खोलो इसे अभी
उसकी बात सुनते ही विश्रांत के चेहरे पर एक धीमा, मदहोश कर देने वाला तनाव उभर आया। उसने एक पल भी गंवाए बिना अपनी सीट से झुकते हुए सीधे उसकी तरफ रुख किया। उसका भारी, चौड़ा **** जैसे ही आर्ची की तरफ बढ़ा, आर्ची की सांसें गले में अटक गईं। वो घबराकर फौरन पीछे हटने लगी, उसकी पीठ कार के ठंडे दरवाज़े से जा चिपकी। दिल की धड़कनें इतनी तेज़ हो गईं कि सीधे कानों में सुनाई देने लगीं।
विश्रांत ने एक हाथ उसके सिर के ठीक पीछे सीट के हेडरेस्ट पर टिकाया और दूसरा हाथ दरवाज़े के हैंडल पर रख दिया। उसने आर्ची को पूरी तरह से अपनी बाहों के दायरे में घेर लिया था।
"पीछे हटने का कोई फायदा नहीं," विश्रांत की आवाज़ बेहद भारी, धीमी और तीखी थी, जो सीधे आर्ची की गर्दन पर गर्म सांसों की तरह टकरा रही थी। "क्योंकि यह कार इतनी बड़ी नहीं होगी कि तुम मुझसे बचकर कहीं भाग सको। और रही बात जासूसी की? तो तुम मुझसे दूर जाने की तैयारी कर रही हो और मैं इतना भी पता न लगा पाऊं? लानत है ऐसे मर्द पर और लानत है मेरे प्यार पर।"
उसकी इस पज़ेसिवनेस पर आर्ची का खून खौल उठा। उसने गुस्से में अपनी तीखी नज़रों से उसे घूरा और चिढ़कर अपना मुंह बना लिया।
विश्रांत ने उसकी इस बेपरवाही को देखा और उसकी नज़रों का पारा और चढ़ गया। वो और ज़्यादा नीचे झुका। उसका चेहरा आर्ची के बिल्कुल करीब आ गया—इतना करीब कि विश्रांत के होंठ आर्ची के गुलाबी, कांपते हुए होंठों से बस एक इंच की दूरी पर थे।
"बताओगी कि क्यों जा रही हो?" विश्रांत ने उसकी आँखों में अपनी गहरी, नशीली आँखें गड़ाते हुए फुसफुसाया, "या फिर अपने होंठ तुम्हारे इन जिद्दी होंठों में मिला कर पूछ लूँ?"
उसकी इस बात ने आर्ची के पूरे बदन में एक सिहरन दौड़ा दी। वो अंदर तक सहम गई। उसने तुरंत झटके से अपना चेहरा दूसरी तरफ फेर लिया, ताकि उसके होंठ उससे छू न जाएं।
"भा... भाग नहीं रही हूँ मैं! और न ही आपसे डर रही हूँ," आर्ची ने कांपती आवाज़ को संभालने की पूरी कोशिश करते हुए कहा। "कज़िन की शादी है मेरी... मामा के यहाँ, इसीलिए लीव ली है मैंने।"
जैसे ही यह लफ्ज़ विश्रांत के कानों में पड़े, उसका तनाव थोड़ा ढीला पड़ा। वो एक गहरी, भारी सांस छोड़ते हुए धीरे से पीछे हुआ और वापस अपनी ड्राइविंग सीट से टिक गया।
आर्ची ने एक लंबी राहत की सांस ली। उसका दिल अब भी बेतहाशा धड़क रहा था। उसने अपने बिखरे हुए बालों को कांपती उंगलियों से संवारा और खुद को नॉर्मल करने की कोशिश करने लगी।
लेकिन सुकून के वो पल बहुत छोटे साबित हुए।
विश्रांत ने अचानक अपनी गर्दन उसकी तरफ घुमाई, चेहरे पर फिर से एक गहरा, संजीदा सा शिकन उभर आया। "शादी में क्या पहनने वाली हो?"
आर्ची दंग रह गई। उसने अपनी बड़ी-बड़ी आँखें फैलाकर उसे देखा, "क्या? आपसे मतलब? मैं कुछ भी पहनूँ, आपको इससे क्या लेना-देना?"
विश्रांत की आँखें गुस्से से सिकुड़ गईं। आवाज़ में वही हक़ जताने वाला अधिकार था, "मुझसे मतलब है! जानना ज़रूरी है मेरे लिए... कहीं तुमने कुछ भी उल्टा-सीधा पहन लिया तो?"
"तो?!" आर्ची ने तिनक कर कहा, उसकी भौंहें तन गईं।
विश्रांत ने स्टीयरिंग व्हील पर अपनी उंगलियों की पकड़ इतनी सख्त कर ली कि उसकी नसें उभर आईं। उसने अपनी रगों में दौड़ती गर्मी को दबाने की कोशिश करते हुए बहुत ठंडे लेकिन खतरनाक लहज़े में कहा, "तो पूरी शादी में सब तुम्हें घूरेंगे। लड़के दीवाने बन-बन के तुम्हारे इर्द-गिर्द मंडराएंगे, और..."
"और आपको लगता है कि मैं किसी से भी पट जाऊंगी?" आर्ची ने बीच में ही उसकी बात काट दी। उसके चेहरे पर एक तंज़िया गुरूर झलक उठा। उसने सीधे विश्रांत की आँखों में देखकर कहा, "जब इतने महीनों में आपसे नहीं पटी, तो आपको लगता है मैं किसी और से पट जाऊंगी?"
यह कहकर उसने तुरंत कार का लॉक खींचा और दरवाज़ा खोलने की कोशिश की।
लेकिन इससे पहले कि वो बाहर निकल पाती, विश्रांत ने झटके से उसका हाथ पकड़कर उसे अपनी तरफ खींच लिया।
"मैं ये नहीं कह रहा कि तुम किसी के साथ रिलेशन में आ जाओगी," विश्रांत की आवाज़ में एक अजीब सा पागलपन और वहशीपन था। उसकी पकड़ आर्ची की कलाई पर बेहद सख्त थी। "और अगर आ भी गई ना... तो उस साले को मैं अपनी इन नज़रों के सामने ज़िंदा मार दूंगा। नो डाउट अबाउट दैट।"
उसका खौफनाक अंदाज़ देखकर आर्ची की सांसें थम गईं।
"लेकिन मुझे फिर भी जानना है कि तुम क्या पहनने वाली हो," विश्रांत ने अपने हर एक लफ्ज़ पर ज़ोर दिया। "और जब तक नहीं बताओगी, मैं तुम्हें इस गाड़ी से एक इंच भी बाहर नहीं जाने दूंगा।"
"अभी तो आपने बाहर कसम खाई थी कि आप सिर्फ बात करेंगे!" आर्ची ने तड़पकर अपनी कलाई छुड़ाने की कोशिश करते हुए कहा, "यही आपकी बातें हैं?"
विश्रांत की होंठों पर एक बहुत ही धीमी, मदहोश सी मुस्कान आई। उसने आर्ची की आंखों से अपनी नजरें हटाईं और बहुत धीमी गति से उसकी पतली कमर से होते हुए उसके सीने पर अपनी नज़रों को टिका दिया। उसका अंदाज़ इतना बोल्ड और खुला था कि माहौल की हवा में जैसे आग लग गई।
"और मुझे लगता है कि शायद तुम मेरी ये नज़रें भी बर्दाश्त न कर पाओ..."
इतना कहते हुए उसकी तीखी, भूखी नज़रों ने सीधे उसके टाइट कुर्ते के उभारों पर अपना पूरा ध्यान टिका दिया। वो बिना किसी हिचक के, बेहद बेबाकी से उसे देखने लगा।
आर्ची का बदन शर्म और घबराहट से सुन्न पड़ गया। उसके रोंगटे खड़े हो गए। उसने एक पल भी गंवाए बिना झटके से अपना मुंह दूसरी तरफ मोड़ लिया, दोनों हाथों से अपने दुपट्टे को कसकर सीने पर लपेट लिया और चिढ़कर, झुंझलाते हुए खुद से ही बुदबुदाई।
"हे भगवान... मैं किस मुसीबत में फंस गई!"
आर्ची ने घबराकर दरवाज़े की तरफ और ज़्यादा सिमटने की कोशिश की। वो बस किसी तरह उसकी इन आग उगलती नज़रों के दायरे से निकल जाना चाहती थी।
लेकिन विश्रांत कहाँ पीछे हटने वाला था। उसने आर्ची को भागने का ज़रा भी मौका नहीं दिया। वो और आगे बढ़ा, उसके बदन के बिल्कुल करीब आ गया। आर्ची ने अभी पूरी तरह मुंह फेरा ही था कि विश्रांत ने अपना चेहरा सीधे उसकी ****, नाज़ुक गर्दन के पास झुका दिया।
अगले ही पल, उसने आर्ची के कान के ठीक नीचे, गर्दन की मखमली त्वचा पर अपने गर्म, भीगे होंठ टिका दिए।
एक हल्का सा, मदहोश किस।
"आह..." आर्ची के मुंह से एक बेबस, दबी हुई सिसकी निकली। पूरे बदन में एक तेज़ करंट सा दौड़ गया। उसके पैर की उंगलियां तक सिहर उठीं और हाथ खुद-ब-खुद अपनी मुट्ठियों में भींच गए।
विश्रांत के होंठ वहीं उसकी गर्दन को छूते रहे। उसकी गर्म सांसें आर्ची की नसों में आग लगा रही थीं।
"अब बताना है..." विश्रांत की आवाज़ बेहद भारी, नशीली और धीमी थी, जैसे सीधे उसकी रूह से बात कर रहा हो, "...या फिर तुम्हें खुद मेरा यूं करीब आना पसंद आ रहा है? सच-सच बताओ, दिल ही दिल में चाहती हो ना कि मैं तुम्हारे साथ रोमांस करूँ?"
"छो... छोड़िए मुझे!" आर्ची ने बदहवास होकर अपने दोनों हाथ उसके चौड़े सीने पर टिकाए और पूरी ताकत लगाकर उसे पीछे धकेला।
उसकी सांसें बुरी तरह फूल रही थीं। उसने कांपते हाथों से अपना पर्स खोला, मोबाइल निकाला और झटपट गैलरी खोलकर स्क्रीन सीधे विश्रांत के चेहरे के आगे अड़ा दी।
"ये! ये पहनने वाली हूँ मैं! देख लीजिए और अब मेरा पीछा छोड़िए!" वो हांफते हुए चिल्लाई।
स्क्रीन पर एक बेहद खूबसूरत, डिज़ाइनर इंडो-वेस्टर्न ड्रेस की तस्वीर थी। वो रॉयल ब्लू कलर की ड्रेस थी, जिसका डिज़ाइन बेहद कातिल था—बाजू पूरी तरह ट्रांसपेरेंट नेट के थे और कमर के दोनों तरफ से डीप कट्स थे, जहाँ सिर्फ महीन, पारदर्शी कपड़ा लगा हुआ था। वो ड्रेस किसी भी लड़की की फिगर को पूरी तरह फ्लॉन्ट करने के लिए बनी थी।
विश्रांत की आँखें स्क्रीन पर टिकीं। उसने उस ड्रेस को देखा, फिर अपनी नज़रें धीरे से ऊपर उठाईं और सीधे आर्ची के चेहरे पर टिका दीं।
उसकी आँखों में एक खतरनाक, भूखा सा नशा उतर आया था।
"तो..." विश्रांत ने बहुत धीमी, गहरी टोन में कहा, उसके होंठों पर एक शैतानी मुस्कान खिंच आई, "...सबके सामने अपनी ये इतनी हॉट और स्लिम कमर दिखाना चाहती हो? तुम्हें ज़रा सा भी अंदाज़ा है कि तुम्हारी ये कमर देखकर लड़कों का क्या हाल होगा?"
उसका अंदाज़ इतना बोल्ड था कि आर्ची का चेहरा शर्म से जलने लगा। लेकिन विश्रांत की बातें सिर्फ लफ्ज़ नहीं थीं; उसके अपने **** पर भी आर्ची के इस हुस्न और उसकी नज़दीकी का असर साफ़ दिखने लगा था। उसकी सांसें भारी हो चुकी थीं और उसकी रगों में दौड़ती गर्मी सीधे उसके निचले पार्ट में उतर आई थी। उसकी टाइट पैंट के नीचे वो उभार साफ़ महसूस होने लगा था—वो पूरी तरह हार्ड हो चुका था।
विश्रांत के उस खुले, बेबाक उभार पर जैसे ही आर्ची की नज़र पड़ी, उसका पूरा दिमाग सुन्न हो गया। शर्म, घबराहट और एक अजीब सी बेबसी ने उसे घेर लिया।
"न... नहीं! मुझे नहीं रुकना यहाँ!" आर्ची किसी पागलों की तरह छटपटा उठी। उसने बदहवासी में पैसेंजर साइड का डोर हैंडल पकड़ा और उसे पागलों की तरह दो-तीन बार ज़ोर-ज़ोर से खींचा।
खट-खट!
दरवाज़ा टस से मस नहीं हुआ। चाइल्ड लॉक और सेंट्रल लॉक दोनों ऑन थे। कार पूरी तरह सील थी।
"खोलो इसे! प्लीज़ दरवाज़ा खोलो, मुझे जाना है! मुझे अभी जाना है यहाँ से!" वो रोनी सूरत बनाकर दरवाज़े को पीटते हुए चिल्लाने लगी। उसका दिल हलक में आ गया था, बदन पसीने से भीग चुका था और सांसें बुरी तरह फूल रही थीं। वो उस बंद गाड़ी के अंदर एक जाल में फंसी चिड़िया की तरह तड़प रही थी।
विश्रांत ने उसे न तो पकड़ा, न ही कोई ज़ोर-ज़बरदस्ती की। वो आराम से अपनी सीट से टेक लगाए बैठा रहा। आर्ची का ये बचपना, उसकी ये बेबसी और उसका खौफ देखकर विश्रांत के चेहरे पर एक बेहद सुकून भरी, कातिलाना मुस्कान खिल गई।
उसकी गहरी, नशीली आँखों में एक अजीब सा गुरूर था। वो बड़े इत्मीनान से आर्ची के उस घबराए हुए चेहरे को देखता रहा, जो डर के मारे कभी दरवाज़े का हैंडल खींच रही थी तो कभी सहमी हुई नज़रों से उसे देख रही थी।
विश्रांत ने अपनी उंगली की पोर से अपने होंठों को छुआ, जिन पर अभी-अभी आर्ची की नाज़ुक गर्दन का अहसास लगा हुआ था। उसके चेहरे की वो मखमली मुस्कान और गहरी हो गई, जैसे वो मन ही मन कह रहा हो—बंद गाड़ी से भागने की कोशिश कर रही हो, मेरी पनाहों से कैसे भागोगी?
To be continued ✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️
Guys comment kaha hai ?