Chapter 113
सयुरी कोमा मे - Chapter 113
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विनोय जी को ऐसी हड़बड़ी में जाते देख मान्यता जी थोड़ी परेशान हो गईं और अपने मन में बोली, "ये ऐसे कहाँ गए? सब ठीक तो है?" मान्यता जी को डर था कि विनोय जी कुछ देव और कावि के खिलाफ न