Chapter 35
Obbsession of Kaynaat - Chapter 35
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तो भला वह किस तरह से इस स्थिति से निकल सकती थी? कहीं ना कहीं कायनात को कुछ भी समझ में नहीं आ रहा था। पहले तो वह केवल करण के व्यवहार, उसकी बातों को लेकर परेशान थी, लेकिन अब, दादा जी