You are my obsession love Ch. 2

पजल

Posted by unicorngirl ✔️ • Nov 09, 2025 10:54 AM

लिफ्ट में पहुंचने के साथ ही इश्क ने अपने हाथ में पड़ी हुई पेशेंट की फाइल को ओपन किया और उसे पढ़ने लगी। जैसे ही उसने फाइल में लिखे हुए पेशेंट की डिटेल को पढ़ना शुरू किया, उसे ऐसा लग रहा था जैसे कि उसे खुद डॉक्टर होकर एक डॉक्टर की जरूरत पड़ सकती है । यह मरीज सच में उसे हार्ट अटैक दे सकता है।

  नाम आकर्ष ठकराल.. जो की एक मुजरिम है। उसने एक जुर्म की सजा काटी है। जब वह 16 साल का था, तो उसने अपनी मां और उसके बॉयफ्रेंड को जलाकर मार डाला था। उस समय उसकी उम्र सिर्फ 16 साल की थी । पुलिस ने पूछताछ के दौरान यह पता चला था, कि वह अपनी मां से बहुत ज्यादा नाराज था । और इसीलिए उसने अपनी मां की हत्या कर दी। 

  क्योंकि उसकी मां ने अपने प्रेमी के साथ मिलकर उसके पिता की हत्या कर दी थी। उसने अपनी जिंदगी के 3 साल जूविनाइल होम में भी था। इसी बीच डॉक्टर को उसके मानसिक रोगी होने का पता चला था। और उसकी इस बीमारी का सबसे बड़ा कारण था, उसका गुस्सा। जिस पर वह कंट्रोल नहीं कर सकता था।

  जुविनाइल होम में जो डॉक्टर आकर्ष का इलाज कर रहे थे, उन्होंने अपनी रिपोर्ट में लिखा था कि 3 साल तक उन्होंने आकर्ष के गुस्से को कंट्रोल करने की पूरी कोशिश की । पर आकर्ष जितना गुस्से वाला है, उससे ज्यादा चालक भी है । वह सामने वाले को यह एहसास ही नहीं होने देता है, कि वह उसके लिए कोई प्लानिंग कर रहा है । उसका दिमाग आम इंसान के मुकाबले बहुत तेजी से भागता है। और वह कई बार चीजों को तुम्हारी आंखों के सामने पलट देगा और तुम्हें पता भी नहीं चलेगा।

  उसने जेल में रहने के बावजूद भी कई लोगों को नुकसान पहुंचाया था। जिसमें उसकी सजा में और बढ़ोतरी होती रही । और रिहाई के बाद भी उसने अपना इलाज बरकरार रखा। आकर्ष के डॉक्टर आज भी उसके साथ टच में है। और वह यह चाहते हैं, कि आकर्ष आगे से कोई अपराध न करें। एक आम इंसानों की तरह नॉर्मल जिंदगी जिए और इसके लिए ही एक एनओसी सर्टिफिकेट चाहिए। 

  क्योंकि वह जूविनाइल हॉम में अपनी सजा काट चुका था। लेकिन अपने बाकी अपराधों के लिए वह आज भी पुलिस की हिरासत में था। और अब उसकी सजा पूरी होने वाली थी। सिर्फ 3 महीने का इंतजार और और उसके बाद आकर्ष एक आजाद पंछी की तरह बाहर घूम सकता है। लेकिन इसके लिए उसे सबसे पहले कोर्ट को यह साबित करना होगा,। कि वह एक नॉर्मल इंसान है और उसे कोई भी दिमागी तौर पर बीमारी नहीं है।

  वैसे तो आकर्ष के डॉक्टर उसके लिए यह एनओसी सर्टिफिकेट दे सकते थे। पर उम्र के इस पड़ाव में वह रिटायर हो जाते हैं और इसीलिए आकर्ष को एक दूसरे साइकैटरिस्ट के पास रेफर कर दिया जाता है। इसका मतलब यह था, कि इश्क को आकर्ष का इलाज सिर्फ तीन महीने। के लिए ही करना था 

   और उसके बाद डॉक्टर रिपोर्ट में यह भी लिखा था, कि आकर्ष को किस तरीके से हैंडल किया जा सकता है। आकर्ष के डॉक्टर केशव अस्थाना को कोन नहीं जानता है। अपनी पढ़ाई के दौरान कई बार इश्क ने उनके दिए हुए थीसिस पर भी काम किया है और उनके मरीजों को हैंडल करने का तरीका बहुत ही अच्छा और नायाब है। 

   इश्क ने उनके बताइए उदाहरणों से बहुत कुछ सीख भी है। इश्क को याद आता है, कि अपने फाइनल ईयर के दौरान वह एक सेमिनार में डॉक्टर अस्थाना से मिली थी। जहां पर उसने डॉक्टर अस्थाना को अपने प्रैक्टिस के बारे में बताया था। डॉक्टर अस्थाना उससे बहुत ज्यादा प्रभावित हुए थे। और उन्होंने ही इश्क से कहा था, कि वह एक दिन बहुत अच्छी साइकैटरिस्ट बनेगी । 

  शायद डॉक्टर अस्थाना को अपनी बात याद थी और उन्हें इश्क का मरीज को देखने का नजरिया भी पसंद आया था। इसीलिए उन्होंने आकर्ष के लिए इश्क जैसी एक अच्छी साइकैटरिस्ट डॉक्टर का नाम आगे रेफर किया था। 

   इश्क दरवाजे के बाहर खड़ी थी। यह उसका केबिन था। जहां पर दरवाजे के ऊपर नेम प्लेट पर उसका नाम लिखा गया था। साइकैटरिस्ट डॉक्टर इश्क शर्मा। उसने एक गहरी सांस छोड़ी और दरवाजे के हैंडल को घुमाकर उसे खोल दिया । वह धीरे से अंदर कदम रखती है। पर वह अभी भी दरवाजे के पास ही खड़ी थी। उसने चारों तरफ कमरे में देखा और ऐसा लग रहा था जैसे, कि एक सुनसान सन्नाटा उसका वेलकम कर रहा है।  

 यह उसी का केबिन है। वह यहां पर ही बैठा करती है । लेकिन आज उसे अपना केबिन बहुत अजीब सा लग रहा था। यहां की हवाओं में भी कुछ अलग सी खुशबू थी। पर उसे अपने ही केबिन में अलग क्यों लग रहा था ? उसने जब अपने केबिन पर नज़रें दौड़ाई तब जाकर उसकी नजर खिड़की के पास गई। जहां पर एक व्यक्ति उसकी तरफ पीठ करके खड़ा था । लेकिन उसका हाथ इश्क को नजर आ रहा था। उसने अपने दोनों हाथों में एक क्यूब 🧮 को ले रखा था । और उसे सॉल्व करने की कोशिश कर रहा था। पर हैरानी की बात तो यह थी, कि क्यूब उसके हाथ में था और उसकी नजर खिड़की से बाहर थी। 

  शायद वह अपने क्यूब को सॉल्व करने में इतना खो गया था, कि उसे इस बात का भी एहसास नहीं हुआ कि कोई कमरे में दाखिल हो चुका है। उसका पूरा ध्यान इस वक्त अपने क्यूब पर ही था। इश्क ने पीछे से पेशेंट को देखा और एक गहरी सांस छोड़ी । 

  उसने धीरे से अपने कदम उठाए और कमरे के अंदर आ गई। उसके स्लीपर की आवाज से जो फर्श पर आवाज हुई थी, उससे उस कमरे की शांति भंग होती है। और उस आदमी के हाथ अपने क्यूब पर रुक जाते हैं।

  उस आदमी ने धीरे से एक गहरी सांस ली और एक लेडिस परफ्यूम की मीठी सी खुशबू उसे अपने नाक में महसूस होती है। इश्क देखती हैं, वह आदमी दो पल तो रुकता है और फिर वापस से अपने क्यूब को सही करने में लग जाता है।

  इश्क पीछे से उस आदमी को देखते हुए धीरे-धीरे अपने डेस्क के पास पहुंचती है । वह सबसे पहले पर्स को अपनी जगह पर रखती है। लेकिन उसकी नज़रें अभी भी उस आदमी की पीठ पर ही थी। पेशेंट की डिटेल फाइल टेबल पर रखते हुए इश्क इसकी चौड़ी पीठ को ही देख रही थी। वह कड़कती में एक लंबा व्यक्ति है। इश्क हैरान रह जाती है। अब तक उसने जितने भी केसेस हैंडल किए थे, यह उनमें से सबसे अलग था । शायद यह इतने चौड़े कड़कती वाला उसका पहला पेशेंट ही है। जो की एक खतरनाक अपराधी भी है।

   अब तक इश्क के पास जितने भी मामले आए थे, वह सिर्फ दिमागी तौर पर परेशान थे। उन्हें गुस्सा आता था तो वह दूसरों को मारते थे। लेकिन उन्हें कुछ ज्यादा नुकसान नहीं पहुंचाते थे। थोड़े से सेशन के बाद ही उन्होंने अपने गुस्से पर काबू करना सीख लिया था।

  पर इश्क को ऐसा लग रहा था, कि इस पेशेंट के साथ वह बाकी पेशेंट की तरह नहीं पहचान सकती है। शायद यह पेशंट उसकी जिंदगी का टर्निंग पॉइंट होगा। वह आदमी अभी भी खिड़की के पास खड़ा था और अपने हाथों में पड़े हुए उस पजल को अभी भी सॉल्व कर रहा था। 

  इश्क अपने डेस्क के पास खड़ी थी और पेशेंट की फाइल के उसने आगे के पन्ने पलटना शुरू किया। यहां पर उसे कुछ तस्वीरें मिली । पहली तस्वीर जिसमें एक आदमी और एक औरत थी और नीचे उनकी डिटेल थी, कि यह औरत उसकी मां है । और वह जो उसके साथ आदमी है यह वह है, जिसके साथ उसका अफेयर था। क्योंकि यह वह पहली बार था, जब उसने अपने गुस्से को आउट ऑफ कंट्रोल महसूस किया था। इसीलिए इस केस का यह एक मेंन पॉइंट हो सकता है। जहां उसकी मां के बारे में बात ना करके वह उसके गुस्से की वजह जान सकती है।

   इश्क ने फाइल बंद की और मुस्कुराते हुए खिड़की पर खड़े हुए आदमी को देखकर कहने लगी, “ हेलो आकर्ष।”

   यह उसने बहुत ही धीमे स्वर में कहा था। उसे सिर्फ यह बताने के लिए, कि वह इस केबिन में मौजूद है।

  लेकिन आकर्ष ने पलट कर उसकी तरफ नहीं देखा था। बल्कि 1 मिनट के लिए जब उसके हाथ रुके तो वह दोबारा से अपने उस क्यूब पजल को सॉल्व करने लग गया था।

   इश्क की नजरे उसके हाथ पर जाती है। तो वह हैरान हो जाती है । उसके हाथ तेजी से पजल को सॉल्व कर रहे थे। दाएं बाएं ऊपर नीचे और सिर्फ कुछ मिनट में उसने उस पजल को पूरा सॉल्व कर दिया था। उसके सारे रंग अपनी जगह पर थे।

  और जैसे ही वह पजल सॉल्व होता है, आकर्ष इश्क की तरफ घूम जाता है। और अगले ही पल उन दोनों की नजरे एक दूसरे से मिलती है।

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