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प्रेम बंधन
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प्रेम बंधन

By Sarvam Ongoing
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संध्या का समय था जब पहाड़ी पर स्थित कुलदेवी के मंदिर के सामने ही युद्ध हो रहा था। कुछ काले वस्त्र धारण किए हुए सैनिक राजसी सैनिकों पर आक्रमण कर रहे थे। राजसी सैनिक अपने प्राणों को दांव पर लगाते हुए अपने राजकुमार की रक्षा का प्रयास कर रहे थे। राजकुमार की आयु...
Chapter 66
Words 85.1K
Updated 2 months ago
Published Jun 20, 2025
Published Chapters
प्रेम बंधन - Chapter 1 Free
Jun 20, 2025 36 Read
प्रेम बंधन - Chapter 2 Free
Jun 20, 2025 20 Read
प्रेम बंधन - Chapter 3 Free
Jun 20, 2025 17 Read
प्रेम बंधन - Chapter 4 Free
Jun 20, 2025 15 Read
प्रेम बंधन - Chapter 5 Free
Jun 20, 2025 15 Read
प्रेम बंधन - Chapter 6 Free
Jun 20, 2025 12 Read
प्रेम बंधन - Chapter 7 Free
Jun 20, 2025 11 Read
प्रेम बंधन - Chapter 8 Free
Jun 20, 2025 10 Read
प्रेम बंधन - Chapter 9 Free
Jun 20, 2025 10 Read
प्रेम बंधन - Chapter 10 Free
Jun 20, 2025 8 Read
प्रेम बंधन - Chapter 11 Free
Jun 20, 2025 8 Read
प्रेम बंधन - Chapter 12 Free
Jun 20, 2025 8 Read
प्रेम बंधन - Chapter 13 Free
Jun 20, 2025 8 Read
प्रेम बंधन - Chapter 14 Free
Jun 20, 2025 8 Read
प्रेम बंधन - Chapter 15 Free
Jun 20, 2025 7 Read
प्रेम बंधन - Chapter 16 Free
Jun 20, 2025 7 Read
प्रेम बंधन - Chapter 17 Free
Jun 20, 2025 7 Read
प्रेम बंधन - Chapter 18 Free
Jun 20, 2025 7 Read
प्रेम बंधन - Chapter 19 Free
Jun 20, 2025 7 Read
प्रेम बंधन - Chapter 20 Free
Jun 20, 2025 8 Read
प्रेम बंधन - Chapter 21 Free
Jun 20, 2025 8 Read
प्रेम बंधन - Chapter 22 Free
Jun 20, 2025 7 Read
प्रेम बंधन - Chapter 23 Free
Jun 20, 2025 6 Read
प्रेम बंधन - Chapter 24 Free
Jun 20, 2025 6 Read
प्रेम बंधन - Chapter 25 Free
Jun 20, 2025 6 Read
प्रेम बंधन - Chapter 26 Free
Jun 20, 2025 6 Read
प्रेम बंधन - Chapter 27 Free
Jun 20, 2025 6 Read
प्रेम बंधन - Chapter 28 Free
Jun 20, 2025 6 Read
प्रेम बंधन - Chapter 29 Free
Jun 20, 2025 6 Read
प्रेम बंधन - Chapter 30 Free
Jun 20, 2025 6 Read
प्रेम बंधन - Chapter 31 Free
Jun 20, 2025 6 Read
प्रेम बंधन - Chapter 32 Free
Jun 20, 2025 6 Read
प्रेम बंधन - Chapter 33 Free
Jun 20, 2025 6 Read
प्रेम बंधन - Chapter 34 Free
Jun 20, 2025 6 Read
प्रेम बंधन - Chapter 35 Free
Jun 20, 2025 6 Read
प्रेम बंधन - Chapter 36 Free
Jun 20, 2025 6 Read
प्रेम बंधन - Chapter 37 Free
Jun 20, 2025 6 Read
प्रेम बंधन - Chapter 38 Free
Jun 20, 2025 6 Read
प्रेम बंधन - Chapter 39 Free
Jun 20, 2025 6 Read
प्रेम बंधन - Chapter 40 Free
Jun 20, 2025 6 Read
संध्या का समय था जब पहाड़ी पर स्थित कुलदेवी के मंदिर के सामने ही युद्ध हो रहा था। कुछ काले वस्त्र धारण किए हुए सैनिक राजसी सैनिकों पर आक्रमण कर रहे थे। राजसी सैनिक अपने प्राणों को दांव पर लगाते हुए अपने राजकुमार की रक्षा का प्रयास कर रहे थे। राजकुमार की आयु केवल तेरह वर्ष थी, फिर भी उसका पूरा प्रयास था कि उसे किसी की सुरक्षा की आवश्यकता न हो। युद्ध में मृत्यु का वरण करते अपने सैनिकों को देखकर उसका रक्त खौल रहा था। उसने अपने हाथों में शस्त्र को कसकर पकड़ रखा था, उसकी तलवार रक्त से रंजित थी। उसी समय आकाश में बिजली कड़क उठी और वर्षा की बूँदें गिरना आरंभ हो गईं। अचानक ही पीछे से एक काले वस्त्र धारी सैनिक आगे बढ़ा और उसने राजकुमार की पीठ पर वार कर दिया। पहले से घायल महाराज ने त्वरित गति से राजकुमार को अपने समीप खींच लिया और उस सैनिक का शीश धड़ से अलग कर दिया। परंतु इस बीच राजकुमार की पीठ पर एक गहरा घाव हो चुका था। उसके मुख से दर्द भरी कराह निकल पड़ी। "राजकुमार!" महाराज ने चिंतित स्वर में पुकारा। "हम ठीक हैं पिताश्री। आप अपने कार्य पर ध्यान दें।" राजकुमार ने दर्द के कारण अपनी आंखें भींच ली थीं। आधार के लिए उसने अपनी तलवार को भूमि पर टिका दिया, ताकि स्वयं को खड़ा रख सके। महाराज ने कुछ क्षण उसे देखा और तत्पश्चात सेनापति के पुत्र को आदेश दिया, "तिलक, राजकुमार को शीघ्र गांव तक लेकर जाइए। वहाँ आपको सहायता प्राप्त होगी। और ध्यान रहे, हमारे पश्चात राजकुमार की सुरक्षा का उत्तरदायित्व आपका होगा। हम आपको राजकुमार के लिए अगला सेनापति नियुक्त करते हैं।" तिलक की आंखें विस्मय से फैल गईं, परंतु अगले ही क्षण वह घुटनों पर बैठ गया और हाथ की मुट्ठी बनाकर अपने सीने से लगा ली, "आपके आदेश का पालन हम अंतिम श्वास तक करेंगे, महाराज।" राजकुमार ने भी आश्चर्य से महाराज को देखा। कहीं न कहीं वह समझ चुका था कि महाराज का यहाँ से जीवित बच निकलना कठिन प्रतीत हो रहा था। "आप हम तक पहुंचने का प्रयास करेंगे पिताश्री। वचन दीजिए।" राजकुमार ने महाराज का हाथ कसकर पकड़ लिया। उसे ज्ञात था कि महाराज अपने आदेश को किसी भी स्थिति में नहीं बदलते। "वैष्णव प्रताप राजवंशी, आपको हमारे बाद दुर्बल नहीं पड़ना है। आप मिथिला प्रदेश के भावी महाराज हैं। समझ गए?" महाराज की आवाज गंभीर और दृढ़ थी। राजकुमार वैष्णव ने ऊँचे स्वर में उत्तर दिया, "हमें स्वीकार है, महाराज!" महाराज की आँखें कुछ क्षणों के लिए कोमल हो गईं। उन्होंने हल्के से वैष्णव के सिर पर हाथ फेरा और तिलक को राजकुमार को ले जाने का संकेत दिया। तिलक अपने अश्व के साथ राजकुमार के निकट पहुंचा। उसने राजकुमार को अपने साथ बिठाकर दोनों को एक कपड़े से कसकर बाँध लिया। तिलक के पिता ने भी अपनी पलकें झपकाकर वचन लिया कि वह भी राजकुमार की सुरक्षा में उसी तरह तत्पर रहेगा। एक छोटी सी सैन्य टुकड़ी के साथ तिलक राजकुमार को लेकर वहाँ से निकल पड़ा।
Anisha
★★★★★
प्रेम बंधन - Chapter 65 • 4 months ago
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★★★★★
प्रेम बंधन - Chapter 64 • 5 months ago
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