दीवाना पति
रात के सन्नाटे में एक आलीशान हवेली जैसा कमरा, जो किसी पैराडाइज से कम नहीं लग रहा था, एक अजीब सी घुटन से भरा हुआ था। संगमरमर के ठंडे फर्श पर कांच के अनगिनत नुकीले टुकड़े बिखरे पड़े थे। उन्हीं के बीच बैठी थी भारी लाल जोड़े में सजी एक नई-नवेली दुल्हन—आर्ची।
उसके गोरे, नाज़ुक पैरों से गहरा लाल खून रिसकर फर्श पर फैल चुका था। कांच के कई टुकड़े उसकी एड़ी और उंगलियों में गहरे धंसे हुए थे, लेकिन उसके चेहरे पर उस ****ानी दर्द की कोई शिकन तक नहीं थी। आर्ची फर्श पर घुटनों के बल बैठी थी, उसका सिर बिस्तर की रेशमी चादर पर टिका हुआ था और उसका पूरा वजूद हिचकियों से कांप रहा था। उसकी आँखों से बहते आँसू पैरों के ज़ख्म की वजह से नहीं, बल्कि उस अपमान की वजह से बह रहे थे जो कुछ ही मिनट पहले उसकी रूह पर लगा था।
तभी कमरे के भारी दरवाज़े पर आहट हुई। दरवाज़ा खुला और अंदर दाखिल हुआ दूल्हे की रॉयल शेरवानी में सजा विश्रांत।
विश्रांत का ऑरा ही कुछ ऐसा था कि कोई भी देखकर दंग रह जाए। सिक्स-फीट से भी ज़्यादा की कद-काठी, ब्रॉड शोल्डर्स, कटिंगदार मस्कुलर चेस्ट और एकदम शार्प जॉलाइन। चेहरे पर हल्की सी ग्रूम्ड बियर्ड, घने बिखरे बाल और गहरी, तीखी आँखें—वो किसी टॉप क्लास सेलिब्रिटी या इंटरनेशनल बिज़नेस टायकून से कम नहीं लग रहा था। उसकी पर्सनैलिटी में एक अलग ही लेवल का क्लास और पावर था, पर इस वक्त उसकी उन कातिल नज़रों में सिर्फ और सिर्फ बेइंतहा नफ़रत और गुरूर झलक रहा था।
विश्रांत ने कमरे में कदम रखा, लेकिन फर्श पर खून से लथपथ बैठी उस लड़की की तरफ अपनी नज़र तक नहीं घुमाई। उसने अपना चेहरा दूसरी तरफ फेर रखा था, जैसे उसका साया भी छू जाए तो उसका क्लास गिर जाएगा।
"तुम जो कोई भी हो, जस्ट लिसन टू मी वेरी केयरफुली," विश्रांत की आवाज़ भारी, मखमली लेकिन ज़हर जैसी ठंडी थी। उसकी टोन में एक बड़े बिज़नेसमैन का वही रूखापन था जो किसी को भी पल भर में तोड़ दे।
"तुम्हारी बहन तो मंडप छोड़ के भाग गई, और तुम? तुम उसकी जगह आकर बैठ गईं? चीप गेम! तुम्हें तो मेरी फैमिली भी इस घर की बहू नहीं मानती। सब जानते हैं कि तुम इस घर में सिर्फ एक धोखे से आई हो।"
आर्ची ने बिस्तर पर सिर टिकाए-टिकाए ही अपनी कांपती उंगलियों से चादर को कसकर जकड़ लिया। उसका गला रुंधा हुआ था, एक लफ्ज़ भी होंठों तक आकर घुट गया।
"पर सच कहूँ तो? मुझे न तुम्हारी उस भागी हुई बहन में कोई इंटरेस्ट था, और न ही तुम में कोई इंटरेस्ट है," विश्रांत ने अपने कोट के कफ़लिंक्स को बेपरवाही से ठीक करते हुए कहा, आवाज़ में नफ़रत की तीखी धार थी। "तुम्हारी यह शादी मेरे लिए सिर्फ एक मज़ाक है, नथिंग एल्स। मेरी हर एक सांस, मेरी ज़िंदगी किसी और के नाम हो चुकी है। मैं हमेशा उसी से प्यार करूंगा। तुम इस कमरे में रहो या कहीं और, मेरे लिए तुम सिर्फ एक ज़िंदा लाश की तरह हो। मैं तुम्हारी शक्ल देखना तो बहुत दूर, इस कमरे में दोबारा कदम भी नहीं रखूंगा। सो डोंट यू डेयर एक्सपेक्ट एनीथिंग फ्रॉम मी!"
इतना ज़हर उगलने के बाद, उसने पलटकर देखा तक नहीं। वो अपनी उसी पावरफुल चाल से बाहर निकला और दरवाज़ा धड़ाम से बंद कर दिया।
कमरे में फिर से वही भयानक सन्नाटा पसर गया। आर्ची ने धीरे-धीरे, कांपते हुए अपना सिर उठाया। बिखरे हुए काजल और भीगी पलकों के साथ उसने सामने दीवार पर लगे बड़े से शीशे की तरफ देखा।
शीशे में रो-रोकर लाल हो चुकी दो बड़ी-बड़ी, हिरनी जैसी आँखें नज़र आ रही थीं। दर्द और बेबसी में डूबी होने के बावजूद उन आँखों में एक ऐसी बला की कशिश थी कि कोई भी अपना दिल हार जाए। तीखे नैन-नक्श, दूधिया रंगत, गुलाब की पंखुड़ियों जैसे कांपते हुए होंठ और भीगे गाल—आर्ची की बेपनाह खूबसूरती उस लाल घूंघट के पीछे से भी चीख-चीख कर अपनी मौजूदगी दर्ज करा रही थी।
शीशे में खुद के अक्स को देखते हुए आर्ची के होंठों पर एक बेहद फीकी और बेबस मुस्कान आई।
‘कभी सोचा नहीं था कि जिस चेहरे की हर कोई तारीफ करता था, वही चेहरा आज मेरे लिए इतनी बड़ी बर्बादी बन जाएगा...’ उसने घुटते हुए सोचा।
अभी वो इस सदमे से संभल भी नहीं पाई थी कि दरवाज़ा एक बार फिर खुला। इस बार कमरे में विश्रांत की माँ, माला जी, भारी और तने हुए कदमों से दाखिल हुईं। उनके चेहरे पर क्लास के साथ-साथ एक अजीब सा घमंड और कड़वाहट थी।
माला जी ने आकर आर्ची को सिर से पैर तक बेहद हिकारत से देखा।
"एक बात का सीधा-सीधा जवाब दो," माला जी ने अपनी बाहें सीने पर बांधते हुए कड़क आवाज़ में पूछा, "तुम उस लड़की की बड़ी बहन हो या छोटी?"
आर्ची ने दर्द से कराहते हुए बहुत धीमी, कांपती आवाज़ में कहा, "ब... बड़ी बहन..."
यह सुनते ही माला जी के चेहरे पर पहले तो हैरानी आई, फिर एक ज़हरीली तंज़िया हंसी फैल गई। "ओह! तो यह घटिया खेल खेला गया है हमारे साथ! तुम्हारी शादी कहीं हो नहीं रही होगी, उम्र निकल रही होगी, इसलिए छोटी बहन का चेहरा दिखाकर इस बड़ी बहन को हमारे गले मढ़ दिया!"
"माजी, प्लीज मेरी बात सुनिए... ऐसा कुछ नहीं—" आर्ची ने हाथ जोड़कर सफाई देनी चाही।
"मुझे माजी मत कहो!" माला जी ने हाथ उठाकर उसे वहीं रोक दिया। "कान खोलकर सुन लो, मेरा बेटा विश्रांत तुम्हें ज़िंदगी भर कभी नहीं अपनाएगा। और इस घर की बहू बनना? वो सपना देखना भी छोड़ दो। इस घर में तुम्हारी कोई जगह नहीं है। अगर ज़रा सी भी गैरत और सेल्फ-रिस्पेक्ट बाकी है, तो अपना यह तमाशा समेटो और इसी वक्त यह घर छोड़कर जा सकती हो!"
इतना कहकर माला जी ने एक पल भी उस कमरे में रुकना गवारा नहीं समझा। वो मुड़ीं और दरवाज़ा ज़ोर से बंद करके चली गईं।
कमरे में आर्ची बिल्कुल अकेली रह गई। दिल पर इतने गहरे वार हो चुके थे कि पैरों से बहता खून अब बेमानी लग रहा था।
‘जब कोई मुझे देखना ही नहीं चाहता, जब सबको मुझसे इतनी नफ़रत है, तो मैं यहाँ रहकर क्या करूंगी?’ आर्ची ने भरे मन से सोचा।
उसने अपना शरीर उठाने की कोशिश की। वो लड़खड़ाते हुए खड़ी तो हुई, लेकिन जैसे ही पहला कदम बढ़ाया, तलवों में धंसे कांच ने जानलेवा दर्द दिया। उसका संतुलन पूरी तरह बिगड़ गया, पैर फिसला और वो सीधे कोने में रखी महोगनी की बड़ी सी साइड टेबल की तरफ गिर पड़ी।
टेबल का सहारा लेते हुए उसने खुद को संभाला। तभी उसका हाथ टेबल पर रखी एक भारी सी फोटो फ्रेम पर पड़ा। आर्ची ने अपनी भीगी पलकों को झपकाते हुए उस तस्वीर पर नज़र डाली।
फोटो पर नज़र पड़ते ही आर्ची के अंदर जैसे कोई बिजली कौंध गई। उसकी आँखें फटी की फटी रह गईं, सांसें गले में अटक गईं।
फ्रेम में कोई और नहीं, बल्कि वही लड़का मुस्कुरा रहा था जो रोज़ कॉलेज के बाहर, उसकी गली के मोड़ों पर छुप-छुप कर उसे देखा करता था। वही लड़का, जो उसकी एक झलक पाने के लिए घंटों धूप और बारिश में खड़ा रहता था, जिसकी आँखों में उसने अपने लिए बेपनाह, पागल कर देने वाली दीवानगी देखी थी।
आर्ची के मुंह से एक दबी हुई चीख निकली। उसने कांपते हुए अपना सिर उठाया और पूरे कमरे में नज़र दौड़ाई।
कमरे का नज़ारा देखकर उसके होश उड़ गए।
चारों तरफ, कमरे की हर एक दीवार पर बेहद खूबसूरती से उसी लड़के की बड़ी-बड़ी, शानदार तस्वीरें लगी हुई थीं। कहीं वो कैंडिड स्माइल में था, कहीं बिजनेस सूट में बेहद ग्रेसफुल, तो कहीं किसी गहरी सोच में डूबा हुआ।
यह कमरा... यह पूरा पैराडाइज... और वो नफ़रत और एटीट्यूड से बात करने वाला हैंडसम दूल्हा... कोई गैर नहीं था।
वो विश्रांत था। वही विश्रांत, जो उसके प्यार में पागल था!
आर्ची के आंसुओं से धुंधलाए चेहरे पर अचानक एक हैरान कर देने वाली चमक आ गई। उसकी आँखों का दर्द पल भर में एक अजीब से सुकून और हैरत में बदल गया। जिस इंसान की नफरत भरी बातों ने अभी-अभी उसकी रूह को छलनी किया था, वो असल में वही था जो उस पर अपनी जान छिड़कता था।
To be continued ✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️