पिशाच का जुनून Ch. 1

पिशाच का जुनून - Chapter 1

Posted by Shayna choudhary • Jan 06, 2025 05:47 PM

((ओम का वहशीपन))

रात का आखिरी पहर चल रहा था। इंग्लैंड के घने जंगल, शेरवुड फ़ॉरेस्ट (Sherwood Forest) के बीचों-बीच बने एक आउटहाउस के बाहर तीन लोग खड़े हुए थे, सिगरेट का कश ले रहे थे।

उनमें से एक ने कहा, "आज ये ओम को हो क्या गया है? एक लड़की को मसलने में इतना टाइम क्यों लगा रहा है?"

दूसरे ने कहा, "अरे यार, तू तो जानता है ना ये हमारा ओम एक नंबर का उसूल वाला है। वो लड़की की मर्ज़ी के बिना उसे हाथ नहीं लगाएगा।"

तीसरे दोस्त ने कहा, "यार, अब बहुत देर हो गई है। मुझसे तो अब रुका नहीं जा रहा है। मैं जा रहा हूँ उसे देखने। आखिर प्रॉब्लम क्या है? उसे इतना टाइम क्यों लग रहा है?"

"हाँ यार, ये सही कह रहा है। हमें जाकर देखना होगा। आखिर कारण क्या है? लड़की की हॉट वॉइस तक सुनाई क्यों नहीं दी?"

अचानक आसमान काले बादलों से घिर गया और अजीब से जानवरों की आवाज़ सुनाई देने लगी। उन तीनों में से एक दोस्त ने कहा, "By the way, यार, आज कौन सी रात है?"

दूसरा दोस्त अपने माथे पर हाथ मारते हुए बोला, "ओह शीट! मर गए! आज तो अमावस्या की काली रात है! और आज तो ओम, ओम न होकर..."

उसने इतना ही कहा था कि तीनों दोस्तों ने एक-दूसरे की तरफ़ देखा और भागकर अंदर बंगले की ओर दौड़े।

वहाँ जाकर उन्होंने देखा, एक बड़ी ही खूबसूरत अर्ध-नग्न लड़की खून में लथपथ पड़ी हुई थी, और उसके पास ही अपनी चमक रही आँखें और नुकीले लंबे दांत लिए ओम ठाकुर बैठा हुआ था।

ओम ठाकुर कोई आम इंसान नहीं था। वह एक शाप से अभिशापित था। हर अमावस्या को वह एक आम इंसान न होकर एक भयानक वैम्पायर बन जाता था, जो किसी भी आम इंसान के लिए खतरा था।

उसने उस लड़की के कंधों पर दांत गाड़ दिए थे और उसके जिस्म की एक-एक बूँद पानी की तरह पी गया था। ओम का वहशीपन देखकर वह तीनों दोस्त बुरी तरह से काँप गए थे, लेकिन फिर...

तीनों दोस्तों ने हिम्मत करके ओम को उठाया और उसे एक हरे रंग की दीवारों वाले कमरे में ले गए और उसे शांत कराने की कोशिश करने लगे। उसके बाद उन्होंने उस बेजान पड़ी लड़की की लाश को उठाया और घने जंगल में गाड़ने के लिए गड्ढा खोदने लगे थे।

उस लड़की को गाड़ते वक्त एक दोस्त बोला, "यार, कितनी मुश्किलों से इस खूबसूरत बला को मैं यहाँ लेकर आया था। सोचा था चारों दोस्त यूनिवर्सिटी की इन तीन दिनों की छुट्टियों को और मज़ेदार बनाएँगे। लेकिन उस ओम ने एक बार फिर एक और लड़की की जान ले ली। ना तो वो खुद लड़कियों के साथ कुछ करता है और ना ही हमें करने देता है। पिछली सत्रह लड़कियों की तरह वो इसके जिस्म का भी खून पी गया। इससे अच्छा होता कम से कम हम तीनों इसके साथ कुछ मस्ती तो कर लेते। पूरे पचास हज़ार डॉलर में खरीदा था मैंने इसे!"

ऐसा कहकर एक दोस्त झूठ-मूठ का रोना रोता हुआ उस लड़की को उस घने जंगल में गाड़ने लगा।

वहीं दूसरी ओर, भारत के एक छोटे से गाँव में, स्कूल की घंटी बज गई थी। सभी बच्चे शोर मचाते हुए बाहर की ओर भागे। इतने में बूढ़े हो चुके मास्टर दीनानाथ जी फिसल कर गिर गए। कुछ बच्चों और अध्यापकों की नज़र उन पर पड़ी और वे मास्टर जी को उठाने के लिए आगे बढ़े और उनकी मदद करने लगे।

मास्टर जी की पूरे गाँव भर में बहुत इज़्ज़त थी। हर कोई उन्हें सम्मान की नज़रों से देखता था। एक अकेले मास्टर जी ने दिन-रात मेहनत करके अपने गाँव में एक छोटा सा स्कूल, सड़कें, पानी और भी बहुत कुछ काम करवाए थे, और ना जाने कितने गरीब बच्चों को मुफ्त शिक्षा दी थी। कुछ लोग उनसे शिक्षा पाकर शहर चले गए थे नौकरी करने के लिए। मास्टर जी के परिवार में उनकी पत्नी सारदा और उनकी बेटी संगीता थीं।

संगीता को संगीत से बहुत प्यार था। सुरीली आवाज़ के साथ ही साथ उसे एक आशीर्वाद प्राप्त था। वो जब भी गाती थी, तब आस-पास के सभी पशु-पक्षी मोहित होकर नाचने लगते थे। जब वह छोटी थी, तब उनके यहाँ एक ऋषि-मुनि आए थे। तब संगीता और उसकी माँ ने उनकी बहुत सेवा की थी। हर रोज़ की तरह जब देवी माँ की पूजा करते वक्त छोटी सी संगीता ने अपनी मधुर आवाज़ में प्रार्थना की, तब मुनि जी उसके स्वर से बेहद प्रभावित हुए और उन्होंने उसको आशीर्वाद दिया कि जब भी तुम अपने दिल से गाओगी, तब जो कोई भी तुम्हारा संगीत सुनेगा, उसके सारे दुख-दर्द, परेशानी सब खत्म हो जाएँगे, और पशु-पक्षी मोहित होकर तुम्हारे सामने नाचने लगेंगे।

ऐसा कहकर वे चले गए, लेकिन उसने और उसकी माँ ने इस बात पर ज़्यादा ध्यान नहीं दिया था। समय के साथ-साथ संगीता बड़ी हो गई थी। संगीता अब बेहद खूबसूरत और आकर्षक युवती थी। वह हर काम दिल से करती थी।

धीरे-धीरे संगीता को अपने स्वर की ताकत का अंदाज़ा हो गया था। जब भी वो दिल से गाती, हर सुनने वालों की तकलीफ़-परेशानी खत्म हो जाती और पशु-पक्षी झूमने लगते। धीरे-धीरे यह बात चारों ओर आग की तरह फैल गई थी। हर कोई संगीता से गाना सुनना चाहता था, लेकिन वह हर समय हर किसी के लिए नहीं गा सकती थी। सब लोग उसे जादुई आवाज़ वाली लड़की कहकर बुलाते थे।

संगीता की प्रसिद्धि सुनकर एक बार पास के ज़मींदार साहब उनके घर आए, अपने बेटे का रिश्ता लेकर। लेकिन मास्टर जी उनके आने की मंशा अच्छी तरह से जानते थे। उन्होंने अभी के लिए रिश्ते की बात टाल दी थी, जिससे ज़मींदार को बहुत बुरा लगा था। ज़मींदार ने अगले दिन मास्टर जी को बुलाया और मास्टर जी को अच्छे से समझा दिया था कि उनकी बेटी उसी की बहू बनेगी, ये बात अच्छे से अपने दिलो-दिमाग में बैठा लो। ज़मींदार ने सीधे-सीधे धमकी दी थी। ज़मींदार का बेटा कोई और नहीं, बल्कि ओम ठाकुर था, जो इस वक्त इंग्लैंड की मशहूर यूनिवर्सिटी, ........में पढ़ने के लिए गया हुआ था।

दोस्तों, अपने प्यारे-प्यारे कॉमेंट कीजिए। प्लीज़, आई एम वेटिंग।

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