You are my love - Chapter 3
3 ....dev nad kavi
ऑर्फ़नज में, रेखा जी डॉक्टर सौरव की बात को समझने की कोशिश कर रही थीं। ना जाने क्या होने वाला था, इसी कश्मकश में रेखा जी थीं!
सुयश ने एक बिल्डिंग के सामने कार रोकी। बिल्डिंग पर साफ़-साफ़ बड़े अक्षरों में लिखा था: "Roy sen pvt Ltd" सुयश बिल्डिंग के अंदर जाकर सीधा बॉस केबिन में गया और केबिन के सामने जाकर नॉक किया। अंदर से आवाज़ आई, "come in"
सुयश देव के सामने कुछ बोलता, उससे पहले ही देव बोला, "जवाब ना है।"
जिसे सुनकर सुयश ने एक बार फिर सर झुका दिया। एक बार फिर देव की आँखें लाल हो गईं। उसने अपना सर कुर्सी से टिका लिया।
"और बिना कुछ बोले सुयश को जाने का इशारा किया, और खुद से बोला, 'क्यों आखिर क्यों और कब तक ऐसे रहना होगा!' फिर अपनी आँखें खोलकर गुस्से में बोला, 'बस और नहीं! अब वक्त आ गया है अपना हक लेने का!'"
कावी और नंदिनी दोस्तों के साथ घूमने के लिए निकल गए। सबसे पहले सब साथ में मंदिर गए। गुरुवार होने की वजह से मंदिर में थोड़ी भीड़ थी, इसलिए सब अलग-अलग हो गए। अवंतिका और नंदिनी साथ में, और मान, निया और अमर एक साथ हो गए।
कावी अलग हो गई। सब एक-दूसरे को कॉल करके मंदिर के बाहर मिलने को बोले।
थोड़ी देर बाद कावी तो बाहर आई, लेकिन बाकी सब नहीं आए थे। इसलिए कावी सबका इंतज़ार करने लगी।
तभी सामने से एक लड़का आया। उसकी उम्र लगभग 25 साल थी, लाइट ब्राउन आँखें, कैज़ुअल लुक, बालों को सेट किया हुआ था। कावी भी उसे देखती ही रह गई।
"अचानक ही वो लड़का कावी को कमर से पकड़ लेता है और एक हाथ कावी की गर्दन पर रखता है, और उसे किस करने लगता है। कावी के भी हाथ उसके बालों में चलने लगते हैं, इस बात से अंजान कि अभी वो लोग कहाँ खड़े हैं! दोनों अपनी ही दुनिया में खोए हुए हैं!"
तभी देव के कान में सुयश की आवाज़ आई। देव को होश आया, और वह हल्का सा मुस्कुरा दिया। जी हाँ, यह कोई और नहीं, देव रॉय सेन ही था।
कुछ देर पहले देव किसी काम से मंदिर के पास किसी ऑफ़िस में आया था, और वापस जा रहा था, लेकिन कोई फ़ाइल शायद ऑफ़िस में रह गई थी, जिस वजह से सुयश को लेने भेजा था।
अचानक देव की नज़र मंदिर के पास खड़ी कावी पर गई, और उसके मुँह से "मिष्टी" शब्द निकला।
सुयश की आवाज़ से होश में आने पर उसके मुँह से एक बार फिर "मिष्टी!" निकला।
जिसे सुनकर सुयश ने देव की नज़रों का पीछा किया, तो कावी को वहाँ खड़ी पाया। थोड़ी देर में सब मंदिर के बाहर आए, और जाने लगे।
देव तब तक कावी को देखता रहा, जब तक वह चली नहीं गई। उसके बाद देव ने भी ड्राइवर को इशारा किया, और वह निकल गया।
मंदिर के बाद सब शॉपिंग के लिए गए। क्योंकि सबको अवंतिका की शादी में भी जाना था, दो दिन के बाद सबको निकलना था। इसलिए सब अपनी-अपनी शॉपिंग में लग गए। कावी और नंदिनी ने अपने लिए अनारकली ड्रेस ली, जिसका बैक नेक थोड़ा डीप था। निया ने अपने लिए पलाज़ो सेट लिया, अमर और मान ने अपने लिए इंडो-वेस्टर्न कुर्ता लिया।
अवंतिका ने अपने लिए कुछ नहीं लिया, क्योंकि उसकी शादी के कपड़ों की तैयारी पहले ही उसके घर वाले कर रहे थे। उसके लिए वह छोटी-छोटी चीज़ें ले रही थी। सबकी शॉपिंग हो गई थी, और सब थक भी गए थे, इसलिए सब खाने के लिए रेस्टोरेंट चले गए।
ऑफ़िस में, देव ऑफ़िस आकर लैपटॉप में काम करने लगा। तभी लैपटॉप पर एक वीडियो लगा।
वीडियो कुछ इस तरह का था: "मंदिर के बाहर कावी किसी का इंतज़ार कर रही है। उसने एक येलो कलर की शिफ़ॉन कुर्ती पहनी है, जिसमें सामने से कट था, with white plazo, कानों में छोटे-छोटे झुमके, पिंक लिपस्टिक, उसके लहराते हलके वेवी बाल, साइड स्लिंग बैग, माथे पर छोटी सी प्यारी बिंदी, और काजल वाली आँखें और सबसे प्यारी उसकी स्माइल। और फिर से देव का उसके पास जाकर उसके कमर पर हाथ रखकर उसके होंठों पर किस करना। जैसे-जैसे किस कर रहे थे, उनकी किस और गहरी होती जा रही थी!"
तभी फिर से दरवाज़े पर नॉक हुआ, और सुयश को अंदर देखकर देव बोला, "मीटिंग की तैयारी हो गई है?"
सुयश ने जवाब दिया, "हाँ बॉस, हो गई।"
देव फिर बोला, "ओके, 2 दिन के बाद सारी मीटिंग पोस्टपोन कर दो 5 दिनों के लिए!"
इस पर सुयश बोला, "ओके बॉस!"
इतना बोलकर देव सुयश के साथ मीटिंग के लिए निकल गया। मीटिंग होटल की गड़बड़ी को लेकर थी।
देव को देखकर सब अपनी जगह से खड़े हो गए। देव ने सबको बैठने का इशारा किया। सब बैठ गए, और सुयश को स्टार्ट करने का ऑर्डर दिया। और प्रोजेक्टर ऑन हुआ। जैसे-जैसे प्रोजेक्टर चल रहा था, रूम का माहौल अलग ही होता जा रहा था।
देव ने चिल्लाकर बोला, "everyone out!" सिवाय Mr. Varma के!
देव की एक आवाज़ में सब निकल गए। अब तो Mr. Varma को पसीना आना शुरू हो गया!
देव बोला, "तो अब आप क्या कहेंगे? मुझे नहीं लगता कि आप कुछ बोलेंगे इस वक्त!"
तभी Mr. Varma घबराते हुए बोले, "माफ़ कर दीजिए!"
देव बोला, "माफ़ी वो क्या होता है!"
इतना बोलकर देव ने सुयश को देखा। सुयश Mr. Varma को लेकर चला गया। काफ़ी वक्त से सुयश देव के साथ काम करता था, इसलिए सुयश देव की बातों को आसानी से समझ जाता था। कभी-कभी तो बिना कहे भी!
सुयश के जाते ही देव बोला, "सब जानते हुए भी लोग गलती कैसे कर देते हैं। I will show you my real face and I will make sure it is not good for you," बोलकर वह भी निकल गया।
क्या करने वाला है देव, यह कोई नहीं जानता, सिवाय सुयश के!
इधर कावी, नंदिनी, अवंतिका, मान, निया, अमर भी घर वापस आ गए थे। रात 9 बजे रेखा जी घर आ गई थीं। आज वह ठीक नहीं लग रही थीं। नंदिनी खाना बना रही थी, क्योंकि सब यहीं से खाकर जाने वाले थे। "कावी ने रेखा जी को पानी दिया और वह भी नंदिनी की मदद के लिए किचन में चली गई थी।"
क्योंकि रेखा जी को भी मान, निया, अवंतिका और अमर अपनी माँ की तरह मानते थे। सब शॉपिंग की हुई चीज़ें देख रहे थे। तभी रेखा जी की नज़र एक बैग पर गई, वह उसे देखने वाली थी। तभी किचन से कावी भागती हुई आई, और रेखा जी के हाथ से वह बैग ले लिया। सब अचानक कावी के ऐसा करने पर चौंक गए।
आखिर क्यों किया कावी ने ऐसा और क्या थी वजह? ........