Chapter 459
Forced by destiny - Chapter 459
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अमरजीत जी अब और कुछ न कह सके। कुछ देर उसके पास रहे फिर उठकर अपने कमरे मे चले आए और देवकी जी की बड़ी सी तस्वीर के आगे खड़े होकर उन्हें नम आँखों से देखते हुए बोले, "आज बहुत खुश