बेबाक सिमरन का दीवानापन - Chapter 1
सुबह की पहली सुनहरी किरण जैसे ही खिडकी के कांच से छनकर कमरे में आई, सिमरन की आंखें झटके से खुल गईं. अलार्म बजने से पहले ही उसकी नींद टूट चुकी थी. आज अठारह अगस्त का दिन था—उसका अठारहवां जन्मदिन. लेकिन आज की सुबह सिर्फ एक जन्मदिन की सुबह नहीं थी; आज जिंदगी का एक नया पन्ना पलटने वाला था. आज उसका Collage में पहला दिन था, और उससे भी बडी बात यह थी कि आज सालों बाद वह अपने बचपन के' पति' अर्जुन से मिलने वाली थी.
सिमरन झटके से बिस्तर से उठी और सीधे कमरे में लगे आदमकद आईने के सामने जा खडी हुई. गालों पर गुलाबी रंगत, होंठों पर एक नटखट और चुलबुली मुस्कान, और आंखों में शरारत का वही पुराना समंदर था. अठारह साल की सिमरन का रूप अब ढल चुका था, पर उसकी मासूमियत और बेबाकी में रत्ती भर भी कमी नहीं आई थी.
बचपन के वो दिन उसकी आंखों के सामने तैरने लगे जब गुड्डे- गुडियों का खेल खेलते- खेलते अर्जुन ने उसके गले में एक नकली माला डालकर उसे अपनी' पत्नी' कहा था. अर्जुन के लिए शायद वह बच्चों का एक बेपरवाह खेल रहा होगा, लेकिन सिमरन के मासूम और जिद्दी दिल ने उस बात को हमेशा सच मानकर संजोया था. फिर अर्जुन का परिवार शहर छोडकर चला गया और दोनों के बीच दूरियां आ गईं. लेकिन आज, किस्मत ने उन्हें फिर से एक ही मोड पर लाकर खडा कर दिया था. अर्जुन भी उसी Collage में था, और सिमरन आज उससे मिलने के लिए बेताब थी.
उसके मन में शरारत का एक नया तूफान उठ रहा था. वह जानती थी कि वह आम लडकियों की तरह सीधे- सादे कपडों में Collage जाकर अर्जुन से नहीं मिलेगी. वह अपने बेबाक और चुलबुले अंदाज से अर्जुन के होश उडा देना चाहती थी.
उसने अलमारी खोली और बिना किसी हिचकिचाहट के सिर्फ अपनी पसंदीदा स्टाइलिश ब्रा और थ्रोंग निकाली. आईने के सामने खडे होकर जब उसने खुद को देखा, तो उसकी अपनी ही नटखट अदा पर हल्की सी लाली छा गई, लेकिन फिर उसने एक शरारती मुस्कान बिखेरी. उसकी चाल में गजब का आत्मविश्वास और बेफिक्री थी.
आज अर्जुन तुम्हें देखकर दंग रह जाएगा, उसने आईने में देखकर खुद से कहा और अपना बैग उठाकर कमरे से बाहर निकल पडी.
सडक पर ठंडी हवा चल रही थी. सूरज की किरणें उस पर पड रही थीं, और सिमरन अपनी ही धुन में, ब्रा और थ्रोंग पहने, बिना किसी झिझक के सीधे Collage कैंपस की ओर कदम बढाने लगी. हर कदम के साथ उसके दिल की धडकनें तेज हो रही थीं, और दिमाग में सिर्फ एक ही नाम गूंज रहा था—अर्जुन.
अध्याय दो: कैंपस में कदम और बेफिक्र रफ्तार
कमरे से बाहर निकलते ही ताजी हवा का झोंका सिमरन के **** को छू गया. वह पूरी बेफिक्री के साथ सडक पर कदम बढा रही थी. जैसे- जैसे उसकी चाल तेज होती, उसके हर एक मूव के साथ उसके **** आपस में टकराकर हिल रहे थे, वहीं थ्रोंग से उसके नंगे नितंब चाल की ताल पर दाएं और बाएं ओर मूव कर रहे थे. उसकी इस चाल में गजब का आत्मविश्वास और एक अजीब सी बेबाकी थी.
कुछ ही देर में वह Collage के उस विशाल और आलीशान मुख्य द्वार पर पहुंच गई. लेकिन Collage तो बोल्ड ड्रेस वाली लडकियों का था; वहां पहले से ही एक से बढकर एक रिवीलिंग ड्रेसेस पहने लडकियां घूम रही थीं. इसीलिए स्टूडेंट्स ने सिमरन की ओर ज्यादा ध्यान नहीं दिया. यह माहौल उसके लिए किसी आजादी से कम नहीं था—न कोई टोकने वाला था, न कोई अजीब नजरों से घूरने वाला.
सिमरन ने राहत की सांस ली और उसके चेहरे पर वही चिर- परिचित नटखट मुस्कान वापस आ गई. उसकी शरारती आंखें अब कैंपस की हर गली, हर कैंटीन और हर कॉरिडोर को खंगालने लगीं. वह मन ही मन अपनी उस पुरानी याद को दोहरा रही थी, जो सालों से उसके दिल में दबी थी.
बस कुछ ही देर और अर्जुन. तुम्हारी पत्नी आ गई है, उसने खुद से फुसफुसाया.
कैंपस के बीचों- बीच बने विशाल बरगद के पेड की घनी छांव में कई छात्र झुंड बनाकर बैठे थे. सिमरन की चाल थोडी तेज हुई, क्योंकि उसके दिल की धडकनें चिल्ला- चिल्लाकर कह रही थीं कि जिस चेहरे की तलाश उसे अपने इस अठारहवें साल के पहले दिन थी, वह यहीं कहीं आसपास ही है.
अध्याय तीन: बेफिक्र मुलाकात और तलाश
बरगद के पेड के पास खडे छात्रों के झुंड के बीच सिमरन अचानक रुक गई. उसकी नटखट और चुलबुली नीयत को जैसे शरारत का एक नया बहाना मिल गया था. वहीं बेंच पर Collage का सबसे अय्याश और रईस लडका रॉकी बैठा था, जो हर लडकी को महज एक खिलौना समझता था. सिमरन ने बिना एक पल सोचे, अपनी उसी चुलबुली और बेबाक चाल के साथ कदम बढाए और सीधे रॉकी की गोद में जाकर बैठ गई.
रॉकी सिमरन की इस अल्हड खूबसूरती, उसकी बेफिक्री और इतने बोल्ड अंदाज को देखकर एक पल के लिए दंग रह गया. लेकिन अगले ही पल, उसके चेहरे पर एक कुटिल मुस्कान आई और उसने अपनी बाहों को कसते हुए सिमरन को अपने घेरे में भर लिया.
सिमरन को रॉकी की नीयत या उसकी अय्याश छवि से कोई फर्क नहीं पड रहा था; उसके सिर पर तो बस अर्जुन को ढूंढने का भूत सवार था. वह रॉकी की बाहों से पूरी तरह लिपट गई और अपना sir सहजता से उसके कंधे पर टिका दिया. रॉकी के गले से लिपटे- लिपटे ही उसकी नटखट आंखें दाएं और बाएं ओर घूमती रहीं. वह रॉकी की गोद में मचलते हुए पूरे कैंपस की भीड में सिर्फ एक ही चेहरा खोज रही थी—अपना बचपन का पति, अर्जुन.
रॉकी उसे सहलाते हुए अपने मन में कुछ और ही मंसूबे बना रहा था, लेकिन सिमरन का ध्यान तो पूरी तरह भटक चुका था. हर गुजरते चेहरे के साथ उसकी बेताबी बढती जा रही थी. तभी, कुछ दूरी पर किताबों का बैग कंधे पर टांगे अर्जुन गलियारे की ओर से आता दिखाई दिया.
अध्याय चार: महफिल की हलचल और नटखट अदा
रॉकी का हाथ सिमरन की ब्रा के हुक पर गया और एक ही झटके में उसने ब्रा उतारकर पास की बेंच पर एक किनारे रख दिया. सिमरन के नंगे **** अब पूरी तरह हवा में थे, लेकिन उसकी बेफिक्री और अल्हडपन में जरा भी कमी नहीं आई. वह घबराने या शर्माने के बजाय अपनी खिलखिलाती हुई आवाज में हंस पडी.
उसने रॉकी की ओर अपनी शरारती आँखें उठाईं और बेहद चुलबुले अंदाज में उसकी ठोडी को छूते हुए बोली, जानू, तुस्सी बडे नॉटी हो!
उसकी यह बात सुनते ही आसपास खडे सारे स्टूडेंट्स का ठहाका गूँज उठा. माहौल में अजीब सी मस्ती और शरारत छा गई. रॉकी भी सिमरन की इस बेबाक प्रतिक्रिया पर फिदा होकर जोर- जोर से हंसने लगा.
सिमरन अभी भी रॉकी की बाहों में लिपटी हुई, उसी की गोद में बैठी दाएं- बाएं मचल रही थी. ****ों पर कोई पर्दा न होने के बावजूद उसका ध्यान सिर्फ इस बात पर था कि वह भीड में अर्जुन को कैसे ढूंढे. वह रॉकी के कंधे पर sir टिकाकर हंसती रही, पर उसकी निगाहें हर आते- जाते चेहरे पर टिकी थीं.
तभी, गलियारे के मोड से अर्जुन ठीक उसी दिशा में कदम बढाते हुए आगे बढ रहा था.
अध्याय पाँच: अनजानी तलाश और बेफिक्र चाल
रॉकी के हाथ धीरे- धीरे सिमरन के नंगे कंधों से फिसलते हुए उसकी पतली कमर तक आने लगे. वह सिमरन की बेबाकी का पूरा फायदा उठाते हुए उसे बेहद नजदीकी से सहला रहा था. लेकिन सिमरन को इन सब बातों की रत्ती भर भी परवाह नहीं थी. वह तो रॉकी की गोद में वैसे ही मचलती रही, जैसे कोई नटखट बच्ची झूले पर झूल रही हो.
उसकी शरारती और चुलबुली नजरें लगातार आसपास जमा भीड के चेहरों को टटोल रही थीं. सबसे दिलचस्प बात तो यह थी कि सिमरन खुद अर्जुन का चेहरा ठीक से पहचानती तक नहीं थी! बचपन की वे धुंधली यादें और गुड्डे- गुडियों का खेल ही उसके पास अर्जुन की एकमात्र पहचान थे. सालों बीत चुके थे, और वह यह भी नहीं जानती थी कि अठारह साल का अर्जुन अब दिखता कैसा होगा. फिर भी, उसके मासूम और जिद्दी दिल को पूरा यकीन था कि जैसे ही वह अर्जुन को देखेगी, उसका दिल खुद- ब- खुद गवाही दे देगा.
रॉकी सिमरन को अपनी बाहों में कसकर सहलाता जा रहा था और सिमरन उसकी गोद में दाएं- बाएं घूमकर मचलते हुए हर लंबे लडके को गौर से देख रही थी.
तभी, सामने वाले गलियारे से एक शांत और संजीदा सा लडका कंधे पर बैग टांगे उसी ओर कदम बढाने लगा. उसकी चाल में एक अलग ही सादगी थी, जो कैंपस के इस शोर- शराबे से बिल्कुल अलग थी. सिमरन की नजरें उस लडके पर जाकर अचानक ठहर गईं, और उसका दिल एक पल के लिए तेजी से धडक उठा. अध्याय छह: कैंपस में नया हंगामा
रॉकी का हाथ और आगे बढा और उसने एक झटके में सिमरन की थ्रोंग खींचकर पास में रखी ब्रा के पास ले जाकर रख दी. अब सिमरन पूरी तरह से निर्वस्त्र थी, लेकिन उसकी शरारत और अल्हडपन पर इस बात का कोई असर नहीं पडा. वह जरा भी असहज नहीं हुई, बल्कि अपनी वही जानी- पहचानी चुलबुली मुस्कान के साथ खिलखिलाकर हंस पडी.
उसने रॉकी की छाती पर अपने नाजुक हाथों से हल्की सी थपकी दी और बेहद नटखट अंदाज में अपनी आंखें मटकाते हुए बोली, तुसी again very नॉटी हो!
सिमरन का यह बेबाक और बिंदास जवाब सुनते ही आसपास मौजूद सभी छात्र- छात्राएं ठहाके मारकर हंसने लगे. पूरा माहौल हंसी और शोर से भर गया. रॉकी भी सिमरन की इस मासूम और बिंदास अदा पर फिदा होकर जोर- जोर से हंसने लगा और उसे अपनी गोद में और कसकर थाम लिया.
सिमरन बिना किसी झिझक के रॉकी की गोद में पूरी तरह **** अवस्था में बैठी रही और मचलते हुए अपनी नजरें चारों तरफ घुमाने लगी. उसका पूरा ध्यान सिर्फ उस शांत लडके पर टिका था जो गलियारे से सीधे इसी ओर आ रहा था.
जैसे- जैसे वह लडका पास आ रहा था, सिमरन के दिल की धडकनें तेज हो रही थीं. क्या यही उसका बचपन का' पति' अर्जुन था?
अध्याय सात: धडकनों की गवाही और अनजानी तलाश
वह शांत और संजीदा लडका जैसे- जैसे बरगद के पेड के पास आ रहा था, सिमरन की धडकनें तेज होने लगीं. लेकिन हकीकत यह थी कि न तो सिमरन उस लडके का चेहरा पहचानती थी, और न ही वह लडका सिमरन को जानता था. सालों की दूरियों ने बचपन की उन धुंधली यादों को सिर्फ एक अहसास बनाकर छोड दिया था. सिमरन तो बस उस लडके की शांत चाल और सादगी को देखकर अपने ही मन में कयास लगा रही थी कि शायद यही उसका अर्जुन हो.
वह लडका गलियारे से गुजरते हुए जैसे ही बरगद के पेड के पास पहुंचा, उसकी नजर भीड पर पडी. सामने का नजारा देखकर वह एक पल के लिए ठिठक गया—कैंपस की एक बेहद बिंदास और पूरी तरह निर्वस्त्र लडकी Collage के सबसे अमीर और अय्याश लडके रॉकी की गोद में बैठी मचल रही थी. उस साधारण लडके के चेहरे पर अजीब सी हैरानी और झिझक तैर गई, और वह बिना कुछ कहे अपनी नजरें चुराकर चुपचाप आगे बढने लगा.
उधर सिमरन रॉकी की गोद में ही बैठी रही. उसने रॉकी के गले में अपनी बांहें वैसे ही डाले रखीं और उसकी छाती से लिपटे- लिपटे ही अपनी मटकती निगाहों से उस जाते हुए लडके को देखती रही. सिमरन के मन में एक पल को आया कि रॉकी की गोद से उतरकर उस लडके को रोके, लेकिन चेहरा न पहचानने की उलझन ने उसके कदमों को रोक दिया.
क्या यही मेरा अर्जुन है? या कोई और? उसने अपने मन में सोचा.
रॉकी अपनी ही धुन में सिमरन के नंगे **** को सहलाते हुए कुटिलता से मुस्कुरा रहा था, जबकि सिमरन उसकी गोद में मचलते हुए, दाएं- बाएं घूमकर उस शांत लडके को दूर जाते हुए देख रही थी. सिमरन के चुलबुले चेहरे पर एक शरारती मुस्कान तो थी, लेकिन उसकी नटखट आंखें अब भी उस अनजान भीड में अपने असली अर्जुन की पक्की पहचान तलाश रही थीं.
अध्याय आठ: बेबाक दुलार और दिल की तलाश
रॉकी ने अपनी बांहें सिमरन की पतली कमर पर और कस लीं. उसने अपने दोनों हाथों में सिमरन के नंगे, सुडौल नितंबों को थाम लिया और हल्के से दबाया. रॉकी की इस अचानक और बेबाक हरकत पर सिमरन जरा भी असहज नहीं हुई. उसके **** में एक हल्की सी सिहरन दौडी, और वह रॉकी की गोद में मचलते हुए खिलखिलाकर हंस पडी.
उसने अपनी नटखट और शरारती नजरें रॉकी के चेहरे पर टिकाईं, उसकी ठोडी को अपनी उंगलियों से सहलाया और बेहद चुलबुले अंदाज में आँख मटकाते हुए बोली, ओहो. तुसी तो सच में बडे वाले नॉटी बॉय हो!
उसकी इस अल्हड और बिंदास आवाज को सुनकर आसपास खडे छात्रों का झुंड एक बार फिर ठहाकों से गूँज उठा. माहौल में मस्ती और शरारत और ज्यादा बढ गई. रॉकी भी सिमरन की इस बेफिक्र अदा पर पूरी तरह फिदा होकर जोर- जोर से हंसने लगा और उसके नितंबों पर अपनी पकड हल्की करते हुए उसे अपनी गोद में और सहलाने लगा.
सिमरन रॉकी की गोद में वैसे ही बैठी रही, उसका हाथ रॉकी के कंधे पर टिका था. उसके होंठों पर वही चुलबुली मुस्कान थी, लेकिन उसकी शरारती आँखें एक पल के लिए भी नहीं ठहरीं.
वह शांत लडका समीर (जिसे सिमरन मन ही मन अर्जुन समझ रही थी) अब भीड को पार करके थोडा दूर निकल चुका था. सिमरन की नजरें उसकी पीठ पर टिकी थीं. दिल में अब भी वही उलझन थी—क्या वह सच में अर्जुन था या सिर्फ एक वहम? रॉकी के नटखट दुलार के बीच भी सिमरन का चुलबुला दिल बस इसी एक सवाल का जवाब ढूंढ रहा था.
अध्याय नौ: बेफिक्र मस्ती और अटकी निगाहें
रॉकी ने सिमरन को अपनी बाहों में थोडा और ऊपर संभाला और बिना झिझके अपना चेहरा आगे बढाकर सिमरन के उभरे हुए **** को अपने मुंह में भर लिया.
इस अचानक हुए अहसास पर सिमरन की सांसें एक पल को थमीं, पर उसकी बेबाक और चुलबुली नीयत में जरा भी झिझक नहीं आई. वह घबराने या पीछे हटने के बजाय रॉकी के बालों में अपनी उंगलियां फंसाकर खिलखिलाकर हंस पडी.
उसने बेहद नटखट और अल्हड अंदाज में अपनी गर्दन थोडी पीछे झुकाई और हंसते हुए बोली, अरे बाबा! नॉटी बॉय. थोडा सा भी वेट नहीं कर सकते क्या?
उसका यह बिंदास जवाब सुनकर आसपास खडे लडके- लडकियां फिर से ठहाके लगाने लगे. रॉकी भी सिमरन के **** को अपने मुंह में दबाए- दबाए ही आंखें मटकाकर मुस्कुराने लगा और अपनी पकड उसकी कमर पर मजबूत कर ली.
सिमरन रॉकी की गोद में वैसे ही **** अवस्था में बैठी मचलती रही. रॉकी के इस हरकत के बावजूद उसकी नटखट आंखें कैंपस की भीड को खंगालना नहीं भूली थीं. वह दूर जाते उस शांत लडके की ओर देखती रही, जिसका नाम वह अब तक नहीं जानती थी.
क्या वही मेरा बचपन का पति अर्जुन है, या मेरी तलाश अभी बाकी है? रॉकी के मुंह में अपने **** के कसने के अहसास के बीच भी सिमरन के शरारती दिमाग में सिर्फ यही एक सवाल घूम रहा था.
अध्याय दस: बेपरवाह लम्हे और बेबाक शरारत
रॉकी पूरी तरह सिमरन के अल्हडपन में खो चुका था. उसने सिमरन को अपनी गोद में कसकर थामे रखा और उसके ****ों को लगातार चूसने लगा. उसके होंठों की गरमाहट और खिंचाव से सिमरन के पूरे **** में एक हल्की सी सिहरन दौड गई, लेकिन उसकी बेबाक चुलबुलाहट और शरारती अंदाज पर इसका कोई असर नहीं पडा.
वह बिल्कुल घबराई नहीं; बल्कि उसने बेहद सहजता से अपने दोनों नाजुक हाथ रॉकी के सिर पर रखे और उसके बालों में उंगलियां फेरते हुए उन्हें सहलाने लगी. उसके चेहरे पर वही पुरानी नटखट और मनमोहक मुस्कान छा गई.
उसने अपनी नीली, शरारती आंखों को थोडा मटकाया और खिलखिलाकर हंसते हुए बेहद प्यार भरे और अल्हड अंदाज में फुसफुसाई, अरे बाबा. थोडा वेट तो करो जानू! इतने उतावले क्यों हो रहे हो?
सिमरन की इस खिलखिलाती आवाज और बिना किसी झिझक वाले बिंदास जवाब ने आसपास खडे छात्रों के झुंड में एक बार फिर से ठहाकों की लहर दौडा दी. पूरा बरगद के पेड का इलाका उनकी इस खुलेआम मस्ती और शोर से गूंज उठा.
रॉकी भी सिमरन के बालों को सहलाने के अंदाज और उसकी इस बेबाक प्रतिक्रिया पर पूरी तरह फिदा होकर मुस्कुराया, लेकिन उसने सिमरन को अपनी गोद से अलग नहीं किया. वह सिमरन के **** के साथ वैसे ही लगा रहा.
उधर सिमरन रॉकी की गोद में पूरी तरह निर्वस्त्र बैठी- बैठी मचलती रही. एक हाथ से रॉकी के बालों को सहलाते हुए, उसकी नटखट और चुलबुली निगाहें अभी भी भीड के हर एक कोने को खंगाल रही थीं. वह शांत लडका अब काफी दूर जा चुका था, और सिमरन के मन में अब भी वही एक शरारती सवाल तैर रहा था—क्या वह लडका ही उसका असली अर्जुन था, या उसका बचपन का' पति' इस कैंपस के किसी और कोने में उसका इंतजार कर रहा था?
अध्याय ग्यारह: क्लास की घंटी और नई शुरुआत
रॉकी ने सिमरन के ****ों का रस पूरी तरह पी लिया और गहरी सांस लेते हुए उसे अपनी बाहों की जकड से थोडा ढीला किया. सिमरन के चेहरे पर वही पुरानी बेबाक और चुलबुली मुस्कान बनी रही.
ठीक उसी पल, पूरे कैंपस में जोर से क्लास शुरू होने की घंटी बज उठी. घंटी की तेज आवाज सुनते ही बरगद के पेड के नीचे जमा छात्रों के झुंड में हलचल मच गई और सब अपनी- अपनी क्लास की ओर कदम बढाने लगे.
सिमरन ने भी एक पल की देरी नहीं की. वह झटके से रॉकी की गोद से नीचे उतरी. उसने पास की बेंच पर रखी अपनी पसंदीदा स्टाइलिश ब्रा उठाई और बिना किसी झिझक के उसे पहन लिया. फिर उसने अपनी थ्रोंग पहनी और अपने बिखरे हुए बालों को उंगलियों से संवारा.
कपडे पहनते ही सिमरन ने रॉकी की तरफ देखा, अपनी शरारती आंख मटकाई और हंसते हुए बोली, चलो जानू, बेल बज गई! बाकी की मस्ती बाद में.
रॉकी मुस्कुराते हुए उसे देखता रह गया. सिमरन ने अपना बैग कंधे पर टांगा और पूरी बेफिक्री और आत्मविश्वास के साथ अपनी नटखट चाल से क्लासरूम की ओर कदम बढा दिए.
चलते- चलते उसकी निगाहें फिर से गलियारों में भटकने लगीं. वह जानती थी कि आज Collage का पहला दिन है और क्लासरूम में शायद उसे अपना वही बचपन का' पति' अर्जुन मिल जाए, जिसकी तलाश उसके अठारहवें जन्मदिन को और खास बनाने वाली थी.
अध्याय बारह: ठंडी हवा और पहला सबक
सिमरन अपनी पुरानी चाल में वापस आ चुकी थी. थ्रोंग में ढके उसके नंगे नितंब हर कदम के साथ ताल मिलाते हुए दाएं- बाएं मटक रहे थे. उसके चलने की इस बेबाक रफ्तार और अल्हड अंदाज को देखकर गलियारे में खडे छात्र ठिठक कर उसे ही देखने लगे, लेकिन सिमरन को इन सब बातों की कहां परवाह थी. वह तो अपनी ही मस्ती में झूमती हुई सीधे अपने क्लासरूम के दरवाजे तक पहुंच गई.
जैसे ही उसने क्लासरूम का भारी कांच का दरवाजा धक्का देकर खोला, अंदर से चिल्ड एसी की बर्फीली हवा का एक तेज झोंका सीधे उसके शरीर से टकराया. ब्रा और थ्रोंग के कम कपडों में ढके उसके ****ों और खुले नितंबों पर जब एसी की वह ठंडी हवा लगी, तो सिमरन के **** में एक तीव्र सिहरन दौड गई.
अहहह. उसके गुलाबी होंठों से एक हल्की और **** सिसकी अनजाने में ही निकल गई.
सिमरन ने तुरंत अपने होंठों को दबाया और कमरे के अंदर नजर दौडाई. प्रोफेसर अभी तक क्लास में नहीं आए थे. उसने अपने चेहरे पर वही चिर- परिचित नटखट और चुलबुली मुस्कान बिखेरी, अपनी सिसकी को दबाकर हंस पडी, और सीधे जाकर बीच की एक बेंच पर बैठ गई.
अपनी किताबें बैग से निकालकर टेबल पर रखते ही उसने आसपास की सीटों पर बैठे छात्रों पर एक शरारती नजर डाली—यह देखने के लिए कि क्या इनमें से कोई उसका बचपन का अर्जुन हो सकता है? पर फिर उसने एक गहरी सांस ली, अपनी नटखट आंखों को चमकाया और हंसते हुए शांत होकर अपनी स्टडी में ध्यान लगाने लगी.
अध्याय तेरह: लंच का वक्त और बेबाक मजाक
लंच की घंटी बजते ही क्लासरूम के सारे छात्र बाहर निकलने लगे. सिमरन ने भी अपनी किताबें बैग में रखीं और अपनी वही चुलबुली और बेफिक्र चाल में मटकते हुए क्लासरूम से बाहर निकल आई.
कैंपस में आते ही उसने देखा कि लंच ब्रेक के दौरान जगह- जगह छात्र- छात्राओं के जोडे खुलेआम एक- दूसरे के साथ रोमांस में डूबे हुए थे. कोई बेंच पर बैठकर एक- दूसरे के गले लगा हुआ था, तो कोई कोने में प्यार जता रहा था. सिमरन के नटखट मन को यह सब देखकर बेहद मजा आने लगा. उसकी शरारती आँखों में एक नया तूफान उठने लगा.
वह अपनी बेबाक चाल से मटकती हुई आगे बढी. थोडी ही दूर पर एक लडका अपनी ही धुन में दीवार के पास खडा था और आने- जाने वाली लडकियों को देख रहा था. सिमरन ने अपनी चुलबुली मुस्कान बिखेरी और सीधे उस अनजान मजनू के पास जा पहुंची.
बिना एक पल की झिझक के, सिमरन ने मुस्कुराते हुए अपने दोनों नाजुक हाथों में उस लडके का चेहरा थाम लिया. लडका इस अचानक हुए अहसास से कुछ समझ पाता, उससे पहले ही सिमरन ने अपने गुलाबी और रसीले होंठ सीधे उसके होंठों पर टिका दिए.
वह उस लडके को अपने होंठों का गहरा और मीठा रस पिलाने लगी. सिमरन की इस बेबाक और अप्रत्याशित हरकत से वह लडका हैरान रह गया, पर अगले ही पल वह भी सिमरन के इस नटखट और रसभरे दुलार में पूरी तरह खो गया. आसपास खडे छात्र सिमरन के इस बिंदास अंदाज को देखकर मुस्कुराने और ठहाके लगाने लगे.
अध्याय चौदह: रसीला अहसास और बेबाक अंदाज
वह मजनू सिमरन के रसीले होंठों का रस पूरी गहराई से पीने में डूब गया. सिमरन का यह नटखट और अप्रत्याशित रूप देखकर उसकी सांसें तेज होने लगीं. अपनी उत्तेजना और बेताबी में उसने अपने हाथ आगे बढाए और सिमरन की पीठ पर बने ब्रा के हुक को तलाशने लगा. एक ही झटके में उसने हुक खोल दिया और ब्रा को सिमरन के नाजुक **** से अलग करके पास की एक बेंच पर किनारे फेंक दिया.
सिमरन के सुडौल और नंगे **** एक बार फिर खुली हवा में आ गए, पर उसकी बेफिक्री और अल्हडपन पर इस बात का जरा भी असर नहीं पडा. वह न तो घबराई और न ही उसने खुद को ढकने की कोशिश की.
अपने होंठों से उस लडके के होंठों को मिलाए- मिलाए ही, सिमरन के होंठों पर एक नटखट सी मुस्कान तैर गई. उसने बेहद प्यार और चुलबुले अंदाज में अपने दोनों हाथ ऊपर उठाए और उस मजनू के घने बालों में अपनी उंगलियां फंसाकर उन्हें हौले- हौले सहलाने लगी.
उसकी इस हरकत से उस लडके का जोश और बढ गया, जबकि सिमरन अपने बालों को संवारने की बेफिक्री के साथ उसकी छाती से लिपटी रही. आसपास लंच ब्रेक का लुत्फ उठा रहे छात्र सिमरन के इस बिंदास और बेबाक अंदाज को देखकर मुस्कुराने लगे और पूरा माहौल एक बार फिर उसकी शरारत की गिरफ्त में आ गया.
अध्याय पंद्रह: लंच ब्रेक का खुमार और बेफिक्र शरारत
वह मजनू सिमरन के होंठों की मिठास और उसका रसीलापन पूरी तरह निचोड चुका था. जैसे ही उसने अपने होंठ अलग किए, उसकी सांसें उखड रही थीं और आँखों में बेताबी साफ झलक रही थी. सिमरन के नंगे और सुडौल ****ों को देखकर उसका धीरज पूरी तरह जवाब दे गया. उसने बिना एक पल गंवाए अपना चेहरा नीचे किया और सिमरन के उभरे हुए ****ों पर अपने होंठ टिकाकर उन्हें जोर- जोर से **** शुरू कर दिया.
****ों पर मजनू के होंठों की गरमाहट और खिंचाव महसूस होते ही सिमरन के पूरे **** में एक मीठी सी सिहरन दौड गई. लेकिन उसकी चिर- परिचित चुलबुलाहट और अल्हड अंदाज में जरा भी कमी नहीं आई. वह न तो झिझकी और न ही उसने उसे रोकने की कोशिश की.
सिमरन ने अपनी नटखट नीली आँखों को मटकाया और खिलखिलाकर हंस पडी. उसने अपने नाजुक हाथों से उस लडके के सिर को सहलाना जारी रखा. उसकी उंगलियाँ मजनू के बालों में बहुत प्यार से फिर रही थीं, मानो वह उसे और दुलार दे रही हो.
ओहो मजनू जी! सारा रस आज ही पी जाओगे क्या? सिमरन ने अपनी खिलखिलाती और चुलबुली आवाज में उसके बालों को हौले से खींचते हुए कहा.
आसपास जमा कपल और छात्र सिमरन के इस बिंदास अंदाज को देखकर मुस्कुरा रहे थे. लंच ब्रेक की इस खिली धूप में, ****ों पर खिंचाव के उस अहसास के बीच भी सिमरन का नटखट मन अपनी धुन में मस्त था—उसके बालों को सहलाते हुए उसकी शरारती निगाहें अब भी कैंपस में घूम रही थीं, यह सोचकर कि उसका असली' पति' अर्जुन आखिर Kiss कोने में छिपा बैठा है.
अध्याय सोलह: अधूरा अहसास और तलाश की धुन
मजनू ने सिमरन के ****ों का बचा- कुचा रस भी पूरी बेताबी से पी लिया. जब उसने अपने होंठ पीछे हटाए, तो उसकी सांसें तेज थीं और चेहरे पर एक अजीब सी तृप्ति थी. सिमरन के सुडौल ****ों पर उसके होंठों के लाल निशान साफ दिखाई दे रहे थे, लेकिन सिमरन के नटखट और चुलबुले चेहरे पर वही बेफिक्र मुस्कान तैर रही थी.
उसने मजनू के बालों से अपनी उंगलियां निकालीं और उसकी छाती पर हल्की सी थपकी देते हुए खिलखिलाकर हंस पडी.
बस मजनू जी! सारा कोटा आज ही पूरा कर लोगे क्या? उसने अपनी शरारती आँखें मटकाते हुए कहा.
वह मजनू सिमरन के इस बेबाक अंदाज पर मुस्कुराता हुआ थोडा पीछे हटा. सिमरन ने बिना किसी झिझक के अपने नंगे **** को हवा में लहराया और पास की बेंच पर रखी अपनी ब्रा उठाई. उसने झटपट ब्रा पहनी और उसे संभालते हुए अपने बिखरे बालों को संवारा.
उसके नंगे नितंब थ्रोंग में ढके हुए अब भी उसकी चाल के साथ मटक रहे थे. लंच का समय खत्म होने वाला था, और सिमरन की चुलबुली निगाहें एक बार फिर पूरे कैंपस में घूमने लगीं.
मजनू का दुलार तो खत्म हो गया था, पर सिमरन के जिद्दी दिल में अर्जुन को ढूंढने का बुखार अब भी वैसा ही चढा हुआ था. उसने अपने बैग को कंधे पर सही से टांगा और एक नई शरारत का इरादा लेकर कैंपस की अगली गली की ओर कदम बढा दिए.
अध्याय सत्रह: कैंटीन का जायका और नजरों का खेल
पेट में हल्की सी भूख महसूस होते ही सिमरन अपनी वही चुलबुली और मटकती चाल के साथ सीधे Collage की कैंटीन की ओर बढ गई. थ्रोंग में ढके उसके नितंबों की मटकन और ब्रा में सिमटे उसके आकर्षक रूप ने कैंटीन में कदम रखते ही सभी का ध्यान खींच लिया. कैंटीन में छात्रों की अच्छी- खासी भीड थी—हर टेबल पर गपशप, हंसी- मजाक और लंच का दौर चल रहा था.
सिमरन ने बिना किसी झिझक के काउंटर से अपना पसंदीदा लंच आर्डर किया और ट्रे लेकर एक खाली टेबल की तरफ बढ गई.
टेबल पर बैठकर जैसे ही उसने पहला निवाला अपने गुलाबी होंठों में लिया, उसके चेहरे पर एक सुकून भरी मुस्कान आ गई. पर सिमरन की शरारती आंखें खाना खाते हुए भी शांत नहीं बैठने वाली थीं. वह एक- एक निवाला चबाती जाती और अपनी नीली मटकीली नजरों से कैंटीन के हर एक कोने को खंगालती रहती.
उसके पास से गुजरने वाले लडके उसे मुड- मुडकर देख रहे थे. सिमरन किसी को देखकर हल्की सी शरारती मुस्कान दे देती, तो किसी की तरफ देखकर अपनी आंख मटका देती.
सब के सब लंच का मजा ले रहे हैं, पर मेरा अर्जुन कहां दुबका बैठा है? उसने मन ही मन सोचा और खिलखिलाकर मुस्कुराते हुए अपने लंच का स्वाद लेने लगी.
अध्याय अठारह: अचानक मुलाकात और अनजाना मोड
लंच खत्म करके सिमरन जैसे ही ट्रे लेकर उठने लगी, तभी कैंटीन के मुख्य दरवाजे से एक शांत स्वभाव का लडका अंदर आया. उसके चेहरे पर सादगी थी और आंखों में वही पुरानी मासूमियत, जो सिमरन की यादों के धुंधले पन्नों में बसी हुई थी. लडके ने सादे कपडे पहन रखे थे और वह कैंटीन के शोर- शराबे से बेखबर सीधे काउंटर की ओर बढा.
सिमरन के कदम अचानक वहीं ठिठक गए. थ्रोंग और ब्रा में ढकी उसकी देह में एक अजीब सी हलचल हुई और दिल की धडकनें तेज हो गईं. उसके नटखट चेहरे पर एक गहरी चमक आ गई. बिना एक पल सोचे, उसने अपनी ट्रे टेबल पर रखी और मटकती चाल से सीधे उस लडके के सामने जाकर खडी हो गई.
इतनी देर कहां लगा दी, पतिदेव' सिमरन ने अपनी नटखट आंखें मटकाते हुए खिलखिलाकर कहा और बेबाक अंदाज में लडके की बांह थाम ली.
लडका एकदम से चौंक गया. उसने जब अपने सामने ब्रा और थ्रोंग पहने एक बेहद खूबसूरत और बिंदास लडकी को देखा, तो उसके चेहरे पर गहरी घबराहट और उलझन छा गई. उसने झटके से अपनी बांह छुडाने की कोशिश की.
सुनिए. आप कौन हैं? और ये क्या अजीब हरकत है? लडके ने संकोच भरे लहजे में कहा.
सिमरन हंस पडी, झूठ मत बोलो अर्जुन! तुम्हारे दिल की धडकनें बता रही हैं कि तुम मुझे पहचान चुके हो.
लडके ने हैरानी से सिर हिलाया और बोला, मेरा नाम अर्जुन नहीं, नकुल है. आप शायद किसी गलत इंसान को ढूंढ रही हैं.
सिमरन की चुलबुली मुस्कान एक पल को थमी, पर उसकी बेफिक्री में जरा भी कमी नहीं आई. उसने अपनी कमर पर हाथ रखा और खिलखिलाकर ठहाका लगाया, ओहो! तो एक और गलत निशाना? कोई बात नहीं नकुल जी, पर आपकी सादगी ने एक पल के लिए मेरा दिल तो चुरा ही लिया था!
अध्याय उन्नीस: उलझन का जाल और शाम की दस्तक
नकुल सिमरन के इस बिंदास अंदाज और अल्हड मुस्कान को देखकर झेंप गया और नजरें चुराता हुआ जल्दी से काउंटर की तरफ निकल गया. कैंटीन में बैठे कुछ छात्र सिमरन के इस नए कारनामे को देखकर दबी- दबी हंसी हंसने लगे. सिमरन ने अपनी कमर पर टिका हाथ हटाया, अपने बिखरे बालों को पीछे झटका और अपने ही अंदाज में दोबारा खिलखिलाकर हंस पडी.
उसने अपनी ट्रे उठाई, उसे डस्टबिन के पास रखा और वापस मटकती चाल से कैंटीन से बाहर निकल आई. धूप अब ढलने लगी थी और शाम की हल्की ठंडी हवा कैंपस में बहने लगी थी. ब्रा और थ्रोंग में ढके उसके **** को छूकर जब हवा गुजरी, तो सिमरन ने एक गहरी और सुकून भरी सांस ली.
दिन खत्म होने को था, Collage का पहला दिन लगभग बीत चुका था, पर सिमरन के मन का उत्साह रत्ती भर भी कम नहीं हुआ था.