पिशाच का जुनून - Chapter 164
कुलगुरु के कहने पर, उन्होंने संगीता को ओम ठाकुर के बराबर वाले कमरे में रहने का हुक्म दिया था। वहीं, कुलगुरु यह सोच रहे थे कि अगर संगीता ओम ठाकुर से दूर रहेगी और उसके सामने ज़्यादा नहीं आएगी, तो हो सकता है कि ओम ठाकुर उसे पूरी तरह भूल जाए, और उसके बारे में कुछ भी याद न रहे। यह सोचते हुए, कुलगुरु ने जमींदार साहब के दिलों-दिमाग में यह बात डाल दी थी कि उस लड़की को ओम ठाकुर के करीब मत फटकने देना; जितना हो सके, लड़की को और ओम ठाकुर को दूर रखना। जमींदार साहब ने कुलगुरु की बात मान ली थी।
संगीता ओम ठाकुर के बराबर वाले कमरे में तो आ गई थी, लेकिन उसके साथ जो कुछ हुआ था, उसे काफी अजीब लग रहा था। कहाँ तो उसे वैम्पायर का इस दुनिया से नामो-निशान मिटाना था; उन लोगों से लड़ना था जो वह काला कारनामा करना चाहते थे—पूरी दुनिया में इंसानों को खत्म करके वैम्पायर पैदा करना।
लेकिन कहाँ, वह माँ बनने वाली थी! संगीता को काफी हैरानी हो रही थी। तब संगीता ने अपने कमरे को अच्छी तरह से सँवारकर, वह बेड पर बैठ गई थी। और अचानक वह ध्यान की मुद्रा में पहुँच गई थी क्योंकि कहीं न कहीं संगीता यह पता लगाना चाहती थी कि कहीं उसके साथ अब कुछ गलत तो नहीं होने वाला है, या फिर कहीं गुरुकुल गुरु कुछ और तरह का षड्यंत्र तो नहीं रच रहे हैं।
जैसे ही संगीता ध्यान में बैठी, अचानक से उसकी आँखों के सामने एक दृश्य उभरा। उस दृश्य में संगीता ने देखा कि ओम ठाकुर कई भेड़ियों से घिरा हुआ है। इतना ही नहीं, एक भेड़िये ने अचानक ओम ठाकुर पर हमला कर दिया था। संगीता पीछे से जोरों से चिल्ला रही थी। जैसे ही संगीता ने यह देखा, उसकी आँखें एकदम से खुल गई थीं, और वह काफी हैरान हो गई थी। भेड़िये का ख्याल आते ही सबसे पहले उसे राज का ख्याल आया था।
साथ ही, संगीता को इस बात की चिंता सताने लगी थी कि अगर वह यहाँ इस हवेली में रहेगी, तो उसके माता-पिता राज के साथ अकेले रह जाएँगे। और राज एक भेड़िया है, तो इससे उसके माता-पिता की जान पर खतरा हो सकता था। संगीता को समझ में नहीं आ रहा था कि वह अब क्या करे, लेकिन उसे कुछ न कुछ तो करना ही था। इसीलिए संगीता ने मन ही मन में छोटी से बात करने का निर्णय लिया था।
Unlock this chapter with 5 diamonds to continue reading.