love Arranged Marriage
पीर पराई!
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नवंबर का आख़िरी सप्ताह । हल्के कोहरे से ढका सारा शहर काफ़ी खूबसूरत लग रहा था। एक घर की छत वाली सीढ़ियों पर बैठी एक लड़की , जिसके चेहरे पर उदासी साफ़ देखी जा सकतीं है । तभी उसकी आंखो से आंसू छलक कर गालों तक लुढ़क चुके थे। उसने खुद को अपनी बाहों में ही समेटा ...
नवंबर का आख़िरी सप्ताह । हल्के कोहरे से ढका सारा शहर काफ़ी खूबसूरत लग रहा था। एक घर की छत वाली सीढ़ियों पर बैठी एक लड़की , जिसके चेहरे पर उदासी साफ़ देखी जा सकतीं है । तभी उसकी आंखो से आंसू छलक कर गालों तक लुढ़क चुके थे। उसने खुद को अपनी बाहों में ही समेटा हुआ था। नीले रंग की बनारसी साड़ी इस वक्त उसके वजूद पर लिपटी हुई थी। मेंहदी वाले हाथ , उसकी नाज़ुक सी कलाईयों पर मौजूद लाल रंग का चूड़ा। जिसके आगे दो सोने के कंगन भी चमक रहे थे। गले में पहना हल्के सोने का हार और उसके साथ ही उसके गले में मौजूद मंगल सूत्र। मांग से भरा पिछे तक सिंदूर जो उसे सुहागन स्त्री होने का दर्जा दे रहा था।
एक तेज हवा का झोका उसके शरीर को छू कर गुज़रा तो वह सिहरन के साथ खुद में ही सिमट गई। जिस्म पर साड़ी के अलावा उसने कोई स्वेटर या फिर शॉल नहीं लिया हुआ था। उसने मुड़ कर कमरे की तरफ देखा जिसका दरवाजा बंद था इस वक्त। यह देख कर उसका कलेजा फट कर आ रहा था। उसे बहुत रोना आ रहा था। वो चिल्ला - चिल्ला कर रोना चाहती थी मगर दो दिन की दुल्हन को यह बात शोभा देती है यह सोच कर उसने साड़ी के पल्लू को मुंह पर दबा लिया और बिना आवाज़ किए रोने लगी। उसे जैसे कुछ याद आया।
" भूमि कहां है । मुझे उससे मिलना है । प्लीज कोई भूमि को बुला दो। " एक लड़के की भर्राई आवाज़ उस पूरे माहौल को शांत कर गई थी।
एक तेज हवा का झोका उसके शरीर को छू कर गुज़रा तो वह सिहरन के साथ खुद में ही सिमट गई। जिस्म पर साड़ी के अलावा उसने कोई स्वेटर या फिर शॉल नहीं लिया हुआ था। उसने मुड़ कर कमरे की तरफ देखा जिसका दरवाजा बंद था इस वक्त। यह देख कर उसका कलेजा फट कर आ रहा था। उसे बहुत रोना आ रहा था। वो चिल्ला - चिल्ला कर रोना चाहती थी मगर दो दिन की दुल्हन को यह बात शोभा देती है यह सोच कर उसने साड़ी के पल्लू को मुंह पर दबा लिया और बिना आवाज़ किए रोने लगी। उसे जैसे कुछ याद आया।
" भूमि कहां है । मुझे उससे मिलना है । प्लीज कोई भूमि को बुला दो। " एक लड़के की भर्राई आवाज़ उस पूरे माहौल को शांत कर गई थी।
Chapter
136
Words
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Updated
7 hrs ago
Published
Mar 14, 2026
Published Chapters
पीर पराई! - Chapter 1
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नवंबर का आख़िरी सप्ताह । हल्के कोहरे से ढका सारा शहर काफ़ी खूबसूरत लग रहा था। एक घर की छत वाली सीढ़ियों पर बैठी एक लड़की , जिसके चेहरे पर उदासी साफ़ देखी जा सकतीं है । तभी उसकी आंखो से आंसू छलक कर गालों तक लुढ़क चुके थे। उसने खुद को अपनी बाहों में ही समेटा हुआ था। नीले रंग की बनारसी साड़ी इस वक्त उसके वजूद पर लिपटी हुई थी। मेंहदी वाले हाथ , उसकी नाज़ुक सी कलाईयों पर मौजूद लाल रंग का चूड़ा। जिसके आगे दो सोने के कंगन भी चमक रहे थे। गले में पहना हल्के सोने का हार और उसके साथ ही उसके गले में मौजूद मंगल सूत्र। मांग से भरा पिछे तक सिंदूर जो उसे सुहागन स्त्री होने का दर्जा दे रहा था।
एक तेज हवा का झोका उसके शरीर को छू कर गुज़रा तो वह सिहरन के साथ खुद में ही सिमट गई। जिस्म पर साड़ी के अलावा उसने कोई स्वेटर या फिर शॉल नहीं लिया हुआ था। उसने मुड़ कर कमरे की तरफ देखा जिसका दरवाजा बंद था इस वक्त। यह देख कर उसका कलेजा फट कर आ रहा था। उसे बहुत रोना आ रहा था। वो चिल्ला - चिल्ला कर रोना चाहती थी मगर दो दिन की दुल्हन को यह बात शोभा देती है यह सोच कर उसने साड़ी के पल्लू को मुंह पर दबा लिया और बिना आवाज़ किए रोने लगी। उसे जैसे कुछ याद आया।
" भूमि कहां है । मुझे उससे मिलना है । प्लीज कोई भूमि को बुला दो। " एक लड़के की भर्राई आवाज़ उस पूरे माहौल को शांत कर गई थी।
एक तेज हवा का झोका उसके शरीर को छू कर गुज़रा तो वह सिहरन के साथ खुद में ही सिमट गई। जिस्म पर साड़ी के अलावा उसने कोई स्वेटर या फिर शॉल नहीं लिया हुआ था। उसने मुड़ कर कमरे की तरफ देखा जिसका दरवाजा बंद था इस वक्त। यह देख कर उसका कलेजा फट कर आ रहा था। उसे बहुत रोना आ रहा था। वो चिल्ला - चिल्ला कर रोना चाहती थी मगर दो दिन की दुल्हन को यह बात शोभा देती है यह सोच कर उसने साड़ी के पल्लू को मुंह पर दबा लिया और बिना आवाज़ किए रोने लगी। उसे जैसे कुछ याद आया।
" भूमि कहां है । मुझे उससे मिलना है । प्लीज कोई भूमि को बुला दो। " एक लड़के की भर्राई आवाज़ उस पूरे माहौल को शांत कर गई थी।
Soniya Kishori
पीर पराई! - Chapter 135 • 2 months ago
Soniya Kishori
पीर पराई! - Chapter 134 • 2 months ago
Soniya Kishori
पीर पराई! - Chapter 133 • 2 months ago
Soniya Kishori
2 months ago
very very nice story 👌
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Soniya Kishori
2 months ago
very very very nice story 👌
0 likes • पीर पराई! - Chapter 133No fan art available for this story yet.
very very very nice story 👌
0 likes • पीर पराई! - Chapter 135