीं है।

   इश्क की बात सुनकर आकर्ष के चेहरे पर एक तिरछी मुस्कान आ जाती है...।

   आकर्ष अपने एक पैर पर दूसरा पर चढ़ाकर बैठा हुआ था। वह कुर्सी पर पूरा टेक लगा कर बैठ गया था। उसका एक हाथ टेबल के ऊपर था और वह अपनी उंगलियों से टेबल पर हल्की-हल्के किसी म्यूजिक की धुंन की तरह घूमा रहा था। और उसका दूसरा हाथ उसके गाल पर रखा हुआ था जिससे वह गहरी निगाहों से सिर्फ इश्क को देख रहा था।

   इश्क ने एक वाइट पेपर लिया और उसे अपने सामने रखा। वह पेन को उठाती है और पेपर पर कुछ लिखते हुए उसने आकर्ष को बिना देखे हुए कहा, “ मैं तुमसे कुछ सवाल पूछने वाली हूं। जिसका तुम बिल्कुल ठीक-ठीक और सीधा-सीधा जवाब दोगे ।”

  इश्क इस वक्त अपने उस व्हाइट पेपर पर कुछ प्रिस्क्रिप्शन लिख रही थी । लेकिन आकर्ष की नजरे सिर्फ इश्क के ऊपर ही बनी हुई थी। बार-बार हिलते हुई उसकी पलके और जब वह अपने दूसरे हाथ की उंगलियों से अपने बालों की लटो को कान के पीछे कर रही थी। उसके कुछ बडबडाते हुए धीरे-धीरे से गुलाबी होंठ । और उसके चेहरे का वह अट्रैक्टिव फीचर । आकर्ष बस इश्क को अपनी ठंडी निगाहों से देखे जा रहा था।

   इश्क ने आकर्ष से सवाल किया, “ तो आकर्ष तुम्हारी पिछले सेशन के दौरान क्या तुम्हें हॉस्पिटल से बाहर ले जाया गया ?”

  यह कहने के साथ ही इश्क अपना चेहरा उठा कर आकर्ष को देखती है । जो अपनी घूरती हुई निगाहों से बस उसे ही देख रहा था ।

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