You are my love Ch. 1

You are my love - Chapter 1

Posted by KUSUM DHARA • May 09, 2025 10:54 AM

dear friends umeed karti hu ki aap sabko kahani jarur pasand aayegi please apna pyaar story ke sath banaye rakhiyega .........

आते हैं कहानी पर........

राजस्थान के एक पुराने मंदिर में,

एक आदमी इरिटेट होते हुए बोला, "ये पंडित मुझे कुछ नहीं सुनना समझा। चल, शादी करा!"

पंडित को जब लगा कि वह कुछ नहीं कर सकता, तो उसने भी मंत्र पढ़ना चालू कर दिया। मंदिर के बाहर लगभग देव और विराज ने सबको घायल कर दिया था।

तभी विराज बोला, "देव, बाकी को मैं संभाल लूँगा। तू कावि के पास जा!"

तो देव ने हाँ में सर हिला दिया, और मंदिर में जाने लगा। मंदिर में पहुँचकर देव ने देखा कि कावि बेसुध बैठी थी और पंडित मंत्र पढ़ रहे थे , और वह आदमी जबरदस्ती कावि का हाथ पकड़ा हुआ था ! देव जल्दी से भागकर गया, और कॉलर पकड़कर उस आदमी को वहाँ से उठा दिया, और एक पंच खींचकर उसके मुँह पर मारा।

देव ने इतनी जोर से मारा था कि थोड़ी देर के लिए वह आदमी अपने होश खो बैठा। लेकिन देव जानता था कि वह आदमी इतनी जल्दी हार नहीं मानेगा। इसके लिए, उसके होश में आने से पहले ही खुद दूल्हे की जगह पर बैठकर पंडित को आगे जारी रखने का इशारा किया। पंडित ने भी कुछ नहीं कहा और मंत्र पढ़ने लगा। फिर पंडित ने देव को फेरे लेने के लिए बोला। देव तो खड़ा हो गया, लेकिन कावि तो अभी भी होश में नहीं थी। इसलिए देव ने उसे अपनी गोद में उठा लिया, और फेरे लेने लगा।

लगभग महिने भर पहले ,

मुंबई के एक इलाके में , सुबह का समय था। रेडियो पर एक गाना चल रहा था, जिसकी धुन पर दो लड़कियाँ नाच रही थीं। तभी एक औरत आई और वो रेडियो बंद कर दि ! तभी उनमें से एक लड़की चिल्लाते हुए बोली, "ये क्या किया मां? हमारा स्टेप बस पूरा होने ही वाला था!""

इतना सुनते ही वह औरत हल्के गुस्से से हुए बोली, "बंद करो तुम दोनों ये सब अकल नहीं है तुम दोनों को कब से आवाज़ दे रही हूँ और यहाँ है कि ये सब चल रहा है !"

जी ये दोनों लड़कियाँ हैं कावी और नंदिनी, और उन पर गुस्सा करती हुई औरत है उनकी माँ !

दोनों अपनी माँ की बात सुनकर एक साथ पलटीं और एक साथ बोलीं, "नहीं हमने नहीं सुना ""दोनों मस्ती के मूड में थी !

उस पर उनकी माँ गुस्से से घुरते हुए बोली, "मुझे कुछ नहीं बोलना, जल्दी जाओ और तैयार होकर नाश्ते के लिए आओ।"

अपनी माँ को गुस्से में देख बिना आनाकानी करे कावी जल्दी से बाथरूम की तरफ भाग गई, और थोड़ी देर बाद फ्रेश होकर आई और दर्पण के सामने आकर तैयार होने लगी !

कावी जिस्की लगभग 21 वर्ष की थी उसकी हाईट 5 फूट, काली और बड़ी-बड़ी आँखें, कमर तक लम्बे काले लेकिन थोड़े लहरी बाल, जो उसके छोटे से चेहरे पर एकदम घने लगते हैं ,होंठों पर लिप बाम, कानो में छोटे छोटे झुमके, आंखो में काजल ,इस वक्त वो अपने बालों को सिर्फ़ पिनअप कि हुई थी, सलवार सूट में कावी एकदम परी जैसी लग रही थी।

अपने आप को मिरर मे देखते हुए कावि एक छोटी सी काली बिंदी लगाई !

तभी उसके पीछे से आवाज़ आई, "बस कर और कितना देखेगी खुद को "" ये आवाज़ उसके पीछे खड़ि उसकी बड़ी बहन नंदिनी की आवाज़ थी !

तो खुद को आईने में देखते हुए कावी बोली _""जब तक मन न भर जाए तब तक दी!"

उसकी इस बात पर नंदिनी उसे घूरने लगी । खुद को घूरता हुआ पाकर कावी पीछे पलटी और देखी कि नंदिनी उसी को अपनी बड़ी बड़ी आँखों से घूर रही है।

अपनी बहन को गुस्से में देखकर, कावी भी उसे घूरने लगी। थोड़ी देर बाद दोनों एकदम से हँसने लगीं, और एक-दूसरे को गले लगा लि ! कावी और नंदिनी दोनों ही बहुत खूबसूरत थीं ! नंदिनी कावी से 2 साल बड़ी थी और कावी से अपनी जान से ज्यादा प्यार करती है !

कुछ देर में वो दोनों निचे आई और नीचे आते ही फिर से उनकी माँ उनहे घुरने लगीं और दोनों उनकी नकल करने लगीं_""कितनी बार बोला है, जल्दी रेडी होकर नीचे आ जाया करो , लेकिन मेरी कोई सुनता ही नहीं है" इतना कहकर दोनों हँसने लगीं !

जिसे देख रेखा जी एकदम चुप हो गईं ,और वे दोनों को गुस्से से घूरने लगी ! जिस वजह वो दोनों चुप होकर एक-दूसरे को देखने लगी,,फिर अचानक से जाकर अपनी माँ के गले से लग गई !

उन ने ऐसा करते ही रेखा जी अपना गुस्सा भूल गई और एक आह भरते हुए दोनों के गाल पर थपथपा दि और उन दोनों को गले से लगा लि!

आज उनका एग्ज़ाम था इसलिये वो तीनों साथ में नाश्ता करने लगीं ! नाश्ता करने के बाद रेखा जी ने उन्हें भगवान का आशीर्वाद लेने के लिए कहा ! जिस पर वो दोनों हा मे सर हिलाते हुए घर के मंदिर की तरफ चली गई !

कुछ देर बाद भगवान का आशीर्वाद लेकर दोनों बहनें कॉलेज के लिए निकल गईं ,और रेखा जी अपने काम पर जाने से पहले अपने कमरे में जाकर, एक तस्वीर के सामने कुछ देर खड़ी रही फिर वो भी निकल गई !

मुंबई के एक नामी कॉलेज में,

कावी और नंदिनी जल्दी-जल्दी कॉलेज पहुँचीं , क्योंकि आज उनकी प्रैक्टिकल की परीक्षा थी। दोनों जल्दी-जल्दी क्लास में गई और अपना अपना एग्ज़ाम देने लगी !

थोड़ी देर बाद दोनों क्लासरूम से परीक्षा देकर बाहर आई और अपने अपने दोस्तों के पास चली गई ! कुछ देर बाद कावी अपने दोस्तों के साथ कैंटीन में थी ! और उनकी मस्ती चालू थी

कॉलेज मे नंदिनी की सिर्फ़ एक ही दोस्त थी, लेकिन कावी मान, निया, अमर दोस्ती थे या कह सक्ते थे की जिगरी दोस्त और अवंतिका जो नंदिनी की दोस्त थी।

कावी और उसके दोस्त सब एक साथ बैठकर खा रहे थे, और एग्ज़ाम की बात भी कर रहे थे ! लेकिन इन सबके बीच कोई था जो कावी और नंदिनी को बुरी तरह घूर रहा था।

ये सबसे अनजान ये दोस्त अपने लगे हुए थे,और उनकी माँ रेखा जी अपनी मुसीबत से लड़ रही थी......

किड्स ऑर्फ़नेज में,

घर में तो अपनी बेटियों के साथ एकदम नॉर्मल रहने वाली रेखा जी यहाँ एकदम अलग ही रूप में रहती थीं, एकदम साहसी और खुद्दार अपने उसूलों पर चलने वाली ! इस वक्त वो अनाथालय के ऑफिस में थी और गुस्से में लाल थी ! वो अपने सामने खड़े वकील से बोली _"" मुझसे आप से ये उम्मीद नहीं थी वकील साहब आपने कहा था कि आप केस लड़ेंगे लेकिन कोर्ट जाने से पहले ही आपने हार मान ली ,या फिर बिक गए, बोलिये क्या जवाब है आप के पास ?"

उसपर वो वकील बस इतना ही बोला _"" आप को जो समझना है समझिए मैं कुछ नहीं कहूंगा"" बोलकर वो वहां से चला गया ! और रेखा जी बस उसे देखते रह गईं !

वही दूसरी तरफ एक बड़ी सी बिल्डिंग ,जिस पर लिखा था R S Enterprises....

वो बिल्डिंग के एक ऑफ़िस में, एक आदमी एक आलीशान चेयर पर बैठे किसी को ऑर्डर देते हुए बोला "सुयश, किसी भी तरह हमें वो लैंड चाहिए, अगर हमें वो नहीं मिली तो हमारा बहुत ही नुकसान हो जाएगा, कुछ भी करो, लेकिन वो लेकर रहो" बोलकर वो अपने लैपटॉप में कुछ करने लगा !

उसकी बात पर उसका असिस्टेंट सुयश बस सर झुकाये इतना बोला_"जी बॉस," बोलकर वो वहाँ से निकल गया !

और बाहर आकर अपने मन में बोला "इनको वो बच्चों की ख़ुशी से कोई फ़र्क नहीं पड़ता ,लेकिन क्या कर सकते हैं"" और वो कुछ सोचते हुए वहा से निकल गया!

वही वो ऑफिस के अंदर बैठा इंसान कुछ सोचते हुए मुस्कुराने लगा और किसी सोच में खो गया !

तो ये है कहानी के हीरो या कह सकते हैं विलन देव रॉय सेन, आयु 25, 6 फूट height , घने बाल, लाइट ब्राउन आँखें, परफेक्ट बॉडी शेप , पूरी तरह से दिखने में परफेक्ट, जिसके सामने कोई भी लड़की अपना दिल हारने को मजबूर हो जाए !

लेकिन कहते हैं ना, चीज़ें हमेशा हमारी सोच से विपरीत होती हैं! ठीक वैसा ही यहाँ था।

वही दूसरी तरफ,

कॉलेज में परीक्षा देने के बाद और कुछ टाइम फ्रेंड्स के साथ निकालने के बाद कावी, नंदिनी और उनके दोस्त अपने-अपने घर के लिए निकल गए।

अवंतिका नंदिनी के साथ उसी के घर आ गई, कल की परीक्षा की तैयारी के लिए। क्योंकि कल उनकी आखिरी परीक्षा थी, इसके बाद उनकी छुट्टियाँ शुरू होने वाली थीं। सब अपनी-अपनी तैयारी में थे क्योंकि इस वेकेशन में अवंतिका की शादी भी थी !

जिसमें सब जाने वाले थे, उसी हिसाब से तैयारी भी चल रही थी! लेकिन कावी की अपनी हि कुछ प्लानिंग चल रही थी !

शादी तो अवंतिका की होने वाली थी, लेकिन इस शादी में कावी के परिवार के साथ कुछ होने वाला था,जिसका अंदाज़ा लगाना मुश्किल था!

देव को क्या चाहिए और क्यू....?

क्या चल रहा है कावी के दिमाग में....?

आगे के लिए बने रहिए मेरे साथ......

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