एक किनारे टेबल पर रख दिया. ब्रा के हटते ही सिमरन के दोनों भारी और सुडौल **** पूरी तरह से आजाद होकर हवा में झूल गए, जो पहले की हरकतों की वजह से वाकई काफी लचीले और ढीले पड चुके थे. सीनियर ने बिना एक पल गंवाए अपने दोनों गर्म हाथ आगे बढाए और सिमरन के उन नंगे, ढीले ****ों को अपनी हथेलियों में कसकर भींच लिया. उन्हें दबाते हुए उसने दीवानगी भरे लहजे में कहा, यार. सच में ये बहुत ज्यादा ढीले और मखमली हो चुके हैं! सिमरन ने अपने उसी चिर- परिचित, चुलबुले और नटखट अंदाज में अपनी गर्दन को हल्का सा मटकाया. उसके चेहरे पर एक प्यारी सी खिलखिलाहट तैर गई और वह अपनी नीली आँखों को मटकाते हुए बडे मजे से बोली, अरे जनाब, ऐसे मत भूलो. ये ढीला हुआ नहीं है, इसे कुछ देर पहले ही अच्छे से ढीला किया गया है! कैंटीन के बीचोंबीच सरेआम हो रही इस खुली अंतरंगता को देखकर आसपास बैठे छात्रों की साँसें थम गईं, लेकिन सिमरन अपनी इस बेपरवाह और मस्तमौला मस्ती में पूरी तरह डूबी हुई थी. सीनियर छात्र सिमरन के इस बेपरवाह और मादक जवाब को सुनकर पूरी तरह से बहक चुका था. उसने अपनी हथेलियों की पकड सिमरन के दोनों भारी ****ों पर और मजबूत कर दी और उन्हें लगातार जोर- जोर से मसलने लगा. उसकी उंगलियों के भारी दबाव और लगातार हो रही इस मालिश से सिमरन के वे सुडौल **** और अधिक मखमली, लचीले और पूरी तरह से ढीले पड गए. कैंटीन की उस खुली रोशनी में सिमरन के नंगे और ढीले **** हर हल्की सी हरकत के साथ थिरक रहे थे. इस पूरी तीव्र और उत्तेजक क्रिया के बीच भी सिमरन के चेहरे की वह नटखट और चुलबुली मुस्कान जरा भी कम नहीं हुई. उसने अपनी नीली आँखों को हल्का सा मटकाया, अपनी गर्दन को थोडा सा तिरछा किया और अपनी उसी जानी- पहचानी मस्तमौला हंसी के साथ सीनियर की तरफ देखते हुए बडे चुलबुले अंदाज में कहा, लो भाई. अब लो, हो गया न जनाब पूरी तरह ढीला! अब तो तुम्हें कोई शिकायत नहीं होगी? उसकी इस बोल्ड और खिलखिलाती हुई बात ने कैंटीन के उस पूरे माहौल को और अधिक रोमांचक बना दिया, जहाँ आसपास बैठे हर शख्स की नजरें सिर्फ और सिर्फ सिमरन की इस बेफिक्र और आजाद अदा पर टिकी हुई थीं. सीनियर छात्र की साँसें अब तेज हो चुकी थीं. उसने अपनी पूरी ताकत और मर्दानगी झोंकते हुए सिमरन के दोनों भारी ****ों को आखिरी बार किसी रबर की तरह खींचा और जोर- जोर से मसल डाला. उसने संतोष की साँस लेते हुए कहा, यार बस थोडा और. फिर ये पूरी तरह से ढीले हो जाएंगे! लगभग दस मिनट की इस कडी और मादक मशक्कत के बाद, सिमरन के वे सुडौल और कडे **** आखिरकार पूरी तरह से ढीले और आकारहीन से हो चुके थे. अपनी इस सफलता पर सीनियर के चेहरे पर एक संतुष्ट मुस्कान तैर गई और उसने चैन की साँस लेते हुए कहा, चलो, हो गया मेरा काम! लेकिन इस सब के बाद भी सिमरन के चेहरे पर जरा सा भी मलाल नहीं था. उसकी आँखों में वही पुरानी चमक और होंठों पर नटखट मुस्कान बरकरार थी. वह खिलखिलाकर हँसी और टेबल पर रखी अपनी ब्रा को उठाया. फुर्ती से अपने ढीले हो चुके ****ों को उसमें समेटकर उसने उसका हुक लगा लिया. इसके बाद वह अपनी उसी जानी- पहचानी मटकती और कातिलाना चाल से अपनी जगह से उठी. अपने गोरे और कोमल नितंबों को हवा में लयबद्ध तरीके से मटकाती हुई, अपनी नीली आँखों को नटखट अंदाज में घुमाती हुई वह कैंटीन से बाहर निकली और सीधे अपने क्लासरूम की तरफ वापस चल दी, मानो कुछ हुआ ही न हो. Collage के गेट पर खडी टूर की उन बडी लग्जरी बसों के पास छात्रों में भारी उत्साह और गहमागहमी का माहौल था. सभी छात्र अपना सामान समेटकर अगले दस दिनों के इस लंबे और रोमांचक टूर के लिए बसों में सवार हो रहे थे. जैसे ही बस के भीतर का माहौल गर्म और व्यवस्थित हुआ, सिमरन बस के अंदर दाखिल हुई. उसकी चाल में वही पुरानी नटखट मस्ती और कातिलाना अदा थी. बस की इस लंबी यात्रा के लिए उसने अपने पारंपरिक कपडों को ताक पर रख दिया था; वह बिना किसी झिझक के केवल एक आकर्षक ब्रा और एक बारीक थ्रोंग पहने हुए थी, जिसमें उसके हाल ही में और अधिक ढीले और मखमली हो चुके **** और गोरे, कोमल नितंब साफ नजर आ रहे थे. मोंटी, जो कि Collage का एक बेहद अमीर, बिगडैल और अय्याश लडका था, पहले से ही विंडो सीट पर अपनी धमक के साथ जमा हुआ बैठा था. जैसे ही उसने सिमरन को इस मादक और लगभग **** अवस्था में अपनी तरफ आते देखा, उसके चेहरे पर एक चौडी और **** से भरी मुस्कान फैल गई. सिमरन ने अपनी नीली आँखों को मटकाया, एक हल्की सी चुलबुली हंसी बिखेरी और सीधे मोंटी के पास वाली विंडो सीट पर जाकर आराम से बैठ गई. उसने अपनी खिडकी से बाहर झांकते हुए मोंटी की तरफ देखा और अपने उसी मस्तमौला अंदाज में बोली, तो जनाब, तैयार हो फिर इस दस दिन के लंबे सफर के मजे लेने के लिए? उसके इस खुलेपन और बोल्ड अंदाज ने बस में बैठे बाकी लडकों का ध्यान भी तुरंत अपनी ओर खींच लिया, और सफर की शुरुआत से ही बस का तापमान काफी बढ गया. जैसे- जैसे टूर की बस आगे बढी, शाम ढलने लगी और बाहर का आसमान गहराने लगा. कुछ ही देर में बस की अंदरूनी लाइटें भी बंद कर दी गईं, जिससे पूरी बस के भीतर एक गहरा और सहूलियत भरा अंधेरा छा गया. इस प्राइवेट और धुंधले माहौल का फायदा उठाते हुए मोंटी ने बिना एक पल गंवाए अपनी हरकतें शुरू कर दीं. उसने फुर्ती से हाथ बढाकर सिमरन की ब्रा का हुक खोल दिया और उसे उसके बदन से अलग करके अपने पास रख लिया. ब्रा के हटते ही सिमरन के वे भारी और पहले से ही ढीले- ढाले **** पूरी तरह से आजाद हो गए. मोंटी ने बिना देर किए अपना मुंह आगे बढाया और उसके एक कोमल **** को अपने गर्म होंठों के बीच लेकर जोर- जोर से चूसने लगा. इस गहरी और अंतरंग हरकत के बीच भी सिमरन के चेहरे पर वही चिर- परिचित, सुकून भरी और चुलबुली मुस्कान तैर रही थी. अंधेरे और उस आरामदायक सफर के माहौल में उसने बडे लाड से अपना एक हाथ मोंटी के बालों में फेरना शुरू किया. उसने धीरे- धीरे मोंटी के बालों को सहलाया और अपनी आँखें बंद करके बस की सीट पर अपना सिर टिका दिया, इस मादक और सुहाने सफर का पूरा मजा लेते हुए. बस के भीतर छाए उस गाढे अंधेरे और सफर के शोर के बीच मोंटी की दीवानगी और बढती चली गई. वह लगातार सिमरन के भारी और लचीले ****ों को चूसता रहा, जिससे उसके हर एक घूंट के साथ सिमरन के **** में एक हल्की सी सिहरन दौड जाती थी. ****ों को चूसने के साथ ही मोंटी का हाथ नीचे की ओर फिसला. उसने बिना किसी झिझक के सिमरन के गोरे और कोमल नितंबों के पास पहुँचे और फुर्ती से उसके बारीक थ्रोंग की डोरी खींच दी. एक झटके में उस थ्रोंग को भी सिमरन के बदन से उतारकर उसने अपने बगल वाली सीट पर रख लिया, जिससे सिमरन का पूरा निचला हिस्सा और उसकी संवेदनशील पंखुडी भी अब पूरी तरह से **** और आजाद हो चुकी थी. इस खुली और अंतरंग स्थिति के बावजूद सिमरन के भीतर जरा सी भी हरबडी या असहजता नहीं थी. उसकी वही मस्तमौला और चुलबुली शख्सियत कायम रही. उसने बडे प्यार और लाड से अपने हाथ को मोंटी के सिर तक ले जाकर उसके बालों को हल्के- हल्के सहलाना जारी रखा. अपनी आँखें बंद करके बस की मुलायम सीट पर अपना सिर टिकाए हुए, वह इस चलती हुई गाडी के झटकों और मोंटी के इस गर्म स्पर्श का बडे सुकून के साथ मजा ले रही थी. चलती हुई बस के उस मंद अंधेरे में, जहाँ एक तरफ मोंटी उसके **** को अपनी **** का शिकार बना रहा था, वहीं सिमरन की आँखें बंद थीं. शरीर की इन तीव्र संवेदनाओं के बीच उसका मन अचानक अतीत के किसी बहुत ही शांत और सुहाने कोने में भटक गया. आँखें बंद किए हुए वह अपने बचपन की सुनहरी दुनिया में पहुँच गई. उसे साफ- सुथरा वह दौर याद आने लगा जब वह और उसका बचपन का दोस्त—और मन ही मन जिसे वह अपना' पति' मानती थी—अर्जुन, छोटे- छोटे घरोंौदों में बैठकर गुड्डे- गुडियों का खेल खेला करते थे. उस कोमल उम्र में जहाँ दुनिया की किसी चीज की समझ नहीं थी, अर्जुन के साथ प्लास्टिक की छोटी कुर्सियों पर बैठना, मिट्टी के बर्तनों से रसोई- रसोई खेलना और अर्जुन का मासूमियत से उसका हाथ थाम लेना, उसके लिए सब कुछ हुआ करता था. बचपन के उस भोले- भाले संसार और आज Collage की इस चलती बस में **** अवस्था में ****ी जा रही इस हकीकत के बीच का यह विरोधाभास बडा ही अजीब था. एक तरफ मोंटी उसके ढीले ****ों को चूस रहा था और उसकी पंखुडी पूरी तरह से खुली हुई थी, तो दूसरी तरफ सिमरन के दिमाग में अर्जुन के साथ बिताए गए उन मासूम दिनों की परछाइयां तैर रही थीं. इस दोहरी दुनिया में खोई हुई सिमरन के चेहरे पर एक अजीब सी, हल्की सी मुस्कान तैर गई—एक तरफ **** की गर्मी थी, तो दूसरी तरफ बचपन के उन सपनों की ठंडक. मोंटी को क्या अंदाजा था कि इस वक्त सिमरन का मन **** की इन हदों से कहीं दूर, किसी और ही दुनिया में सफर कर रहा है? सफर के उस लंबे रास्ते और बस के भीतर चली लंबी मादक गतिविधियों के बाद, मोंटी की दीवानगी आखिरकार शांत हुई. कुछ ही देर में पहाडों और हरियाली के बीचों- बीच बना वह खूबसूरत रिसॉर्ट आ गया, जहाँ अगले दस दिनों के लिए Collage टूर रुकने वाला था. बस धीरे- धीरे ब्रेक लगाते हुए रिसॉर्ट के मुख्य द्वार पर आकर रुक गई. बस के रुकते ही अंदर की लाइटें वापस जल उठीं. सिमरन ने अपनी आँखें खोलीं, बचपन के सपनों की उस दुनिया से बाहर आई और अपने उसी चिर- परिचित, चुलबुले अंदाज में एक मीठी सी अँगडाई ली. उसने बिना किसी हडबडी के अपनी ब्रा और थ्रोंग को उठाया, वापस अपने गोरे और कोमल बदन पर पहन लिया. इसके बाद वह अपनी नटखट मुस्कान बिखेरती हुई मोंटी के साथ बस से नीचे उतरी. रिसॉर्ट का परिसर बेहद शानदार और ठंडी हवाओं से सराबोर था. सभी छात्र अपना सामान लेकर रिसेप्शन काउंटर की तरफ बढे, जहाँ Collage के प्रोफेसर रूम्स की चाबियाँ बांट रहे थे. जब मोंटी और सिमरन अपनी बारी आने पर रिसेप्शन डेस्क पर पहुँचे और वेंटिलेटर स्लिप देखी, तो एक दिलचस्प बात सामने आई. रिसेप्शनिस्ट ने मुस्कुराते हुए मोंटी को चाबी सौंपी और बताया कि इस दस दिनों के टूर के लिए मोंटी और सिमरन को एक ही सिंगल डीलक्स Room शेयर करना है. सिमरन ने अपनी नीली आँखों को मटकाया और खिलखिलाकर हँसते हुए मोंटी की तरफ देखा, और बडे चुलबुले अंदाज में बोली, लो भाई! लगता है अगले दस दिनों तक हमारी यह मस्ती ऐसे ही बिना रुके चलने वाली है, वो भी एक ही कमरे के अंदर! उसके इस बोल्ड और बेपरवाह अंदाज को सुनकर मोंटी के चेहरे पर एक और शातिर और **** भरी मुस्कान तैर गई, और दोनों अपनी चाबी लेकर Room की तरफ बढ चले. रिसॉर्ट के उस आलीशान और आरामदायक सिंगल डीलक्स Room में पहुँचते ही माहौल और भी ज्यादा निजी और सुहाना हो गया. सिमरन ने बिना एक पल गंवाए बाथरूम का रुख किया और गर्म पानी से ताजा होकर बाहर निकली. नहाने के बाद उसके गोरे बदन पर पानी की हल्की- हल्की बूंदें चमक रही थीं. उसने तौलिए से खुद को सुखाने के बाद फिर से वही आकर्षक ब्रा और बारीक थ्रोंग पहन लिया, जो उसकी गोरी रंगत पर बहुत फब रहा था. बालों को तौलिए से लपेटते हुए वह सीधे बडे से किंग- साइज बिस्तर की तरफ गई और आराम से पेट के बल उल्टा लेट गई. बिस्तर पर लेटते ही उसने बेडसाइड टेबल से एक फैशन मैगजीन उठाई और अपने उसी चिर- परिचित, चुलबुले अंदाज में पन्ने पलटने लगी, मानो वह किसी होटल में नहीं बल्कि अपने ही घर के बेडरूम में आराम कर रही हो. तभी बाथरूम का दरवाजा खुला और मोंटी ताजा होकर सिर्फ एक छोटी सी चड्डी पहने बाहर निकला. उसकी मस्कुलर बॉडी पर पानी की बूंदें चमक रही थीं. वह बिना कोई वक्त गंवाए सीधे बिस्तर की तरफ बढा और सिमरन के ठीक बगल में आकर बैठ गया. सिमरन के पेट के बल लेटे होने की वजह से उसके गोरे, गोल और कोमल नितंब हवा में पूरी तरह से उठे हुए थे, जिन पर थ्रोंग की डोरी बेहद **** लग रही थी. मोंटी ने अपनी गर्म हथेलियां आगे बढाईं और सिमरन के उन मखमली नितंबों को प्यार से सहलाने लगा. इस स्पर्श के बावजूद सिमरन के चेहरे पर वही नटखट और मस्तमौला मुस्कान बनी रही. उसने मैगजीन से अपनी एक आँख उठाई, मोंटी की तरफ देखकर अपनी नीली आँखों को मटकाया और चुलबुले अंदाज में फुसफुसाते हुए बोली, क्या बात है जनाब! लगता है कमरे में आते ही सुस्ती छूमंतर हो गई है, या अभी भी कुछ और बाकी है? उसकी इस बोल्ड और खिलखिलाती अदा ने मोंटी की बेताबी को और ज्यादा बढा दिया, और कमरे का माहौल पूरी तरह से गर्मा गया. मोंटी की बेताबी अब और अधिक बढ चुकी थी. सिमरन के उस चुलबुले और बेपरवाह अंदाज ने उसे पूरी तरह से अपनी ओर खींच लिया था. बिना एक पल की भी देरी किए, मोंटी ने अपनी उंगलियां आगे बढाईं और सिमरन के गोरे और मखमली नितंबों पर टिके उस बारीक थ्रोंग की डोरी को पकडकर एक ही झटके में नीचे खींच लिया. वह छोटा सा थ्रोंग सिमरन के बदन से उतरकर पलक झपकते ही बिस्तर के एक किनारे जा गिरा, जिससे सिमरन का पूरा निचला हिस्सा और उसकी संवेदनशीलता अब पूरी तरह से खुली और आजाद हो चुकी थी. इस अचानक और खुले अंदाज में किए गए काम के बावजूद, सिमरन के चेहरे पर जरा सी भी शिकन या घबराहट नहीं आई. वह अभी भी बिस्तर पर वैसे ही औंधे मुंह लेटी हुई थी. उसने अपनी गर्दन को हल्का सा मोडा, अपनी नीली और नटखट आँखों को तिरछा किया और सीधे मोंटी की आँखों में गहरी झांकने लगी. उसके चेहरे पर वही पुरानी, शरारती और चुलबुली मुस्कान तैर रही थी—मानो वह इस खेल का पूरा मजा ले रही हो और मोंटी को और आगे बढने का खुला न्योता दे रही हो. अपनी तिरछी निगाहों से मोंटी की आँखों में देखते हुए उसने बडे मस्तमौला लहजे में कहा, अरे जनाब, इतनी जल्दबाजी क्यों? अभी तो इन दस दिनों की शुरुआत है, कहीं थक तो नहीं जाओगे? उसकी इस कातिलाना अदा और खुली चुनौती ने मोंटी के भीतर छिपी सारी हदें तोड दीं, और वह पूरी तरह से सिमरन की इस मादक दुनिया में डूबने के लिए तैयार हो गया. सिमरन के उस खुले और मजाकिया ताने ने मोंटी के भीतर छिपी सारी बची- खुची झिझक को पूरी तरह से मिटा दिया. उसकी आँखें **** और दीवानगी से चमक उठीं. उसने बिना एक पल गंवाए अपना हाथ आगे बढाया और सिमरन की पीठ पर फंसी ब्रा का हुक झटके से खोल दिया. ब्रा को उसके **** से अलग करके उसने उसे भी पलंग के एक किनारे पर फेंक दिया, जिससे सिमरन के वे भारी और पहले से ही ढीले- ढाले **** पूरी तरह से आजाद होकर गद्दे पर टिक गए. इसके बाद मोंटी ने खुद भी एक ही झटके में अपनी छोटी सी चड्डी उतारकर बिस्तर के नीचे फेंक दी. अब वह पूरी तरह से **** अवस्था में सिमरन के ठीक बगल में मौजूद था. इतनी खुलम- खुल्ला और अंतरंग स्थिति में आ जाने के बाद भी सिमरन के चेहरे की वह नटखट और चुलबुली मुस्कान जरा सी भी फीकी नहीं पडी थी. वह बिस्तर पर वैसे ही पेट के बल लेटी रही, और अपनी गर्दन को हल्का सा तिरछा करके अपनी नीली आँखों से मोंटी के पूरे **** बदन को ऊपर से नीचे तक देखने लगी. उसकी आँखों में एक अजीब सी शरारत और मस्ती थी. वह खिलखिलाकर हँसी और अपनी तिरछी निगाहों से सीधे मोंटी की आँखों में झांकते हुए बडे मस्तमौला अंदाज में बोली, वाह जनाब! लग रहा है कि सचमुच कोई कसर नहीं छोडना चाहते. चलो, देखते हैं तुम इन दस दिनों में मुझे कितना थका पाते हो! उसकी इस बेबाक और बोल्ड बात ने रिसॉर्ट के उस कमरे का तापमान और भी ज्यादा बढा दिया, और दोनों इस मादक सफर के अगले पडाव में पूरी तरह से डूबने के लिए तैयार हो गए. कमरे का माहौल पूरी तरह से गर्मा चुका था और दोनों तरफ से **** अपने चरम पर थी. मोंटी बिना एक पल की भी देरी किए, बिस्तर पर पेट के बल लेटी हुई सिमरन के गोरे और मखमली नितंबों के ऊपर पूरी तरह से लेट गया. उसने अपने कडे और मचलते हुए लिंग को सिमरन की खुली हुई गहराई के ठीक मुहाने पर सेट किया और एक जोरदार झटके के साथ अंदर उतर गया. इसके बाद मोंटी ने अपनी पूरी ताकत और जवानी झोंक दी. वह तेजी से आगे- पीछे होने लगा और सिमरन की गहराइयों में ताबडतोड, जोर- जोर से धक्के लगाने लगा. हर एक धक्के के साथ बिस्तर पर एक लयबद्ध आवाज गूँजने लगी और दोनों के **** की गर्माहट पूरे कमरे में फैल गई. इतनी तीव्र और गहरी कार्रवाई के बीच भी सिमरन के चेहरे पर जरा सी भी तकलीफ या असहजता नहीं थी. उसकी वही पुरानी, चुलबुली और नटखट अदा कायम थी. उसने कसकर अपने दोनों हाथों से बिस्तर की सफेद चादर को मुट्ठी में भींच रखा था ताकि वह इस रोमांच का पूरा लुत्फ उठा सके. उसने अपनी गर्दन को मोडकर अपनी तिरछी और नीली आँखों से मोंटी की तरफ देखा, उसके पसीने से तर चेहरे को निहारा और एक प्यारी सी शरारती हंसी के साथ फुसफुसाते हुए बोली, वाह जनाब! क्या रफ्तार पकडी है. लग रहा है सच में आज इस कमरे की दीवारें भी तुम्हारी इस एनर्जी को याद रखेंगी! उसकी इस बेपरवाह और मस्ती भरी बात ने मोंटी के अंदर के जोश को और ज्यादा भडका दिया, और उसने अपनी रफ्तार को और भी तेज कर दिया. मोंटी की साँसें अब तेज हो चुकी थीं और उसके शरीर की सारी ऊर्जा उस तीव्र और अंतिम दौर में लग चुकी थी. एक गहरी और जोरदार काँपते हुए धक्के के साथ, उसने अपनी चरम सीमा पर पहुँचकर सिमरन की भीतरी गहराइयों में अपना सारा गर्म और गाढा **** उडेल दिया. अपनी **** की प्यास बुझाने के बाद मोंटी पूरी तरह से थक चुका था. वह बिना अपनी जगह से हिले, पसीने से तर- बतर होकर उसी अवस्था में सिमरन के गोरे और मखमली **** के ऊपर ही बेसुध सा होकर सो गया. उसका पूरा वजन सिमरन की पीठ पर था, और कमरे में सिर्फ दोनों की भारी साँसों की आवाज गूँज रही थी. इस स्थिति में भी सिमरन के चेहरे पर वही चिर- परिचित, चुलबुली और नटखट मुस्कान तैर रही थी. वह बिना किसी शिकायत के आराम से बिस्तर पर लेटी रही, मोंटी के भारी **** के नीचे दबे होने के बावजूद पूरी तरह से बेफिक्र और संतुष्ट नजर आ रही थी. थकान और ****ानी सुकून का यह दौर अपनी पराकाष्ठा पर पहुँच चुका था. मोंटी के भारी **** के नीचे दबी होने के बावजूद सिमरन को जरा सा भी बोझ महसूस नहीं हो रहा था. उस रिसॉर्ट के कमरे में छाए सन्नाटे और दोनों की धीमी होती साँसों के बीच, सिमरन ने भी अपनी आँखें मूंद लीं. वह उसी अवस्था में, बिना अपनी पोजीशन बदले, मोंटी के नीचे ही आराम से सो गई. उसके चेहरे पर अभी भी वही हल्की, नटखट और संतुष्ट सी मुस्कान तैर रही थी—मानो इस थका देने वाले और रोमांचक सफर के बाद एक गहरी और सुकून भरी नींद उसकी पूरी थकान को मिटा रही हो. बाहर रिसॉर्ट की ठंडी हवा खिडकी से अंदर आ रही थी, और कमरे में दोनों गहरी नींद में डूब चुके थे, अगले दिन की नई मस्ती और हंगामे के इंतजार में. सुबह की पहली किरणें रिसॉर्ट के कमरे की खिडकियों से छनकर अंदर आने लगीं, जिससे कमरे में एक नरम और सुहाना उजाला फैल गया. हल्की ठंडी हवा के झोंके के साथ ही कमरे की खामोशी टूटी. मोंटी की आँख खुली और उसने खुद को तरोताजा महसूस किया. रात भर सिमरन की गहराइयों में डूबे रहने के बाद, उसने धीरे- धीरे अपना गीला और शांत हो चुका लिंग बाहर निकाला. बिस्तर पर हल्की सी नमी छोडते हुए वह बिस्तर से उठा और बिना एक पल गंवाए सीधे बाथरूम की तरफ बढ गया, जहाँ वह शावर के नीचे खडे होकर ताजा होने लगा. दूसरी तरफ, मोंटी के उठने से बिस्तर पर एक हल्की सी हलचल हुई. सिमरन भी अपनी गहरी नींद से धीरे- धीरे बाहर आने लगी. उसके चेहरे पर वही पुरानी, नटखट और चुलबुली मुस्कान अभी भी बरकरार थी. उसने अपनी आँखें खोलीं, एक मीठी सी अलसायी हुई अँगडाई ली और बाथरूम से आ रहे पानी की आवाज को सुनते हुए चादर पर करवट बदल ली, जैसे वह इस दस दिनों के टूर के अगले और भी रोमांचक दिन की शुरुआत का बेसब्री से इंतजार कर रही हो. बाथरूम से आ रहे पानी के छप- छप की आवाज के बीच, सिमरन ने बिस्तर पर पडे- पडे ही अपनी पीठ को हल्का सा उचकाया. उसने अपना एक हाथ पीछे अपने गोरे और मखमली नितंबों की रेखा पर फेरा. रात को मोंटी द्वारा उसकी गहराइयों में उडेला गया सारा गाढा और गर्म बीज अभी भी रिसकर बाहर आ रहा था, जिससे उसके नितंबों के बीच की वह संवेदनशील जगह पूरी तरह से गीली और चिपचिपी हो रही थी. उस गर्माहट और गीलेपन को अपने हाथ की उंगलियों पर महसूस करके सिमरन की नीली आँखों में एक शरारती चमक और तेज हो गई. उसने अपनी उंगलियों को अपनी नाक के पास लाकर हल्का सा सूंघा और अपनी उसी चिर- परिचित, नटखट और मस्तमौला हंसी के साथ खुद से ही फुसफुसाते हुए कहा, वाह जनाब! लगता है कल रात सचमुच कोई कसर बाकी नहीं छोडी थी. पूरा का पूरा भंडार यहीं छोड गए हैं! उसके चेहरे पर वही बेपरवाह और चुलबुली मुस्कान तैर रही थी. उसने बिना किसी झिझक या जल्दबाजी के आराम से करवट बदली, अपने हाथ को चादर पर पोंछा और बिस्तर पर ही बैठकर बाथरूम के दरवाजे की तरफ देखने लगी, जहाँ मोंटी नहाकर बाहर आने ही वाला था. बाथरूम का दरवाजा खुला और मोंटी ताजा होकर तौलिया लपेटे बाहर निकला. उसके बाल गीले थे और उसके चेहरे पर सुबह की ताजगी साफ नजर आ रही थी. उसी वक्त, सिमरन ने बिना एक पल की भी झिझक के बिस्तर से पैर नीचे रखे और पूरी तरह से **** अवस्था में ही बाथरूम की तरफ बढने लगी. उसकी चाल में वही हमेशा की तरह एक मदहोश करने वाली मटकती हुई अदा थी, जिससे उसके गोरे और भारी नितंब हवा में लयबद्ध तरीके से हिल रहे थे. जैसे ही सिमरन आगे बढी, मोंटी की नजर उसके उन कोमल नितंबों के बीच पडी. रात को मोंटी द्वारा उसकी गहराइयों में उतारा गया वह गाढा और सफेद बीज अब गुरुत्वाकर्षण और रिसन के कारण धीरे- धीरे बाहर की तरफ बह रहा था, जो उसकी गोरी रंगत पर साफ चमक रहा था. यह दृश्य देखकर मोंटी के चेहरे पर एक गंदी और संतोष से भरी हुई मुस्कान तैर गई. उसने अपनी आँखें छोटी करते हुए सिमरन के उन गतिशील और गीले नितंबों को निहारा और मन ही मन अपनी इस रात की सफलता पर गर्व महसूस करने लगा. सिमरन ने मुडकर मोंटी की इस नजर को भांप लिया. उसने अपनी नीली आँखों को मटकाया, एक नटखट सी हंसी बिखेरी और बाथरूम के दरवाजे पर पहुँचकर मोंटी की तरफ देखते हुए बडे चुलबुले अंदाज में बोली, क्या जनाब, सुबह- सुबह ही पुरानी यादों को देखकर दिल ललचा रहा है क्या? थोडी देर रुको, नहाकर आती हूँ फिर देखते हैं आगे क्या करना है! इतना कहकर वह खिलखिलाती हुई बाथरूम के अंदर चली गई और दरवाजा बंद कर दिया, जबकि मोंटी उसकी उस बेपरवाह और बोल्ड अदा को देखकर मुस्कुराता ही रह गया. बाथरूम के अंदर शावर के नीचे कुछ देर तक ताजा पानी में नहाने के बाद सिमरन का **** पूरी तरह से साफ और महकने लगा था. नहाने के बाद उसने खुद को पोंछा भी नहीं और वैसे ही पूरी तरह से **** अवस्था में बाथरूम के दरवाजे से बाहर निकल आई. कमरे में दाखिल होते ही उसने मोंटी की तरफ अपनी पीठ कर ली और बिस्तर के किनारे पर थोडा आगे की ओर झुक गई. उसके इस तरह झुकने से उसके गोरे, भारी और मखमली नितंब पूरी तरह से हवा में ऊपर उठ गए, जिन पर पानी की कुछ बूंदें अभी भी चमक रही थीं. मोंटी, जो अभी- अभी नहाकर तौलिया लपेटे तरोताजा हुआ था, सिमरन की इस कातिलाना और **** अदा को देखकर खुद को रोक नहीं पाया. उसकी आँखें **** से चमक उठीं. वह तुरंत आगे बढा, उसने अपने दोनों हाथों से सिमरन के उन गर्म और मखमली नितंबों को कसकर अपनी मुट्ठी में भर लिया और उन्हें थोडा फैलाया. बिना एक पल की भी देरी किए, उसने अपने कडे और मचलते हुए लिंग को आगे बढाया और एक ही जोरदार झटके के साथ सिमरन की भीतरी गहराइयों में पूरी गहराई तक उतार दिया. इस अचानक और तीव्र प्रहार के बावजूद सिमरन के चेहरे पर जरा सी भी शिकन या घबराहट नहीं आई. उसकी वही नटखट और चुलबुली शख्सियत कायम रही. उसने अपने दोनों हाथों से पलंग के लकडी के फ्रेम को कसकर पकड लिया ताकि वह इस धक्के के रोमांच को पूरी तरह से महसूस कर सके. इसके बाद उसने अपनी गर्दन को हल्का सा मोडा, अपनी नीली आँखों को तिरछा करके सीधे मोंटी की आँखों में देखा और अपनी उसी जानी- पहचानी शरारती हंसी के साथ बडे मस्तमौला अंदाज में फुसफुसाते हुए बोली, वाह जनाब! लग रहा है सुबह की शुरुआत भी कल रात से भी ज्यादा धमाकेदार होने वाली है. देखते हैं आज तुम कितनी देर टिक पाते हो! उसकी इस खुली चुनौती और बेपरवाह अंदाज ने मोंटी के अंदर के जोश को सातवें आसमान पर पहुँचा दिया, और कमरे का माहौल एक बार फिर पूरी तरह से गर्मा गया. जैसे- जैसे सुबह का सू
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Chapter 1
बेबाक सिमरन का दीवानापन - Chapter 1 -
Chapter 2
बेबाक सिमरन का दीवानापन - Chapter 2 -
Chapter 3
बेबाक सिमरन का दीवानापन - Chapter 3 -
Chapter 4
बेबाक सिमरन का दीवानापन - Chapter 4 -
Chapter 5
बेबाक सिमरन का दीवानापन - Chapter 5 -
Chapter 6
बेबाक सिमरन का दीवानापन - Chapter 6